00:00लोगों को भावियों से बहुत प्यार हो जाता है होली के दिन
00:02आधे शहर की औरतें उस दिन भावी हो जाती है
00:05इस पर्व का चिकन और शराब से क्या संबंध है मुझे समझाओ
00:10ये हुलण कहां से आ गया कीचर फेकना और बकलोली करना और भावी को रंगना
00:16जो कुछ होली के नाम पर होता है उसमें प्रहलाद तो कहीं नहीं है
00:21उसमें होलिका ही होलिका है
00:24हिरण कश्यप सिर्फ राजा ही नहीं था प्रहलाद का बाप भी था
00:28और छोटू ने कहा कि तुम चाहे राजा हो चाहे बाप हो मेरे तुम्हारा साथ तो नहीं दूँगा
00:35पूरा राज्य मान रहा है राजा साहब की बात
00:38छोटे ने मानने से मना कर दिया बोला मैं तो नहीं मानता
00:41ये पूरी कहानी जा रही है कि समाज कुछ कहता हो
00:47ठक्रत ही कुछ कहती हो, परिस्थित ही कुछ कहती हो, सता कुछ कहती हो,
00:52मुझे करना वही है, जो सही है, ये है हुली,
00:56ज्यादा तर लोग हुली ऐसे मनाते हैं, जैसे होलिका को समानित कर रहे हूं,
Comments