00:01मानवधर्म, आत्मादर्म और संप्रजाधर्म में क्या फ़राग है?
00:06मानवधर्म समझना है, जिसको मानवधर कहते हैं से इतना बदल गया इंसान, बोलते हैं
00:13मानवधर्mi कोई अपमान करें तो मुझे पसंद नहीं है मैं किसी का अपमान नहीं करना चाहिए
00:20जैसे मेरे पर कुरोध किया तो मुझे पसंद नहीं है
00:23तो मैं किसी नौकर पे या वाइप पे या अस्बंड पे गया
00:27किसी पर कुरोध करने के पहले मुझे जागरती आ जाती है
00:31मुझे दुख होता है, तो मैं भी किसी से कुरोच से नहीं करना चाहिए, उसको दुख हो जाएगा, इतनी जागरती
00:37आई उसको मानवता का लेवल कहा जाता है, ऐसी हर बात में, जैसे मेरी वाइप के ओपर कोई दृष्टी बिगाड़े,
00:44मुझे पसन नहीं, मैं किसी की वाइ
00:58चुकते करना चेल, वापस दे देना चाहिए, तो ऐसे हर परिस्थिती में, इतनी जागरती आई कि मेरे साथ ये वेवार
01:07होता, तो मैं, पुझे दुख नहोजे, इससे मैं पसंद करता हूँ, वह साही वेवार मैं सब के साथ करते रहूँ,
01:15वह मानवता, और उतनी मानवता क
01:17सेवेंटी, एटी परसंट आगया, तो उतना लेवल डेवलपमेंट होना चेह है, मनिशय का, हिंदुस्तान का मनिशय, सच मुझे तो 95
01:27परसंट तक जाना चेह है, मानवता, हर भावत ने, अज मैं बैठा हूँ आगया, तो मेरे पिछे वेवाले तकलिफ होती
01:35है, तो मैं ऐस
01:47पोचे ऐसी जागरती में रहो, हर बात में, वो सबसे उंचा मानो धर्मा है, वाकि मंदीर में जाना, पूजा पाट
01:55करना, वो हेल्पिंग है, डेवलपमेंट आने के लिए, प्रेक्टिकल लाइप में, में मेहमान आये, तो मैं मेरे मन में उनके
02:05लिए भाव बिगडे, तो म
02:17जह पसे, तो मैं भी सब के साथ यस्साहिव यवार करूँ, वो मानो थाा, और संपरदाइक धर्मा, तो संपरदाइक याने
02:26क्या है, जैसे नहीं कॉलेज में आने के लिए, फर्स टैंडर, सेकंडर, थर्ड़ स्टैंडर, फोर्ड़ सेवं डिदर का बच्चा है,
02:35उसको एट
02:47यह ग्या dåई गिखी यॉगिया है तो डेवल्पमेंट के लिए युगिया
02:51और शंपर्दाई क oluşगता बॉला जाता हम कई संपर्दाई है उसको बाउंटरी में रहुना पड़ता है
02:57गुरू के आधीन रह पड़ता है वही क्लास में रोच बेठने का
03:01वह उट पर के साथ बेटने का, पास होगे उपर के स्टांडेर मे जाएगा
03:07और, आत्मधर्मा अउट एफ संपरधाय है
03:11아�त्मधर्मा है
03:12सब संपरधाय होते होते उपर के लेवल में जाते हैं आदमी
03:16उपर का लेवल में
03:18aur संपरधाय ने क्या, there are 360 degrees
03:30तो अलग अलग डिग्री वाला अलग अलग संप्रदाय बोला जाता है और अत्मधर्म अने सेंटर में अगाया उसको अत्मधर्म बोला
03:38जाता है जो कृष्णा बग्वाने अर्जुन को दिया था
03:41चौझ था सर्व माशिय तो स्वधर्म में आजा स्वधर्म यानि आत्मधर्म में देह धर्मा छोड़ लोग क्या ह अर्थैंक वईष्णनो
03:53दन्म, हमारा धर्म है तुसरा सपर धर्म बग्वान पक्ष्पाति नहीं थे
03:59भगवान निस्पक्षपाती थी, उन्होंने अर्जुन को ये ग्यान दिया
04:01मन का धर्म, वानी का धर्म, दे का धर्म, इंद्रियों का धर्म
04:07सब छोड़ दे, और तू आत्मधर्म में आ
04:11आत्मा का धर्म और स्वधर्म
04:13स्वाधर्म से मोक्षणी। स्वाधर्म याने आत्मदर्म।। और डिग्री वाला है वह संप्रदध करण अधर्मेट। होजा हो एकी।zarिणों, हुजो देख्टाइध करने।
04:33अधर्मी कह वाती है।र्मध्म।ध॥ एक अधर्म की शुरुवात होती है।
04:42वो आत्म धर्मा का end result भी तराकता के वल ज्ञान, मुक्स, उसका परिटाम.
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