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Ramadan 2026: रमज़ान का महीना इबादत, सब्र और तक़वा का महीना है।
लेकिन बहुत से लोगों के मन में एक बहुत important सवाल रहता है:
क्या बीमारी में रोज़ा रखना जरूरी है?
किन बीमारियों में रोज़ा नहीं रखना चाहिए?
Diabetes, BP, Heart problem वालों का क्या हुक्म है?
और रोज़ा किस हालत में छोड़ सकते हैं?
आज की इस वीडियो में हम आपको कुरान, हदीस और उलेमा-ए-किराम की राय के साथ बिल्कुल साफ और आसान भाषा में समझाएंगे।



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~HT.410~ED.390~PR.115~

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Transcript
00:01रमजण का महीना अबादत, सबर और तक्वा का महीना होता है
00:04लेकिन बहुत से लोगों के मन में एक बहुत इंपॉटन्ट सवाल रहता है
00:07क्या बिमारी में रोजा रखना ज़रूरी है?
00:10किन बिमारीों में रोजा नहीं रखना चाहिए?
00:12और रोजा किस हालत में छोड़ सकते हैं
00:14आज की इस वीडियो में हम आपको
00:15कुरान हदीथ और उल्मा एकराम की राय के साथ
00:17बिल्कुल साफ और आसान भाशा में समझाएंगे
00:20सबसे पहले हमें समझना होगा
00:21कि इसलाम का रूल बहुत क्लियर है
00:23इसलाम किसी को तकलिफ में डालने वाला दीन नहीं है
00:26कुरान में अल्लह तौला फर्माते हैं
00:28अल्लह तुमारे लिए आसानी चाहता है
00:30मुश्किल नहीं चाहता
00:31और इसी आयत में रमजान के रोजों का हुक्म बताते हुए
00:46अल्लह ने फर्माया
00:50अगर रोजा रखने से आपकी हेल्थ खराब हो रही है या जान का खत्रा है तो रोजा रखना सही नहीं
00:55है
00:55अब सवाल आता है कि बिमारी कितनी होने चाहिए
00:57उलिमा की राय के मताबिक रोजा छोड़ने की तीन बड़ी बचा होती है
01:01अगर बिमारी बढ़ने का खतरा हो, अगर recovery देड़ से हो, अगर डॉक्टर कहे कि fasting harmful है, यानि अगर
01:07fasting आपकी बिमारी को बहुत ज़्यादा बुरा बना रही है, तो इसलाम आपको छूट देता है, अब बात करते हैं
01:14उन diseases की जिनमें रोजा रखना risky हो सकता है, सबसे पहले आत
01:29बिहोशी तक हो सकती है, इसलिए ज्यादा तर डॉक्टर और उलेमा की राय में टाइप 1 डाइबेटीज वारे लोगों के
01:34लिए रोजा रखना risky होता है, अगर डॉक्टर मना करें तो रोजा रखना सही नहीं, टाइप 2 डाइबेटीज में कुछ
01:41लोग मैडिसिन पर होते है
01:42कुछ इंसुलीन पर, अगर शुगर कंट्रोल है और डॉक्टर अलाव करें तो कुछ लोग सेफ तरीके से रोजा रख सकते
01:48हैं, लेकिन अगर शुगर बार बार लो होती है, इंसुलीन डिपेंडेंट है, किडिनी प्रॉब्लम भी है या कमजोरी होती है,
01:54तो फिर रोजा व
02:12सरजरी हुई है, या मैडिसिन टाइमिंग बहुत स्ट्रिक्ट है, तो ऐसे में फास्टिंग डेंजरिस हो सकती है, उलेमा कहते हैं,
02:18अगर रोजा रखने से दिल की बिमारी बहुत ज्यादा बुरी होती है, तो रोजा छोड़ सकते हैं, बीपी वाले मरीज
02:25दो तना के होते ह
02:25जिनका बीपी कंट्रोल में है, अगर बीपी कंट्रोल है और डॉक्टर अलाव करे तो रोजा रखा जा सकता है, जिनका
02:32बीपी अनकंट्रोल रहता है, अगर बार बार बीपी हाई हो जाता है, डिजिनेस होती है, हैड़क रहता है, तो फास्टिंग
02:38में रिस्क बढ़ सकता ह
02:43किड्नी के मरीज़ों को पानी कम मिलने से किड्नी फंक्शन खराब हो सकता है, क्रेटनेन लेविल बढ़ सकता है, डालेजस
02:50की ज़रुवरत पर सकती है किड्ने जीसिज और खासकर डालेजस पेशन्ट के लिए रोजा बहुत रिसकी होता है।
02:56इसलिए डॉक्टर्स और उलेमा दोनों की कॉमन राय है, किड्नी फिलियर में रोजा वॉइट करें, इसके लावा अस्थमा और सांस
03:02की बिमारी में रोजा रखना पॉसिबल हो सकता है, लेकिन अगर पेशन्ट को बार-बार इन्हेलर की जरुवत पड़ती है,
03:07सांस फूलती ह
03:08सीवर अस्थमा अटैक्स आते हैं, तो फिर रोजा रिस्की हो सकता है, अगर एमेर्जन्सी इन्हेलर लेना पड़े, तो हेल्थ प्रियरिटी
03:14है, वहीं माइग्रेन और सीवियर हैड़, बहुत से लोगों को फास्टिंग में माइग्रेन ट्रिगर हो जाता है, अगर माइग
03:36स्टिंग माहिलाओं के लिए, डिहाइडरेशन, वीकनेस, बेबी की हल्थ पर असर हो सकता है, अगर डॉक्टर कहें कि बच्चा या
03:42माँ को नुकसान हो सकता है, तो रोजा छोड़ा जा सकता है, अब सवाल आता है, अगर रोजा रख लिया
03:47और दिन में प्राब्लम होगी, �
03:48तो क्या करें, रोजा तोड़ना जायज है, अगर चक्कर आने लगे, बहुत जादा कमजोरी हो, शुगर लेवल डेंजरसली लो हो
03:55जाए, बीपी बहुत गिर जाए, चस्ट पेन हो, सांस लेने में दिक्कत हो, वामेंटिंग लगतार हो, बेहोची का खत्रा हो,
04:00क्योंकि इस
04:18में फिद्या देना होता है, यानि एक रोजे के बतले एक गरीब हो खाना के लाना, ये रूल भी कुरान
04:23में बीमारी और मजबूरी वालो करीं बताया गया है, तो दोस्तों सबसे सही तरीका ये है कि रमजान से पहले
04:28डॉक्टर से चक अप कराएं, शुगर बीपी मॉनिटर
04:30रखें, मैडिसन्स का शेडूल डॉक्टर से अज़स्स करवाएं, सहरी और इफ्तार में हेल्दी खाना खाएं, डिहाइडरेशन से बचें, अगर एमरजनसी
04:37लगे तो रोजा तोड़ दें, फिलाल इस वीडियो में इतना है, उमीद है आपको ये जानकारी पसंद आई हो�
04:43को सब्सक्राइब करना, बिलकुल न भूले,
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