00:00मेरा question सम्ता के regarding है पर at the same time society में हमें hierarchy देखने को मिलती है in
00:06terms of genderism
00:08तो women's जो है उनको हमेशा suppress किया जाता है उनको permissions लेनी पड़ती है
00:13या फिर task-based genderism देखने को मिलता है
00:17कोई फर्क नहीं पड़ता कि दुनिया में इतना सारा अंधेरा क्यों है
00:22मेरे ज्यादा ज़रूरी है कि मैं जहां पर हूँ वहाँ एक दीपक जलना चाहिए
00:26क्यों है दुनिया में क्या है
00:30एक बार शिवर था हमाले में तो बिलकुल सांज ठल रही थी
00:34सामने ऐसे पहाड़ी थी यही अंधेरे रोशनी पर किसी से बात हो रही थी
00:38तो सांज ठल रही थी वहाँ किसी घर में एक छोटा सा बलब जल रहा होगा
00:4312-14 साल पहले की बात उतना ज्यादा कोई बसी हुई पहाड़ी नहीं थी वो बिलकुल खाली जैसी ही थी
00:49वो एक इतना सा टिम्टिमाता हुआ सा कुछ दिखाई दे रहा था
00:52तो मैंने पूछा यह बताओ भाई अंधेरा ज्यादा है कि रोशनी अब नेका अंधेरा ही बहुत ज्यादा है
00:58मैं सहमात हूं अंधेर ही जाता है
01:00मैं अभी दिखाई क्या दे रहा है
01:01नजर कहा जा कर टिक जा रही है
01:02बोले वो जो जो जरा सी बत्ती टिम्टिमा रही है
01:05नजर उस पर जा कर टिक जा रही है
01:07ये वो जो जरा सी बत्ती होती है
01:09यह उसकी बड़ी से बड़ी जीत है, जरासी बत्ती बहुत बड़ी जीत, अंधेरा होगा बहुत बड़ा, पर चेतना, चेतना की
01:19निगाह जब भी देखेगी, उस उस दिये पर जाकर टिक जाएगी, भले ही उस दिये का आकार बहुत छोटा हो,
01:26तो इमद पूछा करिए कि द�
01:38जीयो प्लिटिकल कन्फ्लेक्ट्स ये सब कहां से हम सब जानते में बिल्कुल मूल में जाओं गए कहां से आगये, कहां
01:45से आगये, अंकार शे आगये, और कहां में फ् возмож बहुत
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