Skip to playerSkip to main content
🧔🏻‍♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें:
https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita-course?cmId=m00021

📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं?
फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021
➖➖➖➖➖➖
पूरा वीडियो : एक छोटी सी चेतावनी उनको, जो उलझे हैं छोटी बातों में || आचार्य प्रशांत (2019)
➖➖➖➖➖➖
#acharyaprashant, #आचार्यप्रशांत, #valueoftime, #lifelessons, #mindfulness, #spiritualwisdom, #liveinthemoment

Category

📚
Learning
Transcript
00:00बस कुछी दिन पहले, अभी स्कूल में थे, कॉलेज में थे
00:05और अभी बच्चे थे आप, यहीं दोड़भाग रहे थे, मैदान पर, गलियों में
00:12अभी अभी, है न?
00:15और अचानक आप पाते हैं कि आप 30 के हैं, 40 के हैं, 50 के हैं, 60 के हैं
00:21यह जो समय बीता है, यह कैसे बीता है? यह ऐसे बीता है, चुटकी बजाते
00:29तो जो शेश है समय, वो भी कैसे बीतेगा?
00:33देखिए अभी पैदा हुए थे आप, बहुत पीछे की बात नहीं है वो
00:37और अगर पैदा होने का क्षण बहुत पीछे की बात नहीं है
00:41तो चिता पर लेटने का क्षण भी बहुत आगे की बात नहीं है
00:45देखिए अभी आप पैदा हुए थे
00:47देखिए अभी अर्थी उठ रही है
00:49देखिए अभी चिता को अगनी दी जा रही है
00:52बहुत आगे की बात है
00:54सीमित है न समय
00:55एकदम सीमित है
00:57तो क्या करना है
00:59कल बस कल
01:01तुम नहीं रहोगे
01:03क्या करना है इस एक पल का
01:07इस जरा से समय का जो उपलब्द जीने के लिए
01:10मजबूरी में गुजार देना है
01:12शिकायतों में गुजार देना है
01:14मू लटकाई लटकाई गुजार देना है
01:15उलज-उलज के
01:17चिड़-चिड़ के
01:19चोट, खरोचें और घाव खाखा के
01:22गुजार देना है
01:22या कुछ और देश हो सकता है
01:26समय का, जीवन का
Comments

Recommended