00:00नवरात्री के तीसरे दिन, भक्तों की भक्ती और साहस का प्रतीक मा चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।
00:07बहुत समय पहले की बात है, संसार में भै और नकारात्मक शक्तियां फैल गई थी।
00:13लोग डर और असुरक्षा में जी रहे थे।
00:16किसी को यह समझ नहीं आ रहा था कि इस अंधकार और भै से मुक्ती कैसे पाए।
00:21तभी दिव्य लोग से प्रकट हुई मा चंद्रघंटा।
00:25उनका नाम ही उनके स्वरूप का प्रतीक था चंद्रघंटा।
00:29उनके माथे पर चंद्रमा जैसी घंटी है, जो हर भै और नकारात्मक्ता को दूर करती है।
00:35उनके तेजस्वी और वीर रूप को देख कर राक्षस और नकारात्मक शक्तियां भी भैभीत हो जाती थी।
00:42माथ चंद्रघंटा केवल शक्ति की देवी नहीं है, वे साहस, वीर्ता और आत्म विश्वास की देवी भी है।
00:49उनका रूप तेजस्वी और दिव्य है।
00:52उनकी साड़ी पीली या सुनहरी है, जो उर्जा और सकारात्मक्ता का प्रतीक है।
00:58उनके दस हाथ हैं, जिनमें उन्होंने त्रिशूल, शस्त्र, कमंडल, रत और अन्य शक्तिशाली हतियार धारन किये हुए हैं।
01:06उनकी आखों में गहराई है, जो भै और नकारात्मक शक्तियों को नश्ट करती हैं और भक्तों में आत्म विश्वास और
01:12साहस भरती है।
01:13माता शेर पर सवार है, जो वीर्ता, गती और शक्ति का प्रतीक है।
01:19उनके पीछे सूरज की किरणों जैसी दिव्यता फैलती हैं, जिससे उनके भक्तों के मन में उर्जा और उत्सा आता है।
01:27कहते हैं कि माता ने इस रूप में प्रकट होकर संसार में फैली नकारात्मक शक्तियों और भै को नश्ट किया।
01:34जो भक्त भैभीत नहीं होते, माता उन्हें अपनी दिव्यता और शक्ती से संकटों में साहस और सुरक्षा देती हैं।
01:42उनका यह रूप भक्तों को यह सिखाता है कि संकट और कठिनाईयों पर विजय केवल साहस और भक्ती से संभव
01:48है।
01:49महत्व और लाब मा चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों को मिलता है।
01:55साहस और वीरता कठिन परिस्थितियों में दर ना लगे।
01:59नकारात्मक शक्तियों का नाश जीवन में नकारात्मक उर्जा कम हो।
02:03संकट में स्थिर्ता और मानसिक शक्ति, मानसिक संतुलन और धैर्य, सकारात्मक उर्जा और आत्मविश्वास, जीवन में उत्सा और सफलता, भाय
02:13और संकोट से मुक्ती भाय पर विजय और निडरता, पूजा विधी, सुभा जल्दी उठकर सनान करें, पीला या सुनहरा �
02:22वस्त्र पहने या शुबरंग है, माता की मूर्ती या चित्र के सामने बैठें, पीले फूल, दीपक और अक्षत चढ़ाए, मंत्र
02:32का जाप करें, ओम देवी चंद्र घंटाया नमा, पूजा करते समय ध्यान रखें, मन शांत और शुद्ध हो, केवल भक्ती
02:42भाव से पूज
02:42करें, दिखावा न करें, मूर्ती का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो, सुर्योदय का समय श्रेष्ट माना जाता
02:51है, मंत्र और रंग, शुब रंग, पीला, शक्तिशाली मंत्र, ओम देवी चंद्र घंटाया नमा, मंत्र जाप करते समय मन से
03:02शक्ति, साहस और सकारा
03:12पूजा स्थल और शरीर की साफ सफाई आवशक, भक्ती भाव के साथ पूजा करें, केवल बाहरी प्रदर्शन न करें, मंत्र
03:23जाप लगातार और ध्यानपूर्वक करें, नकारात्मक शक्तियों को आकर्शित करने वाली चीज़े पूजा स्थल पर न रखें, पूजा के सम
03:31मन में नकारात्मक विचार ना आए, आध्यात्मिक महत्व, मा चंद्रघंटा भक्तों को यह सिखाती है कि संकट और कठिनाई के
03:41समय भी मन स्थिर, सासिक और मजबूत रहना चाहिए, जो भक्त उनके नियमपूर्वक पूजा करते हैं, उनका जीवन संकट मुक्त,
03:50स्थिर �
03:50और सफल होता है, मा की भक्ती से भय, संकोच और नकारात्मकता दूर होती है, तो यह थी नवरात्री के
03:58तीसरे दिन की पूजा मा चंद्रघंटा, इन नियमों और भक्ती का पालन करके आप माता का पूर्ण आशिरवाद प्राप्त कर
04:06सकते हैं, कल हम जानेंगे चौथे दिन
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