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जो चीज़ प्रिय हो गई हो, उसी में मूर्छित रहना, उसका नाम लोभ है। वह चीज़ प्राप्त होने पर भी संतोष नहीं होता। इस लोभ और लालच से कैसे बचें? क्या धन खर्च होगा, तभी बढ़ेगा? पैसों का सिद्धांत क्या कहता है, आइए जानते हैं इस विडीयो में।

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Transcript
00:18लोग को तोड़ने के लिए दो रास्ते हैं
00:22एक तो आपको जब पर्चस नुक्सान हो जाए
00:29इतनी बड़ी नुक्सान हो जाए
00:31कि आप किसी भी तरह से उनुक्सान को भरपाई नहीं कर सकेगी
00:38बियांड लिमिट
00:41तो वह तोड़ जाती है रंथी लोग की
00:45फिर होता है कि अईसा कभी पैसे के लिए दंदे नहीं करना है
00:50जो भी सुकी रोटी चटनी मिली तो बहुत हो गया जादा कुछ नहीं जाए एसा करके वो लोग उसका तुटता
00:59है
00:59तो ये बहुत बड़ा नुक्सान वा तो तूट सकता है लोग
01:05और आप कोई अच्छे रास्ते सत्कारे में आपके पैसे दान में दे दे
01:12तो आपकी लोग की ग्रंथी तोड़ सकती है
01:17इसके अलावा कोई लोग की ग्रंथी को तोड़ने का रास्ता ही नहीं है
01:22तो नुक्सान करके इतना भुगत नेकाल अपने सर पे लेके हमारी लोग की ग्रंथी तोड़ना
01:30उससे कई गुना बैतर है कि हम दान में पैसे दे कर हमारी लोग की ग्रंथी तोड़े
01:38तो ये सिधा समझ में आता है तो काम बन जाता है
01:43और नियम ऐसा है कि
01:45जिसके हाद से जहाँ
01:46पैसे जाते है उसको दूसरे हाद से
01:49आते भी है
01:51अगर आपका
01:53घर में कम्रा
01:55है आपका
01:57तो उसको आप
02:00एक तरफ
02:01दो दरवाजे है
02:03अगल।
02:04तो इक दरवाजा
02:05खुला रखा और एक दरॵाजा बंद कर दिया
02:07तो क्या हवा आपके घर में आएगी?
02:11नहीं आएगी
02:12हाँ, अगर आपको नहीं फ्रेश हवा चाहिए
02:16तो दूसरा दरवाजा खोलना पड़ेगा
02:20तो पुरानी जाएगी और नहीं हवा आएगी
02:23जाने के लिए रास्ता पहला चाहिए
02:26फिराने के लिए रास्ता
02:30पैसे का भी ऐसा ही है
02:33पैसे जाते है तब आने की शुरूरत होती है
02:37और आते है तो समझना भी जाने की तयारी हो रही है
02:42तेसा नियम है उसका
02:45आये तो समझना आप जाने की तयारी है
02:48जाने लगे तो समझना वापस आने की तयारी हो रही है
02:52ये पैसो का ऐसी धांद है
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