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  • 4 hours ago
ओडिशा के मलकानगिरी का सतीगुडा MMD गर्ल्स हायर प्राइमरी स्कूल, इस सेंटर पर लक्ष्मी अपने माता पिता के साथ हाई स्कूल की परीक्षा देने के लिए मोटरसाइकिल से आईं हैं. उनकी मां लक्ष्मी को मोसाइकिल से उतार कर व्हील चेपर पर बैठातीं हैं. एडमिट कार्ड के साथ स्कूल का स्टाफ उन्हें एग्जाम सेंटर के अंदर ले जाता है. व्हील चेयर बैठीं लक्ष्मी धीर-धीरे अपने एग्जाम रुम की तरफ बढ़ रही हैं. मन में पेपर को लेकर उधेड़बून के बीच फंसी लक्ष्मी जब हमारी तरफ देखती है. तो एक धीमी मुस्कान देते हुए आगे बढ़ जाती है.वो अलग कमरे में चटाई पर बैठे कर परीक्षा दे रहीं हैं. उन्हें फर्स्ट लैग्वेज ओडिया भाषा का ए सेट मिला है. एक पैर में पेन फंसाए हुए, दूसरे पैर से प्रश्नपत्र को पलटती हैं और MCQ के सवालों को गंभीरता से पढ़ती है. फिर पैर से लिखना शुरू करती हैं. सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक एग्जाम रुम में ढाई घंटे कैसे बीत गएउन्हें पता ही नहीं चला.एग्जाम देने के बाद जब वो सेंटर से बाहर निकली हैं. तो उनके चेहरे पर पेपर के अच्छा होने की संतुष्टि साफ झलक रही थी. 15 साल की लक्ष्मी के कई अंग खराब हैं. हाथ भी काम नहीं करते हैं. सदर ब्लॉक के सिंधीमल के धेपगुड़ा गांव में रहने वाली लक्ष्मी के पिता पांचवी तक पड़े है और दिहाड़ी पर राजमिस्त्री का काम करते हैं..मां अनपढ़ है. इनके तीन छोटे भाई बहन हैं. गरीबी और तमाम मुश्किलों के बावजूद इस परिवार ने अपनी बेटी की पढ़ाई पर बंदिशें नहीं लगाई. खडे नहीं हो पाने के बावजूद लक्ष्मी मजबूत इच्छा शक्ति और बुलंद हौसले के साथ जीवन में आगे बढ़ रही है. मुश्किल हालातों के बावजूद हार नहीं मानने की ठान चुकी हैं.ये उनके लिए सिर्फ एक एग्जाम नहीं.उनके सपनों और सेल्फ रिस्पेक्ट की लड़ाई है.

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00:02उडिशा के मलकान गिरी के सतीगुडा MMD Girls Higher Primary School
00:06इस सेंटर पर लक्षमी अपने माता पिता के साथ हाई स्कूल की परिख्षा देने के लिए मोटर साइकल से आई
00:14है
00:14उनकी मा लक्षमी को मोटर साइकल से उतार कर वीलचेयर पर बैचाती है
00:19एड्मिट काट के साथ स्कूल का स्टाफ उन्हें एक्जाम सेंटर के अंदर ले जाता है
00:25वीलचेयर पर बैची लक्षमी धीरे धीरे अपने एक्जाम रूम की तरफ बढ़ रही है
00:30मन में पेपर को लेकर उद्धेड बुन के बीच फंसी लक्षमी जब हमारी तरफ देखती है तो एक धीमी मुस्कान
00:38देते हुए आगे बढ़ जाती है
00:45वो अलग कमरे में चटाई पर बैट कर परिक्षा दे रही है
00:48उन्हें फर्स्ट लैंग्वेज ओरिशा भासा का एसेट मिला है एक पैर में पैन फंसाय हुए और दूसरे पैर से प्रश्न
00:57पत्र को पलटती है
00:58और MCQ के सवालों को गंभीरता से पढ़ती है फिर पैर से लिखना शुरू करती है
01:04सुभा साधे दस बजे से दोपहर साधे बारा बजे तक एक्जाम रूम में धाई घंटे कैसे बीट गए उन्हें पता
01:12ही नहीं चला
01:12एक्जाम देने के बाद जब वो सेंटर से बाहर निकली है तो उनके चेहरे पर पेपर के अच्छा होने की
01:19संतुष्टी साफ ज़लक रही थी
01:24पहले दिन एक्जाम अच्छा गया मुझे उम्मीद है कि मुझे सौ मैसे सत्तर मार्क्स मिलेंगे मैं आगे भी अच्छे से
01:30पढ़ाई करूंगी और टीचर बनूंगी
01:3315 साल की लक्षमी के कई अंग खराब है हाथ भी काम नहीं करते हैं सदर ब्लॉक के सिंधी मलके
01:41धेब गुडा गाउं में रहने वाली लक्षमी के पिता पांचवी तक पढ़े हैं और दिहाडी पर राजमिस्त्री का काम करते
01:48हैं मा अनपढ़ है इनके तीन छोटे भाई बहन
01:51हैं गरीबी और तमाम मुश्किलों के बावजूद इस परिवार ने अपनी बेटी की पढ़ाई पर बंदिश नहीं लगाई
02:10लक्षमी सिंधी मल स्कूल की चात्रा है उनकी टीचर ने उन्हें मजबूत इरादो वाली लड़की बताया तो सेंटर की सुप्रिटेंडनेंट
02:19ने लक्षमी को एक मिसाल कहा
02:23लक्षमी बहुत ही मजबूत इरादो वाली इस्टूडेंट है वह कभी आसानी से हान नहीं मानती वह तब तक कोशिश करती
02:29रहती है जब तक काम पूरा ना हो जाए
02:41गुरुवार से शुरू हुई ओडिशा ब्यस्सी बोर्ड के एक्जाम के लिए लक्षमी जैसी स्टूडेंट के लिए हर सेंटर पर वीलचेयर
02:48और अलग कमरे की ववस्था की गई है
03:08खड़े नहीं हो पाने के बावजूद लक्षमी मजबूत इच्छा शक्ती और पुलंद होसलों के साथ जीवन में आगे बढ़ रही
03:15है
03:15और मुश्किल हालातों के बावजूद हार नहीं माने की ठान चुकी है ये उनके लिए सिर्फिक एक्जाम नहीं उनके सपनों
03:23और सेल्फ रिस्पेक्ट की लड़ाई है
03:25ETV भरत के लिए मलकान गिरी से पंचानन दास की रिपोर्ट
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