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Stock Market Crash : Iran-Israel War की वजह से 12 दिन में डूब गए अरबों रुपए, क्या होगा आगे ?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध के खतरे का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले 12 दिनों में बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है, जिससे निवेशकों की करीब 34 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख इंडेक्स में लगातार गिरावट दर्ज की गई है और कई बड़े सेक्टरों के शेयर दबाव में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट की बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक अनिश्चितता है। मिडिल ईस्ट दुनिया का बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है और वहां बढ़ता संघर्ष तेल सप्लाई को प्रभावित कर सकता है। इसका असर महंगाई, उद्योगों की लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। फिलहाल निवेशक काफी सतर्क नजर आ रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। अगर क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हुआ तो बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

The effect of increasing tensions and the threat of war in the Middle East is now clearly visible on the Indian stock market as well. In the last 12 days, the market has seen a huge decline, due to which the assets of investors have sunk around Rs 34 lakh crore. Both the major indices Sensex and Nifty have registered a continuous fall and shares of many major sectors are under pressure. Experts say that the main reason for this decline is the rise in crude oil prices and global uncertainty. The Middle East is one of the world's major oil producers, and an escalating conflict there could affect oil supplies. It can also affect inflation, cost of industries and global economy. Currently, investors seem to be quite cautious and are moving towards safe investment options. If the regional tension is not reduced, then more fluctuations can be seen in the market.

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~PR.338~HT.408~GR.538~

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00:00मिडिलीज की बरते तनाव और युद्ध के खत्रे का असर अब दुनिया की अर्थविवस्ता के साथ साथ भारती शेयर बाजार
00:06पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
00:08पिछले कुछ दिनों में बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है और निवेशकों की बड़ी रकम दूप चुकी है।
00:38भी इस सौधी में करीब 7.50 फीजदी या फिर कहें 1930 पॉइंट गिर चुका है।
00:44बाजार में इस गिरावट के पीछे की काप मुख्य कारण मेडिली लीश्ट में हुई टेंसन को माना जा रहा है।
01:03जब भी मिडिली इस में तनाव बढ़ता है तो तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ जाती है।
01:09क्योंकि यह अक्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक छेत्रों में से एक है।
01:13तेल की कीमतों में तेजी आनिक से निवेशकों की चिंता और बढ़ जाती है।
01:17क्योंकि इसका सीधा असर आर्थ बेवस्था पर पढ़ता है।
01:24क्योंकि भारत अपने जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्छे तेल के रूप में पूरा करता है।
01:29अगर तेल महगा होगा तो इसका असर पैट्रोल, डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और रोजमर्रा की चीज़ों पर बढ़ सकता
01:35है।
01:36यानि महगे तेल का मतलब है महगाई बढ़ने का खत्रा।
01:39यही वज़ा है कि जब तेल की कीमतों में तेजी आती है तो शेयर बाजार में अकसर दबाव देखने को
01:45मिलता है।
01:45इस दोरान कई बड़े सिक्टरों के सेयर लाल लिसान के कारोबार करते दिखाए दिते हैं।
02:15निवेशक अकसर सोना डॉला या दूसरे सुलक्षित निवेशक बिकलफों की ओर रुख करते हैं।
02:20जानकारों के कहना है कि फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक मिडल इस्ट की इस सिदी पर निर्भर करेगी।
02:26अगर वहाँ तनाव कम होता है तो बाजार में रहात देखने को मिल सकती है।
02:30लेकिन अगर संगर्ष और बढ़ता है तो इसका असर तेर की कीमतों और बैस्विक बाजार पर गहरा सकता है।
02:40यानि साफ है कि मिडल इस्ट में जारी तनाव अब सिर्फ एक छेत्री संगर्ष नहीं रह गया।
02:44इसका असर अब बैस्विक अर्थब्योस्था ऊर्जा बाजार और निवेसको की संपत्ती तक पहुँच चुका है।
02:49और यही वज़ा है कि फिलाल बाजार में सतकता और अनिशित्ता का महौल है।
02:53फिलाल के बसतना ही बाक्ते अपडेट भी बने रही है वन इंडिया हैंदी के साथ।
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