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मानव धर्म, आत्म धर्म और सांप्रदायिक धर्म में क्या अंतर है? क्या मंदिर में जाकर पूजा-पाठ करना मानव धर्म कहलाएगा? सबसे ऊँचा मानव धर्म क्या है? और आज के इस प्रैक्टिकल लाइफ में कैसे मानव धर्म निभाना चाहिए? इन सभी प्रश्नों के जवाब समझें पूज्यश्री दीपकभाई से।

What is the difference between humanity, Atma dharma (religion of the Soul), and communal religion? How do humanity and spirituality differ? Going to the temple and worshipping & chanting will be called a human religion? What is the highest form of humanity? And how can one start implementing humanity in today's life? Let's find the answers to all these questions from Pujayshree Deepakbhai.

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Transcript
00:01मानवधर्म, आत्मादर्म और संप्रजाधर्म में क्या फ़राग है?
00:06मानवधर्म समझना है, जिसको मानवधर कहते हैं से इतना बदल गया इंसान, बोलते हैं
00:13मानवधर्mi कोई अपमान करें तो मुझे पसंद नहीं है मैं किसी का अपमान नहीं करना चाहिए
00:20जैसे मेरे पर कुरोध किया तो मुझे पसंद नहीं है
00:23तो मैं किसी नौकर पे या वाइप पे या अस्बंड पे गया
00:27किसी पर कुरोध करने के पहले मुझे जागरती आ जाती है
00:31मुझे दुख होता है, तो मैं भी किसी से कुरोच से नहीं करना चाहिए, उसको दुख हो जाएगा, इतनी जागरती
00:37आई उसको मानवता का लेवल कहा जाता है, ऐसी हर बात में, जैसे मेरी वाइप के ओपर कोई दृष्टी बिगाड़े,
00:44मुझे पसन नहीं, मैं किसी की वाइ
00:58चुकते करना चेल, वापस दे देना चाहिए, तो ऐसे हर परिस्थिती में, इतनी जागरती आई कि मेरे साथ ये वेवार
01:07होता, तो मैं, पुझे दुख नहोजे, इससे मैं पसंद करता हूँ, वह साही वेवार मैं सब के साथ करते रहूँ,
01:15वह मानवता, और उतनी मानवता क
01:17सेवेंटी, एटी परसंट आगया, तो उतना लेवल डेवलपमेंट होना चेह है, मनिशय का, हिंदुस्तान का मनिशय, सच मुझे तो 95
01:27परसंट तक जाना चेह है, मानवता, हर भावत ने, अज मैं बैठा हूँ आगया, तो मेरे पिछे वेवाले तकलिफ होती
01:35है, तो मैं ऐस
01:47पोचे ऐसी जागरती में रहो, हर बात में, वो सबसे उंचा मानो धर्मा है, वाकि मंदीर में जाना, पूजा पाट
01:55करना, वो हेल्पिंग है, डेवलपमेंट आने के लिए, प्रेक्टिकल लाइप में, में मेहमान आये, तो मैं मेरे मन में उनके
02:05लिए भाव बिगडे, तो म
02:17जह पसे, तो मैं भी सब के साथ यस्साहिव यवार करूँ, वो मानो थाा, और संपरदाइक धर्मा, तो संपरदाइक याने
02:26क्या है, जैसे नहीं कॉलेज में आने के लिए, फर्स टैंडर, सेकंडर, थर्ड़ स्टैंडर, फोर्ड़ सेवं डिदर का बच्चा है,
02:35उसको एट
02:47यह ग्या dåई गिखी यॉगिया है तो डेवल्पमेंट के लिए युगिया
02:51और शंपर्दाई क oluşगता बॉला जाता हम कई संपर्दाई है उसको बाउंटरी में रहुना पड़ता है
02:57गुरू के आधीन रह पड़ता है वही क्लास में रोच बेठने का
03:01वह उट पर के साथ बेटने का, पास होगे उपर के स्टांडेर मे जाएगा
03:07और, आत्मधर्मा अउट एफ संपरधाय है
03:11아�त्मधर्मा है
03:12सब संपरधाय होते होते उपर के लेवल में जाते हैं आदमी
03:16उपर का लेवल में
03:18aur संपरधाय ने क्या, there are 360 degrees
03:30तो अलग अलग डिग्री वाला अलग अलग संप्रदाय बोला जाता है और अत्मधर्म अने सेंटर में अगाया उसको अत्मधर्म बोला
03:38जाता है जो कृष्णा बग्वाने अर्जुन को दिया था
03:41चौझ था सर्व माशिय तो स्वधर्म में आजा स्वधर्म यानि आत्मधर्म में देह धर्मा छोड़ लोग क्या ह अर्थैंक वईष्णनो
03:53दन्म, हमारा धर्म है तुसरा सपर धर्म बग्वान पक्ष्पाति नहीं थे
03:59भगवान निस्पक्षपाती थी, उन्होंने अर्जुन को ये ग्यान दिया
04:01मन का धर्म, वानी का धर्म, दे का धर्म, इंद्रियों का धर्म
04:07सब छोड़ दे, और तू आत्मधर्म में आ
04:11आत्मा का धर्म और स्वधर्म
04:13स्वाधर्म से मोक्षणी। स्वाधर्म याने आत्मदर्म।। और डिग्री वाला है वह संप्रदध करण अधर्मेट। होजा हो एकी।zarिणों, हुजो देख्टाइध करने।
04:33अधर्मी कह वाती है।र्मध्म।ध॥ एक अधर्म की शुरुवात होती है।
04:42वो आत्म धर्मा का end result भी तराकता के वल ज्ञान, मुक्स, उसका परिटाम.
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