00:00जब दुनिया शोड देती है साथ तब महादेव के स्पाही देती है साथ गने जंगल के बिच रात का सनाटा
00:06पसरा हुआ था चारो तरफ डर और अंदेरा था लेकिन एक इंसान बिना डरे आगे बढ़ रहा था उसकी आंखों
00:12में डर नहीं सिर्फ विश्वास था वह कोई आम
00:15इंसान नहीं था वह था महादेव का सिपाही जब भी कोई शंकर आता है तो बस एक नाम लेता हर
00:20-hari महादेव और फिर चम्तकार होता है जहां डर था वहाँ शक्तिया जाती है जहां अदेरा था वहाँ उजाला फैल
00:26जाता है कहते हैं जो सच्चे दिल से महादेव को जाद क
00:29He is not alone because he is with him as Mahadev.
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