00:01रमजण का महीना अबादत, सबर और तक्वा का महीना होता है
00:04लेकिन बहुत से लोगों के मन में एक बहुत इंपॉटन्ट सवाल रहता है
00:07क्या बिमारी में रोजा रखना ज़रूरी है?
00:10किन बिमारीों में रोजा नहीं रखना चाहिए?
00:12और रोजा किस हालत में छोड़ सकते हैं
00:14आज की इस वीडियो में हम आपको
00:15कुरान हदीथ और उल्मा एकराम की राय के साथ
00:17बिल्कुल साफ और आसान भाशा में समझाएंगे
00:20सबसे पहले हमें समझना होगा
00:21कि इसलाम का रूल बहुत क्लियर है
00:23इसलाम किसी को तकलिफ में डालने वाला दीन नहीं है
00:26कुरान में अल्लह तौला फर्माते हैं
00:28अल्लह तुमारे लिए आसानी चाहता है
00:30मुश्किल नहीं चाहता
00:31और इसी आयत में रमजान के रोजों का हुक्म बताते हुए
00:46अल्लह ने फर्माया
00:50अगर रोजा रखने से आपकी हेल्थ खराब हो रही है या जान का खत्रा है तो रोजा रखना सही नहीं
00:55है
00:55अब सवाल आता है कि बिमारी कितनी होने चाहिए
00:57उलिमा की राय के मताबिक रोजा छोड़ने की तीन बड़ी बचा होती है
01:01अगर बिमारी बढ़ने का खतरा हो, अगर recovery देड़ से हो, अगर डॉक्टर कहे कि fasting harmful है, यानि अगर
01:07fasting आपकी बिमारी को बहुत ज़्यादा बुरा बना रही है, तो इसलाम आपको छूट देता है, अब बात करते हैं
01:14उन diseases की जिनमें रोजा रखना risky हो सकता है, सबसे पहले आत
01:29बिहोशी तक हो सकती है, इसलिए ज्यादा तर डॉक्टर और उलेमा की राय में टाइप 1 डाइबेटीज वारे लोगों के
01:34लिए रोजा रखना risky होता है, अगर डॉक्टर मना करें तो रोजा रखना सही नहीं, टाइप 2 डाइबेटीज में कुछ
01:41लोग मैडिसिन पर होते है
01:42कुछ इंसुलीन पर, अगर शुगर कंट्रोल है और डॉक्टर अलाव करें तो कुछ लोग सेफ तरीके से रोजा रख सकते
01:48हैं, लेकिन अगर शुगर बार बार लो होती है, इंसुलीन डिपेंडेंट है, किडिनी प्रॉब्लम भी है या कमजोरी होती है,
01:54तो फिर रोजा व
02:12सरजरी हुई है, या मैडिसिन टाइमिंग बहुत स्ट्रिक्ट है, तो ऐसे में फास्टिंग डेंजरिस हो सकती है, उलेमा कहते हैं,
02:18अगर रोजा रखने से दिल की बिमारी बहुत ज्यादा बुरी होती है, तो रोजा छोड़ सकते हैं, बीपी वाले मरीज
02:25दो तना के होते ह
02:25जिनका बीपी कंट्रोल में है, अगर बीपी कंट्रोल है और डॉक्टर अलाव करे तो रोजा रखा जा सकता है, जिनका
02:32बीपी अनकंट्रोल रहता है, अगर बार बार बीपी हाई हो जाता है, डिजिनेस होती है, हैड़क रहता है, तो फास्टिंग
02:38में रिस्क बढ़ सकता ह
02:43किड्नी के मरीज़ों को पानी कम मिलने से किड्नी फंक्शन खराब हो सकता है, क्रेटनेन लेविल बढ़ सकता है, डालेजस
02:50की ज़रुवरत पर सकती है किड्ने जीसिज और खासकर डालेजस पेशन्ट के लिए रोजा बहुत रिसकी होता है।
02:56इसलिए डॉक्टर्स और उलेमा दोनों की कॉमन राय है, किड्नी फिलियर में रोजा वॉइट करें, इसके लावा अस्थमा और सांस
03:02की बिमारी में रोजा रखना पॉसिबल हो सकता है, लेकिन अगर पेशन्ट को बार-बार इन्हेलर की जरुवत पड़ती है,
03:07सांस फूलती ह
03:08सीवर अस्थमा अटैक्स आते हैं, तो फिर रोजा रिस्की हो सकता है, अगर एमेर्जन्सी इन्हेलर लेना पड़े, तो हेल्थ प्रियरिटी
03:14है, वहीं माइग्रेन और सीवियर हैड़, बहुत से लोगों को फास्टिंग में माइग्रेन ट्रिगर हो जाता है, अगर माइग
03:36स्टिंग माहिलाओं के लिए, डिहाइडरेशन, वीकनेस, बेबी की हल्थ पर असर हो सकता है, अगर डॉक्टर कहें कि बच्चा या
03:42माँ को नुकसान हो सकता है, तो रोजा छोड़ा जा सकता है, अब सवाल आता है, अगर रोजा रख लिया
03:47और दिन में प्राब्लम होगी, �
03:48तो क्या करें, रोजा तोड़ना जायज है, अगर चक्कर आने लगे, बहुत जादा कमजोरी हो, शुगर लेवल डेंजरसली लो हो
03:55जाए, बीपी बहुत गिर जाए, चस्ट पेन हो, सांस लेने में दिक्कत हो, वामेंटिंग लगतार हो, बेहोची का खत्रा हो,
04:00क्योंकि इस
04:18में फिद्या देना होता है, यानि एक रोजे के बतले एक गरीब हो खाना के लाना, ये रूल भी कुरान
04:23में बीमारी और मजबूरी वालो करीं बताया गया है, तो दोस्तों सबसे सही तरीका ये है कि रमजान से पहले
04:28डॉक्टर से चक अप कराएं, शुगर बीपी मॉनिटर
04:30रखें, मैडिसन्स का शेडूल डॉक्टर से अज़स्स करवाएं, सहरी और इफ्तार में हेल्दी खाना खाएं, डिहाइडरेशन से बचें, अगर एमरजनसी
04:37लगे तो रोजा तोड़ दें, फिलाल इस वीडियो में इतना है, उमीद है आपको ये जानकारी पसंद आई हो�
04:43को सब्सक्राइब करना, बिलकुल न भूले,
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