00:03हिंदू धर्म में तेहवारू का सिलसिला बसंत पंचमी से शुरू हो जाता है लेकिन होली की असली रंगा तो फुलेरा
00:10दूज से आती है
00:11साल 2026 में 19 सुरवरी को मनाई जाने वाली फुलेरा दूज को प्रेम और भक्ति का सबसे पावन दिन माना
00:18गया है
00:18लेकिन क्या आप जानते हैं कि रंगों के गुलाल से पहले फुलो की होली खेलने की परंपरा क्यों शुरू हुई
00:23तो यह आपको आज किस वीडियो में हम बताते हैं कि अखिर फुलेरा दूज पर क्यों खेली जाती है फुलो
00:28की होली
00:29लेकिन उसे पहले नमशकार मासतोश रबोल्सकाई देख रहे हैं
00:3219 फरवरी 2026 को मनाई जाने वाली फुलेरा दूज का हिंदु धर में बहुती प्रेमपुर्ण स्थान है
00:39यदिन ब्रज की उन प्राचिन परंपराओं की याद दलाता है जोहां रंगों की गुलाल से पहले फुलो की वर्षा करके
00:45होली का उच्सव शुरू किया जाता है
00:47अब ब्रज की लोक माननेताओं के नुसार रंगो वाली होली खेलने से पहले फुलो का उप्योग करने के पीछे एक
00:53बहुती सुन्दर भाव छेपा है
00:55फुलो प्रकृती की सबसे शुद्ध और सुन्दर रचना माने जाते हैं जो कुमलता और सुगंद का प्रतीक होता है
01:02वही भगवान शुर कृष्ण को फुलो से सजाना और उन पर पुष्ट पवर्षा करना इस बात का संकेत है कि
01:08हम अपने जीवन को भी फुलो की तरब महकता हुआ और दूसरों के लिए सुखद बनाना चाहते हैं
01:13वे रंगों का गुलाल थोड़ा गहरा और चटक होता है जबकि फुल मन को शांत और स्थिर रखने में मदद
01:19करते हैं
01:20अभी ही कारण है कि ब्रज के मंदिरों में सबसे पहले फुलोक वाली होली खेली जाती है ताकि भक्त का
01:25मन पहले भक्ती के सुगंद से भर जाया और फिर वह रंगों के उत्सव में डूप सके
01:29वहीं फुलेरा दूज के हिसा शुब आउसर पर घर में भी फुलो का उपयोग करके वातावरण को पवित्र बनाया जाता
01:35है अब इस दिन अपने घर के मंदिर में श्रीकृष्ण और राधाजी के प्रतिमा को ताजे फुलो से सजाए और
01:41उन्हें माखन मिश्री का भोग ल
01:59का ध्यान करें अब ध्यान रहे कि पूजा के दोरान अपने मन को पूरी तरह शांत रखे और किसी के
02:05लिए भी करवे शब्दों का परियोग ना करें तो दोस्तों फिलाल इस वीडियो में इतना ही आपको ये जौन कारी
02:14कैसे लगी हमें कमेंट में लिखकर ज़रूर देएग
02:16कर दो कर दो कर दो दो है
Comments