00:09पर दो दिन के बाद वापस वही करते हैं
00:31उनके हाथ में नहीं है, बच्छों के हाथ में नहीं है, बच्छे वह भी उनके आदतों से मजबूर हैं, बाहर
00:47के इन्वार्मेंट, संगत, बहुत सारी चीज़े उन पर असर करती हैं,
00:54तो जितने वह भी चाहते हैं, लेकिन वह करने ही पाते हैं, जैसे हम भी कितनी सारी चीज़े चाहते हैं,
01:03लेकिन हम खुद भी नहीं कर पाते हैं,
01:07हम कितनी पुराईयों से दूर रहना चाहते हैं, अच्छा हैं करना चाहते हैं, लेकिन हम भी तो पुराईयों मेरे रहते
01:13हैं, कर देते हैं,
01:16हमारे हाथ में भी तो कहां कंट्रोल है
01:20तो बड़े सायने हैं
01:22हम पैरेंस भी होगे तो भी
01:24तो बच्छों पर हम किस तरह से
01:26कितनी उमिद रख सकते हैं
01:28तो हम हमारी फर्ज अदा करते जाओ
01:31उनको समझाते जाओ
01:32कहते जाओ
01:35जितना हो सके
01:37ना ठीक है
01:38बच्चे फॉलो करें
01:40तो ठीक है न फॉलो करें
01:43तो मन में
01:46भूरा लगाना
01:48या दुखी होने की जुरत नहीं है
01:51प्रेहिम से समझा समझा कर
01:53जितना हो सके तो ठीक है
01:54आप कहते जाओ लेकिन
01:56आगरव बगर कहते जाओ
02:01पच्छों को कहने हाद
02:02छापका बगर तो रहने ही सकोगे और विदएगी लेकिन आगर
02:18वैसा करना ही चाहिए ऐसा आगरमत रखो
02:24हमारे कहने से
02:27हमने जो कहा है वैसा बच्चा करे या न भी करे
02:32ऐसा पहले से ही अंदर बटन दबा के बात करना
02:38तो अगर आपकी बात बच्चा न माने और न करे
02:43तो भी आपको कुछ तकलीप नहीं होगी
02:46आपको एकसेप्ट होगा
02:49नहीं तो बहुत तकलीप हो जाएगी
02:52हंकार आपका विगड जाएगा
02:57बच्चे का भी विगड जाएगा
03:02और देखे आप जितना आगर के बगर कहोगी
03:05न उतने बच्चे ज्यादा एकसेप्ट करेगी
03:09कि एक और हमारा हंकार है
03:12क्या हम जैसा कहते हैं
03:16ऐसा बच्चों ने करना चाहिए
03:19हम उनसे ज़्यादा समझते है
03:22हमारी पर्ज है
03:24हमारी आशा है
03:26तमना हैं बच्चों की और
03:28वो सब उन्होंने पूरी करना ही चाहिए
03:30एक और हमारा इस तरह से अंकार है
03:34और दूसरी और
03:37बच्छों का भी तो हंकार है, जितने हंकार से आप बच्छों को कहेगी, नए माय जो कहती हूं इतना करना
03:46ही पड़ेगा, तो फिर उनका भी हंकार उपर चड़ता है, वो भी उनका हंकार क्या कहता है, कि आप कहती
03:57हूं ऐसा, तो मैं नहीं करूंगा, क्यों करो, मुझे भी को�
04:05कुछ करना जी इस तरह से अगेंस्ट होते जाते हैं भचे उनको ऐसा नहीं मेसफिस होता है कि हमारे माँ
04:19हमारे पिता हम को जो मुझ कहते हैं Matthmes और मताँ पिता हम ऐसा इसा ही सोचते कि हम जो
04:28भी कुछ कहते हैं जो
04:35के लिए तो कुछ करते हैं लेकिन यह बात बच्छों को नहीं एक्सप्ट होती है यहां फिर बहुत प्रॉब्लेम होता
04:46है बच्छों को एक्सप्ट नहीं होती है और इनको फिरे पैरेंट्स को बहुत लगता है कि हम इनके लिए ही
04:53करते हैं तो बहुत दुख ज्यादा होता है
04:56हम इतना करते हैं और बच्चों कुछ नहीं है हमारे लिए
05:02छीकि इसके आप लाग करो लेकिन इसके पिछे आपका हैंकार जो है वो उनको हट करता है
05:10प्रेम नहीं दिखता है
05:15जितना आप उनकी गलतिया निकालोगी उनको बार बार टो करोगी
05:21मागीं करोगी तो आपके परती उनको प्रेम नहीं रहेंगा
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