00:00यह होली का संबन शराब से कैसे लग गया यहां तो जो सबसे बड़ा दुराचारी है उसकी मौत की बात
00:08है उन मुर्गे ने क्या भी आड़ा है तुम्हारा कि मुर्गा हिरन कश्यप है उसको काई मारा है कि आम
00:15तोर पर जितने जानवर नहीं कटते प्रति दिन उसे कई गुने
00:20कट रहे हैं त्योहार के दिन यह कौन सा त्योहार है चाहे होली हो चाहे बकरीद हो चाहे क्रिस्मस हो
00:27मैं पूछना चाह रहा हूं यह त्योहार कौन से हैं जो निर्दोष जानवरों का खून बहाए बिना मनाय नहीं जा
00:35सकते और होली इत्यादी पर तो कभी परमपरा भी न
00:50अपने बचपन में मैंने इस तरह की बाते नहीं सुनी थी, तो त्योहारों का दिन तो चेतना के विशेश अनुशासन
00:59के साथ मनाना होगा न, या उस दिन और ज्यादा लफंगाई करनी है, किसी भी दिन नहीं होना चाहिए, चेतना
01:09मैं इतनी सफाई हो कि हत्या का ये कारेकरम
01:12किसी भी दिन नहीं हो, लेकिन तुमने एक धार्मिक दिन को भी खूल बहाने का दिन बना लिया, इससे बुरा
01:20क्या हो सकता है?
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