00:00कल्पना कीजिए, एक ऐसा समय जब पूरे ब्रहमांड में भैचा गया था, स्वर्ग के देवता भी अपने ही लोग से
00:10भागने लगे थे, मंदिरों की घंटिया मौन थी और धर्म की शक्ती कमजोर पढ़ती जा रही थी,
00:18क्योंकि उस समय एक ऐसा असुर जन्म ले चुका था, जिसे कोई देवता, कोई मनुष्य और कोई भी पुरुष नहीं
00:28मार सकता था, उस असुर का नाम था महिशासुर, महिशासुर ने वर्षों तक कठोर तपस्या की, और भगवान ब्रहमा को
00:37प्रसन्न कर लिया,
00:38ब्रहमा जी से उसने एक ऐसा वर्दान मांगा, जिसने उसे लगभग अजे बना दिया, उसने कहा, मुझे ऐसा वर्दान दीजिये
00:49की, मेरा वध किसी भी देवता या पुरुष के हाथों नहो सके,
00:54ब्रह्मा जी ने उसे यह वर्दान दे दिया
00:56बस फिर क्या था?
00:59वर्दान मिलते ही
01:01महिशासुर का अहंकार आस्मान छूने लगा
01:04उसने अपनी सेना के साथ
01:07देवताओं के स्वर्ग लोग पर आक्रमन कर दिया
01:10देवता एक
01:11एक करके हारने लगे
01:14इंद्र का सिनहासन छिन गया
01:16स्वर्ग लोग पर महिशासुर का कबजा हो गया
01:28पूरे ब्रह्माड में
01:29अधर्म और अन्याय फैलने लगा
01:32तब सभी देवता
01:34भगवान ब्रह्मा विश्नु और महादेव के पास पहुँचे
01:38देवताओं का दुख देखकर
01:40तीनों देवों के क्रोध से एक अध्भुत दिव्य उर्जा प्रकट हुई
01:45और उस दिव्य उर्जा से जन्म हुआ
01:49मादुर्गा का
01:51मादुर्गा कोई साधारन देवी नहीं थी
01:53वे सभी देवताओं की शक्तियों से बनी
01:56एक दिव्य शक्ती थी
01:59भगवान शिव ने उन्हें दिया त्रिशूल
02:02भगवान विश्णू ने दिया सुदर्शन चक्र
02:05इंद्र ने दिया वजर
02:07वरुन ने दिया शंक
02:09और हिमालय ने उन्हें दिया
02:12एक विशाल और शक्तिशाली सिंह वाहन
02:15Now the time came.
02:48In the 9 days in the end of the day,
02:58Devi has destroyed the power of Asura.
03:1526.
03:207.
03:2727.
03:28खर्म की विजय हुई, इसी विजय की स्मृती में, दसवे दिन मनाया जाता है विजया दश्मी, लेकिन नवरात्री का अर्थ
03:38सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं है, यह हमें एक गहरी आध्यात्मिक शिक्षा भी देती है.
03:52महिशासुर केवल एक असुर नहीं था, वह प्रतीक है, अहमकार, क्रोध, लालच और नकारात्मक्ता का, जो हर इंसान के भीतर
04:03मौजूद होती है.
04:05और मादुर्गा प्रतीक है, साहस, शक्ती और सकारात्मक उर्जा का, नवरात्री के इन नौ दिनों में, लोग वरत रखते हैं,
04:17मंत्र जब करते हैं, और मादुर्गा की पूजा करते हैं.
04:22कहा जाता है कि, वरत से शरीर शुद्ध होता है, मंत्र से मन शान्त होता है, और भक्ती से आत्मा
04:32जागरित होती है.
04:34इसलिए नवरात्री केवल एक त्योहार नहीं, यह एक संदेश है, कि जब भी जीवन में, अंधकार और नकारात मकता बढ़े,
04:44तो हमें अपने भीतर की शक्ती को जगाना चाहिए, क्योंकि अंत में, हमारे भीतर की दुरगाही, हमारे भीतर के महिशासुर
04:54को पराजित करती
04:55है, अगर आपको यह ज्यान अच्छा लगा, तो वीडियो को लाइक करें, अपने दोस्तों के साथ शेयर करें, और ऐसे
05:05ही आध्यात्मिक ज्यान के लिए, सब्सक्राइब करें, चिंतन धारा
Comments