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Transcript
00:00राजा का क्या नाम था मैं भूल गया
00:04क्या नाम था
00:06मैं हिरन्य कश्यप नहीं नाम था
00:09ये सब लोगधर्म यहीं से शुरू हो जाता है
00:13नाम ही खराब कर देता है
00:14हिरन्य कशिपू
00:17हिरन्य माने होता है सोना या धन
00:21माने सोने जैसे चकाचाउत
00:23हिरन्य
00:24और कशिपु माने होता है बिस्तर शैया जो अपने आपको सुख की स्वर्ण की शैया देना चाहता हो वो हो
00:37गया हिरन्य कशिपु
00:38कौन हर समय यही मांग रहा होता है सुख सुविधा सोना किसको चाहिए अहंकार हिरन्य कशिपु अहंकार का प्रतीक है
00:48अहंकार खूब यत्न कर सकता हिरने कशिपु ने अद्भुत तपस्या करी
00:56दिन में भी सुरक्षित रहूँगा रात में भी सुरक्षित रहूँगा
01:00ना मैं महल भवन या घर के भीतर असुरक्षित रहूँगा ना बाहर
01:06ना स्तर से मरूँगा ना शस्तर से मरूँगा
01:18और क्यों नहीं मरना है क्योंकि डरा हुआ है इतना डरा हुआ है कि जानता है कि मरण धर्म題 खुद
01:28को बचाऊंगा और
01:29अपने ही लिए वर्दान मागऊंगा अहंकार ही अपने आपको क्या घोशित
01:35कर देता है मैं भगवानू मेरी पूजाओगे हिरंड्य कशिपू अहंकार का प्रतीक है
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