00:00गटिया लोगों की एक पहचान होती है कि उन्हें कितनी वी इज़ दो बदले में उन्होंने तुम्हें तकलीफ ही देनी
00:07है उधारन के लिए हम किसी को इज़ देते हैं लेकिन उसकी आदत है निंदा चुगली करने की वो हमारे
00:15सामने दूसरों की निंदा चुगली करेगा और
00:18अगर हम उनके सामने नहीं होगे तो वो हमारी निंदा चुगली दूसरों के सामने करेगा अब जहां पर जे फर्क
00:26नहीं कि दूसरे में कोई दोश है जा हम में कोई दोश है वो अपने मन के आदत से परेशान
00:33है वो उसमें बंदे हुए हैं उनके दिमाग का जो धांचा है �
00:38बो भी ऐसा ही है अब जो निंदा चुगली करता है जरूरी नहीं उसके शवद ही उसकी नजर भी गटिया
00:47होती है वो उपर उपर से कितना भी मीठा बनके हमारी तारीफ करे लेकिन बीतर उनके इर्शा भाव ही उतना
00:56ही जागरित होता है तो जहां एक ही समाधान है कि ऐसे लो
01:06हमें अपने जैसा बना लेंगे
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