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Phulera Dooj 2026: भांडीर वन आज भी राधा-कृष्ण विवाह की गाथा को जीवंत कर रहा है। ब्रह्मवैवर्त पुराण, गर्ग संहिता और गीत गो¨वद में भी राधा-कृष्ण के भांडीरवन में विवाह का वर्णन किया गया है। मथुरा से करीब तीस किलोमीटर दूर मांट के गांव छांहरी के समीप यमुना किनारे भांडीरवन है। करीब छह एकड़ परिधि में फैले इस वन में कदंब, खंडिहार, हींस आदि के प्राचीन वृक्ष हैं। भांडीरवन में बिहारी जी का सबसे प्राचीन स्थल माना गया है। यहां मंदिर में श्री जी और श्याम की अनूप जोड़ी है। जिसमें कृष्ण का दाहिना हाथ अपनी प्रियतमा राधा की मांग भरने का भाव प्रदर्शित कर रहा है। मंदिर के सामने प्राचीन वट बृक्ष है। जनश्रुति है कि इसी वृक्ष के नीचे राधा-कृष्ण का विवाह हुआ था। वट वृक्ष के नीचे बने मंदिर में राधा-कृष्ण और ब्रह्मा जी विराजमान हैं। भांडीरवन में राधा-माधव एक दूसरे को वरमाला पहना रहे हैं। आज भी वह वृक्ष मौजूद है।Phulera Dooj 2026: Bhandirvan Krishna Radha Marriage Place,Kaise Jaye,Kahan Per Hai,Story

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~HT.318~PR.111~ED.118~
Transcript
00:07आज का दिन सिर्फ एक तिथी नहीं है सिर्फ एक उत्सव नहीं है आज वो पावन अवसर है जब फुलेरा
00:15दूज के दिन ब्रजभूमी का वो पवित्रवन भांडीरवन एक बार फिर गूंज उठता है राधा और कृष्ण के दिव्य विवा
00:23की स्मृती से
00:33कहा जाता है कि आज ही के दिन इसी भांडीरवन की पवित्र धरती पर भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी
00:41का विवा संपन्न हुआ था और स्वेम ब्रह्माजी इस विवा के साक्षी और पुरोहित बने थे ये कोई साधारन वन
00:49नहीं ये वो स्थान है जहां प्रेम ने �
00:52लीला से आगी बढ़कर बंधन का स्वरूप लिया जब नंद बाबा बालत कृष्ण को लेकर यहां पहुँचे तभी राधारानी प्रकट
01:00हुई और उसी शर्म कृष्ण का बाल रूप युवा स्वरूप में परिवर्तित हो गया फिर ब्रह्माजी ने मंत्रों चार किये
01:08
01:08देवताओं ने पुष्व वर्षा की और राधा कृष्ण विवा सूत्र में बंध गये आज भी भांडीर वन के मंदर में
01:15आपको राधा कृष्ण की अनोखे प्रतिमा की दर्शन होंगे जहां भगवान कृष्ण राधारानी को वर्माला पहनाते हुए देखाई देते हैं
01:24साधी ब्रम्हाजी की भी प्रतिमा यहां विराजमान है जो सुद्धेव्य विवा का प्रमार देती है फुले राधूज के दिन यहां
01:32विशेश सजावट भजन की इतन फूलों की वर्षा और उच्जव का अद्भुत माहौल बनता है ऐसा लगता है कि मानो
01:40वही विवा ली
01:53अगर आप भी भांडीर वन जाकर राधाक्रिश्न के इस अनोखे स्वरूप के दर्शन करना चाहते हैं तो आपको बता दें
02:01यह मतुरा जिला में मौजूद है वरंदावन से लगभग 20-25 किलोमेटर दूर और मतुरा से लगभग 30 किलोमेटर
02:09आवरंदावन से यह मतुरा से टैक्सी, ओटो यह बस के माध्यम से यहां पहुँच सकते हैं वही अगर आप माट
02:16या चारी गाउन तक पहुँचते हैं तो वहां से आपको एक किलोमेटर पैदल चलना होगा दर्शन के लिए जो श्रेष्ट
02:24समय है वो सुबद 6 बजे से दो
02:39इस दिन जरूर जाए या अन्य किसी सामाने दिनों में भी वहां जाकर दर्शन कर सकते हैं बोलो राधे राधे
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