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हर दुकानदार फायदे के लिए ही धंधा करता है। पर बात जब खाने-पीने के चीज़ों की आती है, तब ज़्यादा पैसा कमाने के चक्कर में या दूसरे व्यापारियों को देखकर थोड़ी बहुत मिलावट कर लेते हैं। तो सवाल यह होता है कि हम कैसा धंधा करें? मिलावटी या शुद्ध?

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Transcript
00:00लुट लुट लुट लुट
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00:46लुट लुट
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01:03तक नहीं यहां कुछ अच्छा है फ्योर है वो पता चलता है आजकल तो सब लोग हुशार हो गए
01:09क्या मिलावट रज़ती है तो पता चल जाता है और शहर में तो इसा ज्यादा नहीं चलते हैं बड़े लिके
01:15लोग समझ जाते हैं
01:17और आपकी इमानदारी का भी तो सामने वाले को परतिभाव मिलता है क्या आपकी प्योरिटी इमानदारी उसकी वैबरेशन्स आपके ग्रहाग
01:28को जाएंगे
01:30और वही आप है तो उसको किस तरसे उलू गुमाओ, किस तरस उसके पैसे निकालो, किस जेब में से, किस
01:38तरसे मेरा धंदा बढ़ा लो, उसके पैसे पैसे ले लो
01:41यह जो भाव आपके अंदर ग्रहाग देखकर शुरू हो जाते है, तो उसके वाइबरेशन्स भी उसको जाते है, और उसका
01:51परिणाम तो आपको आएगा ही आएगा, और कितना खाना है, दो रोटी, तीन रोटी, उसे ज़्यादा क्या खाओगे, क्या सारी
02:01दुकान की मिठाई
02:02तो आप नहीं खा सकोगे, तो फिर इतने लिए क्या इतना सारा मिलावट तो करना यह नहीं चाहिए, और खाने
02:13की चीज में तो कभी मिलावट नहीं करना चाहिए, वो बहुत बड़ी जिम्मेदारी होई, बहुत बड़ा पाप होता है, क्यूंकि
02:24दुसरे की हेल्थ के साथ �
02:27आप बहुत बड़ा गेम खिर रहे हो, उसकी हेल्थ पर आप बहुत असर कर पहुचा रहे हो, दूसरी चीज में
02:38तो ठीक है, चलो रेती में आप मिलावट करो, या और किसी में करो, वो भी अच्छा बात नहीं है,
02:44लेकिन यह तो डारेट इंसान की हेल्थ और उसकी आहिशे
02:49पर असर होती है, और ऐसा मिलावट वाला खाखा कर फिर वो एक प्रकार का स्लो पॉइजनिंग ही दे रहे
02:59हो आप, उसके जीवन के पांच-दस साल तो कम हो ही जाएगे ऐसा कच्रा खाते है, तो इसकी जिम्मेदारी
03:07आपके सर पर आती है, पैसे तो आप कमाएंगे और आप
03:18की रहेगी, आपकी पाप कर्म में घर में पूछना कौन हिससेदार होगा, इसमें कौन बटवारा करेगा, वालमी की रुच्ची की
03:30स्टोरी है ना, पहले वालियार नुटारू था, बहुत बड़ा, जिदर जाता था, डाका डालता था, पैसे ले आता था, कई
03:40लोगों को मा
03:41मार डालता है, हिरनों को मार डालता है, बच्चे को सो, उनको मनारद मुनी मिल गए रहा से एक बार,
03:48तो नारद मुनी का तो यह सब पाप करके पैसा पेदा करता है, तो किसके लिए करता हूँ, कैं मैं
03:54अपनी बीबी बच्चों के लिए करता हूँ, इसमें क्या पाप है, हर
04:15तो वह जाकर पूसता है अपने पत्न धनी बच्चों को कोई
04:20तयार नहीं होता है वहाँ उसके आखे खुल जाती है और वह आको मैं
04:26से वालिया रपना की रिशी हो गया समझ मुझ में आहाए
04:34तो आप भी घर जाकर वाल्या की तरह पूछो, पता चलेगा आप भी वाल्मी की रूशी की तरह से महान
04:42सुखडिया रूशी हो जाओगे.
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