00:03पहाडों के बिच बसा केदानाथ दाम जहां हर पत्थर में महादेव का बास माना जाता है एक बार एक जुबग
00:08जो जिन्दगी की परिशानियों से तूटा हुआ था बिना किसी जोजना के बस जूही निकल पड़ा केदानाथ की जातरा पादास
00:14ता कटिंटा थंडी हवाए �
00:16उंचे पहाड़ों तकहान से बड़ा स्रीज लेकिन उसके दिल में एकी आवाज गूंज रही थी महादेव बुला रहे है जैसे
00:21जैसे भी आगे बढ़ता गया उसे मैसूस होने लगा कोई अद्रिशे सक्ति उसकी मदद करी है कभी कोई अजनवी उसे
00:28पानी दे देता तो क�
00:32समझ आ गया जैसे महादेव की किर्पा है आखिरकार बे केदानात मंदिर पहुंचा जैसे ही उसने मंदिर के दर्शन किये
00:38उसकी आंखों में आंसू बहने लगे उसने कुछ नहीं मंगा वसी जुका कर कहा जो भी दिया बहीं काफी है
00:45महादेव तब ही उसके अंदर एक अज
00:59लावा आता है तो हर मुश्कल रास्ता भी असान बन जाता है
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