00:00इस्राइल सबको पीटता रहा था, 1973 ने पहली बार वो था कि मामला थोड़ा बराबरी का बैठा था
00:04तो फिर जब इस्राइल की भी पिटाई होगी 1973 में तो बोले चा चलो संधी कर लेते हैं
00:08जा करके इजिप्ट से संधी कर लिए सिनाई उनको थोड़ा लोटा दिया
00:12उधर जाकि उनको गोलोन हाइट लोटा दिया उससे लेकिन क्या हिंसा रुख गई है
00:15कि दुनिया की हर तरह की हिंसा उठती इनसान के मन से यह
00:20अगर जानना चाहते हो कि ये लडाई क्यों हो रही है, सब लडाईयां क्यों होते ही है, ये हजारों मौतें
00:27क्यों हो रही है
00:27तो सबसे पहले तो ये सोचना छोड़ना पड़ेगा कि संगठन, और्गनाईजेशन, देश या समुदाय आपस में भिड़े हुए है
00:37ये लड़ाई इनसान और इनसान की है
00:39ये लड़ाई धर्म और धर्म की नहीं है
00:41ये लड़ाई देश और देश की नहीं है
00:43ये लड़ाई इनसान और इनसान की है
00:46इनसान में कुछ ऐसा है
00:48जो उसे मजबूर करता है
00:50दूसरे इनसान से हमेशा भिड़े रहने के लिए
00:53और जब तक आप इस संघर्ष को और दुनिया के हर संघर्ष को
00:58इनसान और इनसान के बीच की रड़ाई की तरह नहीं देखोगे
01:01तब तक संघर्ष रुखने वाले नहीं है
01:04जब तक हम इनसान का मन नहीं बदलेंगे ना
01:07तब तक इस तरह के बड़े संगर्शम को देखने को मिलते रहेंगे
01:12इनसान ही वो तत्य है जिससे युद्ध उठता है जिससे हिंसा उठती है
01:16और इनसान के ही भीतर उस युद्ध और हिंसा को शांत भी किया जा सकता है
01:20और कहीं नहीं
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