00:07आज का दिन सिर्फ एक तिथी नहीं है सिर्फ एक उत्सव नहीं है आज वो पावन अवसर है जब फुलेरा
00:15दूज के दिन ब्रजभूमी का वो पवित्रवन भांडीरवन एक बार फिर गूंज उठता है राधा और कृष्ण के दिव्य विवा
00:23की स्मृती से
00:33कहा जाता है कि आज ही के दिन इसी भांडीरवन की पवित्र धरती पर भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी
00:41का विवा संपन्न हुआ था और स्वेम ब्रह्माजी इस विवा के साक्षी और पुरोहित बने थे ये कोई साधारन वन
00:49नहीं ये वो स्थान है जहां प्रेम ने �
00:52लीला से आगी बढ़कर बंधन का स्वरूप लिया जब नंद बाबा बालत कृष्ण को लेकर यहां पहुँचे तभी राधारानी प्रकट
01:00हुई और उसी शर्म कृष्ण का बाल रूप युवा स्वरूप में परिवर्तित हो गया फिर ब्रह्माजी ने मंत्रों चार किये
01:08�
01:08देवताओं ने पुष्व वर्षा की और राधा कृष्ण विवा सूत्र में बंध गये आज भी भांडीर वन के मंदर में
01:15आपको राधा कृष्ण की अनोखे प्रतिमा की दर्शन होंगे जहां भगवान कृष्ण राधारानी को वर्माला पहनाते हुए देखाई देते हैं
01:24साधी ब्रम्हाजी की भी प्रतिमा यहां विराजमान है जो सुद्धेव्य विवा का प्रमार देती है फुले राधूज के दिन यहां
01:32विशेश सजावट भजन की इतन फूलों की वर्षा और उच्जव का अद्भुत माहौल बनता है ऐसा लगता है कि मानो
01:40वही विवा ली
01:53अगर आप भी भांडीर वन जाकर राधाक्रिश्न के इस अनोखे स्वरूप के दर्शन करना चाहते हैं तो आपको बता दें
02:01यह मतुरा जिला में मौजूद है वरंदावन से लगभग 20-25 किलोमेटर दूर और मतुरा से लगभग 30 किलोमेटर
02:09आवरंदावन से यह मतुरा से टैक्सी, ओटो यह बस के माध्यम से यहां पहुँच सकते हैं वही अगर आप माट
02:16या चारी गाउन तक पहुँचते हैं तो वहां से आपको एक किलोमेटर पैदल चलना होगा दर्शन के लिए जो श्रेष्ट
02:24समय है वो सुबद 6 बजे से दो
02:39इस दिन जरूर जाए या अन्य किसी सामाने दिनों में भी वहां जाकर दर्शन कर सकते हैं बोलो राधे राधे
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