00:00सर तब मैं इसके वारें बात करता हूँ पेरेंट से
00:02साधी नहीं करने है बच्छे नहीं करने है
00:04बोलते हैं कि तुम अकेले रह जाओग लाइफ में
00:06उनसे कहिएगा कि एक और अकेला है मुझे उसी के जैसे अकेले रहना है
00:16तो यह बोलते हैं कि लाइफ में क्यों ही इतना पढ़ना है और क्यों इतना आगे बढ़ना है कि यह
00:20सब कुछ करना है नहीं है
00:21उसे कहेंगा एक ठाज जिसने बहुत पढ़ा बहुत आगे बढ़ा मुझे उसी के जैसा रहना है
00:25और तुम्हें क्या लगता ये सब जो जोड़े बाजी कर रहे हैं ये अकेले नहीं हैं ये जोड़ों में होके
00:30भी नितानत अकेले हैं ये भीड में समुदाय में परिवार में पार्टी में दावत में भी अकेले हैं और मैं
00:35यहां मंच पर अकेला खड़ा हूँ तोई थमस्या �
00:38पड़े हो सकते हैं जिन्दगी के मंच पर ऐसे अकेले की नहीं, बोलो, आपकी अपनी जिन्दगी आपका अपना मंच है,
00:43मैं बस थोड़ा सा ये बता रहा हूँ, कि डर मत जाना, अकेले पन की भी अपनी एक गर्मा होती
00:49है, शान होती है, अकेले पन का अर्थ दुख नहीं हो
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