00:18लोग को तोड़ने के लिए दो रास्ते हैं
00:22एक तो आपको जब पर्चस नुक्सान हो जाए
00:29इतनी बड़ी नुक्सान हो जाए
00:31कि आप किसी भी तरह से उनुक्सान को भरपाई नहीं कर सकेगी
00:38बियांड लिमिट
00:41तो वह तोड़ जाती है रंथी लोग की
00:45फिर होता है कि अईसा कभी पैसे के लिए दंदे नहीं करना है
00:50जो भी सुकी रोटी चटनी मिली तो बहुत हो गया जादा कुछ नहीं जाए एसा करके वो लोग उसका तुटता
00:59है
00:59तो ये बहुत बड़ा नुक्सान वा तो तूट सकता है लोग
01:05और आप कोई अच्छे रास्ते सत्कारे में आपके पैसे दान में दे दे
01:12तो आपकी लोग की ग्रंथी तोड़ सकती है
01:17इसके अलावा कोई लोग की ग्रंथी को तोड़ने का रास्ता ही नहीं है
01:22तो नुक्सान करके इतना भुगत नेकाल अपने सर पे लेके हमारी लोग की ग्रंथी तोड़ना
01:30उससे कई गुना बैतर है कि हम दान में पैसे दे कर हमारी लोग की ग्रंथी तोड़े
01:38तो ये सिधा समझ में आता है तो काम बन जाता है
01:43और नियम ऐसा है कि
01:45जिसके हाद से जहाँ
01:46पैसे जाते है उसको दूसरे हाद से
01:49आते भी है
01:51अगर आपका
01:53घर में कम्रा
01:55है आपका
01:57तो उसको आप
02:00एक तरफ
02:01दो दरवाजे है
02:03अगल।
02:04तो इक दरवाजा
02:05खुला रखा और एक दरॵाजा बंद कर दिया
02:07तो क्या हवा आपके घर में आएगी?
02:11नहीं आएगी
02:12हाँ, अगर आपको नहीं फ्रेश हवा चाहिए
02:16तो दूसरा दरवाजा खोलना पड़ेगा
02:20तो पुरानी जाएगी और नहीं हवा आएगी
02:23जाने के लिए रास्ता पहला चाहिए
02:26फिराने के लिए रास्ता
02:30पैसे का भी ऐसा ही है
02:33पैसे जाते है तब आने की शुरूरत होती है
02:37और आते है तो समझना भी जाने की तयारी हो रही है
02:42तेसा नियम है उसका
02:45आये तो समझना आप जाने की तयारी है
02:48जाने लगे तो समझना वापस आने की तयारी हो रही है
02:52ये पैसो का ऐसी धांद है
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