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पूरा वीडियो 16th Feb, 2026 को हुए बोध प्रत्यूषा लाइव सत्र से लिया गया है।
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Transcript
00:00रमजान भी शुरू हो रहे हैं, तो उसमें ये भी रहता है कि 30 दिन तक शैतान बिलकुल बंद रहेगा,
00:06तो वो लड़क pewn दर्फ गलत नज़रों से नहीं देखेंगे, मतलब पूरे साल देखेंगे, 30 दिन नहीं देखेंगे, वो क्यों
00:13नहीं देखेंगे कियोंकि उनको जन्न
00:39तुम जो बहुत गंडा लगता है।
00:58इंसान और इंसान हमेशा से बहुत गंडी चीज रहा है।
01:01धर्म की विवस्था भी जिन समाजों में उठी थी।
01:05भूलियेगा नहीं कि वो समाज भी बहुत पिछड़े हुए थे।
01:09कोई इस्त्रियों के लिए बहुत ही पाशविक था समाज।
01:13और कोई इस्त्रियों को थोड़ा भहुत अधिकार देने की दया दिखा देता था लेकिन
01:20इस्त्रियों को पुरुशों के ही समान इंसान तो किसी ने भी नहीं माना।
01:25जो धर्म में revelations होते हैं, उनमें कहीं ये नहीं लिखा होगा कि हूरे वगेरा।
01:31और धर्म के नाम पर बाकी जितनी बाते होते हैं उनका धर्म से कोई तालुक नहीं होता।
01:36वो समाजिक प्रपंच होते हैं।
01:39उस समय का जैसा समाज था उसने अपनी मानसिकता धार्मिक किताबों में भी दिखा दी।
01:44और समाज में पारंपरिक रूप से महिलाओं के लिए कोई बहुत उंचा दर्जा रहा नहीं है।
01:52कारण बहुत सीधे थे।
01:54जो भी चीजे मनुष्य के काम आती थी, उनके उत्पाधन में इस्त्री बहुत योगदान देई नहीं सकती थी।
02:04इस्त्री बस एक ही चीज का उत्पाधन कर सकती थी बच्चे।
02:07बाकी वो खेती में बहुत योगदान नहीं दे सकती थी।
02:10बैल गाड़ी चलानी है, लंबी-लंबी दूरियों तक जाकर उट पर बैठकर व्यापार करना है, ये सब कामस्तरी करी नहीं
02:18सकती थी, तो वो economically productive नहीं थी, इसलिए समाज के लिए उतनी beneficial नहीं थी, बस इसी कारण से,
02:27इसी स्वार्थ से समाज ने उसे बहुत हिज़त भी नही
02:31है, तो क्या करें, दुनिया भर में जितनी भी ये सब धार्मिक किताबें इनको फेक दें, नहीं, इतना विवेक होना
02:38चाहिए, कि उसमें से क्या है जो कालातीत है और इसलिए आज भी उपयोगी है, और क्या है जो बस
02:47उस समय के समाज की मानसिकता का दियोतक है, इसलिए आ�
02:56झाल
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