00:03साथी अरब में कल यानी 17 वर्वरी को चांद नजर आने के बाद अब भारत में पूरी उम्मीद है कि
00:09पहला रोजा 19 वर्वरी यानी कल होगा
00:11रमजान का महीना रहमत बरकत और मगफिरत का महीना होता है लेकिन रोजा रखने से पहले लोगों के मन में
00:17सबसे ज़्यादा सवाल यही होता है कि रोजा रखने की नियत क्या होती है नियत कब और कैसे करनी चाहिए
00:22रोजा रखने की दूआ कौन सी है और रोजा खोलते वक्त क
00:26कौन सी दुआ पड़ी जाती है तो आज की इस वीडियो में हम इन सभी सवालों के जवाब जानेंगे वीडियो
00:31को पूरा जरूर देखिए क्योंकि ये हर रोज़ेदार के लिए बहुत जरूरी जानकारी है सबसे पहले समझे रोज़ा सिर्फ भूका
00:37प्यासा रहने का नाम नह
00:52यानी अल्ला का डर और खुद को बुराइसे बचाना अब सबसे जरूरी सवाल नियद का मतलब क्या है नियद का
00:58मतलब दिल में पक्का इरादा करना कि मैं Алला के लिए रोज़ा रख रहा हूँ
01:02बहुत से लोग सोचते हैं कि नियत सिर्फ जुबान से बोलना जड़ूरी है लेकिन उलेमा कहते हैं नियत असल में
01:08दिल का इरादा है
01:09अगर इनसान दिल से तैगर ले कि कल रोजा रखेगा तो नियत हो जाती है
01:13रसुल backyard ने फरमाया आमल का दारो मदार नियत पर है
01:17यानि कोई भी अबातत तब ही कबूल होगी जब नियत बहु रहता है कि नियत कँ है
01:22आनफी उलमा के मताबिक नियत रात से लेकर जवाल यानि दोपहद्स Live ने तक की जा सकती है
01:42वबिसौमी गदिन नवेतु मिन्च शाही रमजान
01:45जिसका मतलब होता है मैं अला के लिए
01:46रमजान के रोज़ की नियत करता हूँ या करती हूँ
01:50रोज़ा रखने के लिए नियत जरूरी होती है
01:52यह जरूरी नहीं कि इसे शब्दों में कहा जाए
01:54लेकिन दिल से यह इरादा किया जाता है
01:56कि यह रोज़ा सिर्फ अल्ला की खुशी के लिए रखा जा रहा है
01:58तो चलिए अब बात करते हैं
02:00रोज़ा खोलते वक्त कौनसी दूआ पढ़े
02:02रसुल अल्ला सुल्ह ने इफ्तार के वक्त दूआ की बहुत एहमियत बताई
02:05हदीस में आता है
02:06रोज़ेदार के लिए इफ्तार के वक्त दूआ रद नहीं की जाती
02:10इफ्तार के दौरान खास तोर पर खजूर खाने से पहले यह दूआ पढ़े जाती है
02:13और दूआ पूरी होने के बाद ही कुछ खाया जाता है
02:15ये सुनना तरीका रोज़े की तकदीस को बढ़ाता है
02:18और अल्ला की रहमत और बरकत हासिल करने का जरिया बनता है
02:27इसका मतलब होता है
02:29ए अल्ला मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा
02:31तुछ पर इमान लाया और तुछ पर भरोसा किया
02:34और तेरी दी हुई रोज़ी से रोज़ा खोला
02:36कई लोग इफ्तार में देर कर देते हैं
02:38लेकिन हदीस में आता है लोग भलाई पर रहेंगे
02:40जब तक इफ्तार में जल्दी करते रहेंगे
02:42इसलिए जैसे ही मगरिब का टाइम हो इफ्तार कर लेना चाहिए
02:45इफ्तार के बाद अल्ला से जो भी दूआ मांगी जाए बहुत एकसेप्टेड होती है
02:48आप ये दूआ कर सकते हैं या अल्ला हमारे रोजे खबूल फर्मा हमारे गुनाह माफ कर दे और हमें जाननम
02:53की आख से बचा
02:54फिलाल इस वीडियो में इतना ही अगर आपको ये जानकारी पसंदाई हो तो इसे लाइक करें शेयर करें और चैनल
02:58को सब्सक्राइब करना बिल्कुल न भूलें
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