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‘अहिंसा परमो धर्मः’ अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है। लेकिन आजकल के जीवन में जहाँ कम्पीटिशन हो, दूसरों को नीचा दिखाना, अपमानित करके आगे बढ़ना, वहाँ व्यावहारिक जीवन में ‘अहिंसा परमो धर्मः’ का पालन हमें कैसे करना चाहिए?

#NonViolence #DontHurtOthers #Humanity #DadaBhagwanFoundationHindi
Transcript
00:01अहिंसा पर्मो धर्म, अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है, हमें अहिंसा मेंटेंग रखनी चाहिए, लेकिन कभी-कभी जैसे आज के माहौल
00:11में कम्टिसन है, एक दूसरे को नीचा दिखाना, मानित करना और आगे बढ़ना, यही वो चीज है, तो एक नॉर्मल
00:22वहवारिक जीवन
00:22में उसका कुछ ऐसा है, नॉर्मल जीवन में तो ऐसा ही रखना चाहिए, अहिंसा याने कहां
00:29तक के अहिंसा के हमारे मान वच्चनकाया से इस संसार के कोई भी जीव को किंचित मां तबी दुख ना
00:40हो, ना हो, ना हो
00:47सुबह में उठते दिन में पांच बार बुलना है कि मेरे मन वह चनकयां से किसी कुर्चित मत्रत दूख ना
00:54होना
00:58होना हमारी भावना में 100% किसी को दुख मन
01:09अगर आप हमेशा करते रहे तो जब किसी को दुख होने का समय आया आपसे, तो यह भावना आपको ब्रेक
01:20कराए, ब्रेक मारेगी, दुख नहीं पहुंचाने देगी, और अधि हो भी गया तो आपको भी तर्म पश्चाताफ होगा, प्राहश्चित होगा,
01:29प्रतिकमन करोगे,
01:32तो फिर प्रजे से आप प्रतिकमन करोगे, प्राहश्चित प्रच्छाताप करोगे, तो कैसा भी क्यों प्रहिंसा हो, आप जब अधिकरमन करके,
01:48प्रश्चाताप करके, इन सारे की गलतियों से, हिंसा से, मुक्त हो सकते हो, लेकिन रदाई से होना चाहिए, दिल से
01:58होना चा
02:07झाल
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