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'उस्ताद-ए-ग़ज़ल': आजतक के मंच पर हरिहरन के सुरीले सफर को किया गया सेलिब्रेट, देखें

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00:00:00आज साहित याज तक लखनव में हरीहरन जी की स्वर्णिम घजल यात्रा पर जो आनन जी ने पुस्तक लिखी है उसका विमोचन होगा उस्तादे घजल हरीहरन और उनके नए घजल आलबम जान मेरी का भी लोकारपण होगा आप सब उससे सुन पाएंगे और यकीन मानिये की म
00:00:30मतलब I was fortunate कि मुझे पढ़ने के लिए मिला वो लेकिन मुझे लगा कि गीत सुनते हैं गीत पढ़ना पड़ेगा यहां यह क्या है और मैं इसी सवाल के साथ शुरू कर रही हूँ पहले हरीहरन जी आपके साथ 1974 से मुझे लगता है कि मतलब 50 साल से जादा समय हो गया है आपक
00:01:00अधि नमस्कार आप सबीकुर नमस्कार अगारा कि मैंने कभी ने सुचा कि कुछ बूक लिका जाए गाग्रफी ऑफिपया लेकिंगे हूँ तो काम करते जा रहे हैं और इतना प्यार मिलता है लोगों से कि बस उसी में हम रह चुकर रहे हो इतने सालों में हमने वही काम किय
00:01:30तो तो कहने लगी, अच्छा आने, सुभई दे रहे, नहीं, थोड़ी आवाज और बढ़ापाएं तो, आजी, जी, वान, टू, टू, टू, टू, टू, टू, टू, टू, हलो, हलो, हलो, ठीक है, तो आनन्द भाय आ रहे हैं मेरे पास, और कहने लगी कि और मेरे,
00:01:57और मैं कहूंगा कि जो ताज में हम ठहरे हैं, उसी ताज में इनसे मिलें, और वैसी है ताज, एक सोफा भी है, जो आज तक वही है, वाँ, तो बरहाल, तो उन्होंने कहा कि एक, ऐसे एक आईडिया है, कि आपके बारे में बुक लिखा जाए, आपके एक अज़र की जो ट्रै
00:02:27काम आपने किया है, उसके बारे में हम लिखे, तो मैं पांच मिनट के लिए मेरे को समझाने में, उब ला, आप लिखेंगे मेरे, काम के बारे में, अच्छा, बहुत, बहुत लंबा होगा ना, आप अगर लिखेंगे तो, और बहुत काम हम ने किये हैं, मतलब,
00:02:53तो इन्होंने मुझे कुछ इनका रिसर्च दिखाया और पहली बार मैंने
00:03:23प्रिंटिड मेरे सारे गजलों का जो रिकॉर्ड है जो अल्बम्स है प्रिंटिड वो मैंने देखा तो एक I was really surprised कि माला पहली बार देखनों और मजा रहा है और पलटता जा रहा हूं मैं पन्ने को मतलब it is not getting over
00:03:46तो मैंने बुला आनंदवर ठीक है मुझे क्या करना है बताईए तो बहले कि मुझे आप कुछ दस दिन देना है not at one stretch मतलब हर मैंने दो तीन दिन अगर आप देंगे तो हो जाएगा
00:04:02इस तरीके से शुरू हुआ
00:04:05मुश्किल था किन्विंस करना के लिए
00:04:08नमस्कार
00:04:11एहले लखनों से मुकातिब हूँ तो इस बात का जवाब दिया जाए शुरू जी को इससे पहले एक शेर
00:04:17जो पूरी इस यात्रा का जिसको आप कह सकते हैं कि उसकी जड़ है उसका बेस है
00:04:23वो यह है श्वेता जी कि वो सर्फिरी हवा थी समलना पड़ा मुझे
00:04:29मैं आखरी चराग था जलना पड़ा मुझे
00:04:36तो जब यह विचार दिमाग में आया तो वो इसलिए आया कि मैं पिछले 20 साल से
00:04:43गजल गाईकी का जब सफर देख रहा हूँ
00:04:46हिंदुस्तान और पाकिस्तान में
00:04:48मौलिक्ता की बहुत कमी हो गई है
00:04:50और एक मात्र हरिहरन साथ थे
00:04:53मेरी निगाह में जिनका
00:04:54आपने बोला भी कि पैते साल से मैं ट्रेस कर रहा हूँ
00:04:57मैं बहुत लखी हूँ कि
00:04:591979 में मेरे पास
00:05:01गमन का रिकॉर्ड आ गया था
00:05:02मेरे पिता जी ने मुझे दिया था
00:05:04और वहां से लेके आज तक
00:05:05जो हमने आपके साथ जरनी इंजॉए की है
00:05:08हर एल्बम का रिलीज
00:05:09जब मोबाइल नहीं भी होता था
00:05:12तो हम कनेक्टेट थे और लखनों का
00:05:13उसमें बहुत बढ़ा योगदान है
00:05:14तो बात को छोटी करता हूँ
00:05:17तो वो जो बेस था कि
00:05:18आंखिर इस ग לה ARCni का होगा क्या
00:05:20क्या हम मिमिक्री ही करते रहेंगे
00:05:22यह हम मिमिक करके गजले काते रहेंगे
00:05:25मौलिकता का क्या होगा
00:05:26और उसके बाद
00:05:27जिन गजल गायकों ने इतना काम किया है हमारे देश में, पूरे विश्व में, उन सबको भी एहतराम करना था, तो मैं कोशिश में था कि कैसे लोकेट करूं, कि गजल संसार एक साहित्ति की बहुत बड़ी दुनिया है, उस गजल संसार को पबलिक तक ले जाने में किताबों क
00:05:57किया गया है, और उन शैलियों को दिखाने के बाद, घराने स्टेबलिश करने के बाद, सारे गजल गायकों का एहतराम करने के बाद, बारी आई की पाँचवे घराने का उदै हुआ, वो है हरेरन साब, तो उसमें 50 साल की लेगेसी पे हमने इस किताब को तर्तीब दिया.
00:06:27अगर उन सुरों के साथ हमने समझा पाएंगे, तो उसे पढ़ने में और मज़ा है सबको.
00:06:37तो दर्शकों आप तयार है ना, आज हम हरेरन साब की 50 साल की गायकी को सेलिबरेट करेंगे और हर दशक के हिसाब से सेलिबरेट करेंगे.
00:06:46तो मैं मुखादिब होना जाता हूँ हरेरन साब के साथ, कि वो पहली गजल जहां से जीवन शुरू हुआ.
00:06:53जो पहली गजल जिसमें मतलब मुझे लोगों ने पैचाना, वो फिल्म गमन में मैंने काया.
00:07:01जैदिव जी उनका सुरुबत किया है और शेहियार साब शायर थे, उनकी लिखिवी गजल है.
00:07:11अजीब सानिहा मुझे पर गुजर गया यारो, मैं अपने साए से कल रात डर गया यारो.
00:07:20गाके सुनाओ.
00:07:31जब तक वो उसे ठीक कर रहे है, तब तक उसको प्लीज एक बार कीबूर को देख लीजेगा, और जब तक वो हो रहा है, तब तक ये घरानू वाली बात आगे.
00:07:52जी, जी.
00:07:53जी, आजादी के पहले, हमारे हाँ जो रिकॉर्ड पे जो अपने पास दस्तावेज अवेलिबल है, श्वेता जी वो 78 आर्पीम के रिकॉर्ड है, उनकी एक सीमा थी, तीन मिनट कुछ सेकंड्स की पर साइड होती थी, तो किसी भी गजल गायका, या गायक को जो गाना है, �
00:08:23काम करने का शायद सिर्फ आवास का ही सहारा था, गायकी पैटर्न को दिखाने का सहारा नहीं था, बेगम अक्तर साहिबा ने उस पे काम शुरू किया, और वो अपने आप में पहला घराना बना, जब उन्होंने, मैं ये समझाता हूं कि, जो काम हम कर रहे हैं गजल में, वो
00:08:53भरते हैं, और वो और भी जागरित हो जाता है, एक वीडियो हम क्रिएट करते हैं, अजीब सानिहा, मुझ पर गुजर गया, यारो, मैं अपने साए से, कल रात डर गया,
00:09:21यारो, अजीब सानिहा, मुझ पर गुजर गया, यारो, अजीब सानिहा, मुझ पर गुजर गया, यारो, तो इजी को मैं सुर में कह रहा हूं, मैं,
00:09:37अजीब सानिहा, मुझ पर गुजर गया, यारो, मैं अपने साए से, कल रात डर गया, यारो, अजीब सानिहा,
00:09:59तो ये जो सुर भरने का अंदाज है, जो कहने का अंदाज है, हर आर्टिस्स का अलग अलग होता है,
00:10:08और उनके जो घजल गायक है, उनके जो अपने रियास और अपने जो म्यूजिकल स्किल है, उस पे आधारित होता है,
00:10:23क्योंकि घजल म्यूजिक करके कुछ नहीं है, घजल सिर्फ पोईट्री है, उसे आप किसी भी अंदाज में गाईएगा,
00:10:33अजीब सानेहा मुझ पर गुजर गया, यारो, मैं अपने साहे से कलरा डर गया, यारो,
00:10:44इस तरीके से भी गा सकते हैं अप, तो ये इतना अंतर है एक-एक आर्टिस्ट में,
00:10:51जो बेगम अक्तर साहब अगाई थी, उन्होंने पूरा राग में, उन्होंने पहली, सबसे पहली उन्होंने कॉंसर्ट परफॉर्फॉर्मेंस,
00:10:59कॉंसर्ट स्टेज भी ले आएं, घजल को, ये बहुत पड़ा कॉंट्रिबुशन उनका था, नहीं तो बिल्कुल छोटे-छोटे मेफिलों में गाते थे,
00:11:08जब, जबके, क्लाजिकल म्यूसिक का, कॉंसर्ट स्टेज में प्रसिंस था,
00:11:13मगर बेगम साहिबा ने, उनको उस मयार तक पहुंचा है, कि घजल को भी सुनियेगा प्लाटफॉर्म पे,
00:11:22कॉंसर्ट प्लाटफॉर्म पे,
00:11:24तो तो उसके बाद इतने सारे,
00:11:30मतलब, साइगल साप अपने अंदाज में गाएं,
00:11:33और फिर तलत तलत साहब, उन्हों ने काएं, रफी साहब,
00:11:40और इनके मतलब, इस सारे कंपोसर्स थे, जो घजल उनके लिए तियार करते थे,
00:11:50ये क्या हो गया, हबा,
00:11:55तो ये इस बात को आगे बढ़ाते हैं, इनका ओर्गन भी तियार है,
00:12:00तो हम वो बात कर रहे थे कि अजीब सान्हा मुझे पर गुजर गया,
00:12:03यारों, आपकी पहली गजल थी, जो इसी यूपी गौवर्मेंट ने आपको,
00:12:09हाँ जी, मुझे 1977 की बात है, तो इसमें मुझे यूपी जर्नलिस्टिक अवार्ड भी मिला था,
00:12:17हाँ उन्होंने मुझे रेकनाइस किया, और 1977 में मैं यहाँ आके परफॉर्म भी किया, लकनो,
00:12:25क्या बात है, एक जोड़ ना ताली हो जाए, यह रिष्टा है उत्तर प्रदेश से आपका,
00:12:291977 के बाद, आज 2026 में, आप फिर सुन रहे हैं इस मंच पर,
00:12:34क्या बात, जी, जी, पिर, तो यह गजल था, फिल्मी गजल से शुरू हुआ, शेहरियार साफ की इस गजल से,
00:12:41फिर आप जब उस्ताद के साथ, गुला मुस्तफा खान साफ के साथ, शागिर्दी में गए,
00:12:47वहां से गजल का एक प्रॉपर सफर शुरू हुआ, तो पहली गजल जो, जिसने इनको आपको पहचान दिलाई, प्राइवेट गजल सिंगिंग में,
00:12:56कौन साफ, बहुत पेचेन, खान साफ, जो मैं पहली मजब उन्होंने मुझे, बहुत सारी गजलें उन्होंने सिखाया मुझे,
00:13:14तो सबसे पहले राग यमन में एक गजल सिखाया,
00:13:18बहुत पेचेन है दिल, तुम जहां भी ओ, चले आओ,
00:13:22सितारों की सजी महफिल, न उट जाए, चले ओ,
00:13:27बहुत बेचेन है दिल, तुम जहां भी ओ, चले आओ,
00:13:45सितारों की सजी महफिल, न उठ जाए, चले आओ,
00:14:00बहुत पेचेन है दिल, तुमारी बेरुखेने, यू हमारा दिल बहुत तोड़ा,
00:14:24तुमारी बेरुखेने, यू हमारा दिल बहुत तोड़ा,
00:14:41उसी दिल में तुम्हे आवाज दी है तुम चले आओ,
00:14:55उसी दिल में तुम्हे आवाज दी है तुम चले आओ,
00:15:11चले आओ, चले आओ,
00:15:15तु ये 1975 में दूर दर्शिन में गाया था मैंने, ये गाज़त,
00:15:251975, हाँ जी, बहुत सदे यामित्र शाहिद अभी यात्रा पे थे,
00:15:31हाँ, दर्थी पर आने की, जी, हाँ जी, आप,
00:15:34आने जी, चुकि आपने इस, ये पूरा एक बहुत, लगभग तीन दशक विता लिये हैं,
00:15:40उसे साड़े तीन दशक के साथ, इसलिए मैं आपको भी चाहूँगी कि आप गाइड करें,
00:15:45अब इस कॉन्वसेशन को, हम पहले दशक की बात, पहले घजल की बात यहाँ पर करते हैं,
00:15:50अब हम दूसरे दशक की तरफ आएं, वैसे तो हर पड़ाओ पर रुखने का दिल कर रहा है,
00:15:54लेकिन शास्त्रिय संगीत में महारत होना, उसकी एक ट्रेनिंग, उसका प्रिशिक्षन होना और घजल, क्या सामान में है कि, क्या,
00:16:06बहुत एक तो, इसका जवाब अभी हम हरियरन साभ से भी लेंगे,
00:16:09मगर मैं इतनी बड़ी जो जन्ता यहां बैठी हुई है, इसका मैं नुमाइंदा हूँ,
00:16:15क्या प्रतिनेदे तो कर रहा हूँ, मैं यहां इस मौजूद सामाईन का,
00:16:19कि संगीत का, शास्त्री संगीत का ज्यान होना, एक अच्छा श्रोता होने की निशानी नहीं है,
00:16:26आप अगर कान से अच्छे हैं, सच्छा सुनना चाहते हैं, तो आप पर संगीत एक प्रभाव के रूप में उतरता है,
00:16:34मेरा कभी कोई शास्त्री संगीत से वास्ता नहीं रहा,
00:16:37मगर गजल जो समझ में आती है, वो उसके भाव से समझ में आती है,
00:16:42कि गायक में उसको बढ़ता कैसे, तो इसमें बहुत महारतियों का हाथ है,
00:16:47बड़े-बड़े हुए, मेंदिय संग्खा साब हुए, जग्जी सिंग साब हुए, फरेदा खानम साब है,
00:16:52शास्त्रिय संगीत जो है, आनंद भाय, कि जो गाता है, वो ज़रूर शास्त्रिय जाने,
00:17:02मगर श्रोता वो सुन रहे हैं, यह ज़रुवत नहीं कि उनको वो शास्त्र के बारे में जानकारी हो,
00:17:09यह जादू है
00:17:11शास्त्रिय संगीत का
00:17:14अगर आप सही से
00:17:15आप पेश करेंगे
00:17:17सीखेंगे और पेश करेंगे
00:17:18उसका असर होगा
00:17:20अपने आप होता है
00:17:22अभी पुछ
00:17:23इस इनरजी
00:17:25फ्रीक्वेंसी का इनरजी है
00:17:27तो अगर जब
00:17:30वो भरपूर है
00:17:31या सही है
00:17:32वो जो फ्रीक्वेंसी
00:17:35तो वो जाके आपको टच करता है
00:17:38अब शोईता जी अगर मैं कहूँ
00:17:39कि हाथ में हाथ लेके ये वादा कर लो
00:17:42और अगर मैं बोलू
00:17:43मां लीजे राग यमन में है
00:17:45तो उस पर आप पे क्या असर पढ़ता है
00:17:46आपको तो शब्द ही सुनने
00:17:48तो मैं गोदारिश करू
00:17:49ये राग किरवानी में है
00:17:51अब राग किरवानी बोलके क्या
00:17:53हमको एक कांसिन को क्या मतलब है
00:17:55हमको तो इसके असर करते हैं नहीं
00:17:57और शब्द हम तक पहुँच रहे क्या
00:17:59मेरे दिल को छूरे क्या
00:18:01वहाँ पे गायक अपनी गायकी को दिखाता है
00:18:03प्लीज
00:18:04अब जो राग किरवानी है
00:18:10मेरे दिल करते है
00:18:40हाथ में लेके मेरा हाथ ये वादा कर लो
00:18:57हाथ में लेके मेरा हाथ ये वादा कर लो
00:19:09अब अब न छोड़ोगे कभी साथ ये वादा कर लो
00:19:21हाथ में लेके मेरा हाथ ये वादा कर लो
00:19:32तो अब आप रा किरवाने को हम इस घजल के दुआरा पेश करते हैं
00:19:43हमारा बंदिश जो है वो घजल है
00:19:45तुन न बदलोगे तुन न बदलोगे
00:19:54बदलते हुए मौसम की तरह तुन न बदलोगे
00:20:07बदलते हुए मौसम की तरह बीतने वाली है
00:20:19बरसात ये वादा कर लो
00:20:25बीतने वाली है
00:20:30बरसात ये वादा कर लो
00:20:36अब आप सबने देखा कि ये गजल जो अभी हरी अरन साब ने पेश की
00:20:42ये आपकी कंपोस की हुई पहले गजल अलबम
00:20:46सुकून से ही ये गजल है और कितना बड़ा record
00:20:50कायम किया आपने मैं आपको बताता हूँ
00:20:53कि ये सुकून अलबम
00:20:55पहली बार किसी भी गजल गायक के दौरा
00:20:59विदेश में record हुआ
00:21:00विदेशी musicians के साथ record हुआ
00:21:03विदेशी साज उसमें सजे
00:21:07और ये वहीं complete हुआ
00:21:09ये पहली बार किसी भी हिंदुस्तानी गजल गायक ने एक इतना बड़ा माइल स्टून सिट किया, जिसका की पहला इल्बम था, तो हम जैसे जो इनके प्रेमी थे, वो समझ रहे थे कि अब कुछ उडान बहुत बड़ी होगी, मैं बात कर रहा हूं, एट्टी बनी.
00:21:23इस पुस्तक में आप, चुकि आपने सवाल पूछा, उनका जवाब, उस रूप में आपने उसको प्योर तरीके से दर्ज कर लिया, अब इसमें आप एक सवाल पूछते हैं इनसे, कि आपने इन पचास सालों में अपनी आवाज और गायकी को इतने प्रकार के संगीत में कैसे
00:21:53पुइ क्या है कि, गाना जो है, वो सुर में बात करना है, जो जिस तरीके से आप 40 साल पहले जिस तरीके से आप बात करते ते, वही हो गाना, जब आप बात करते हैं, तो गाना बेवेसी है, ऐसा कुछ नहीं है कि कुछ अलग जादू कर र Kennedy हैं हम या नहीं है, सिर्फ हम सु
00:22:23अब हम अगले दशक की तरफ चले जी जी बिलकुल बिलकुल
00:22:271985 में आशा जी ने मुझे कहा
00:22:33मैं उनके साथ उनके प्रोग्राम्स में गाता था मैं
00:22:37को सिंगर
00:22:38आजा आजा मैं हूँ प्यार तेरा
00:22:44अला अला इनकार तेरा हो
00:22:49आजा आजा आजा आजा आजा आजा आजा आजा
00:22:54तो ये गाने गाता था तो उनके साथ
00:22:58तो उन्होंने कहा कि
00:23:00हरी मेरे लिए एक घजल आलबम तयार करो
00:23:04तो मैं सोचा कि मैं कुछ गलत सुन रहा हूँ
00:23:08क्योंकि तब जाके
00:23:10गुलाम अली खान साथ के साथ उन्होंने
00:23:19तो मैंने बोला, दिदी, मैं कंपोज करूँ आपका ही, हाँ, बिलकुल, वो है आपशारी का से लिए, और उसमें, इतनी मतलब उन्होंने, कोई नाम नहीं है, कुछ नहीं है, नया सा लड़का है, कंपोज कर रहा हूं, उन्होंने मुझे एक मैना दिया रिहसल के लिए, और �
00:23:49सा माइलस्टोन फुर मी, बिसिक्ली, क्योंकि कॉंफिदेंस बढ़ता है, कि आशा जी आके आपके, कॉंपेशिशन गा रही है, और लोगों को अच्छा लग रहा है उसमें, तो उसमें एक, डुएट भी गाया था मैंने,
00:24:00कुछ दूर हमारे साथ चलो, हम दिल की कहानी कह देंगे, समझे न जिसे तुम आँखों से, वो बत जबानी कह देंगे,
00:24:27कुछ दूर हमारे साथ चलो,
00:24:34मौसम तो बड़ा ही, जालिम है, तुफान उठाता रहता है,
00:24:53कुछ लोग मगर इसे हल चल को,
00:25:00कुछ लोग मगर इसे हल चल को,
00:25:16बद मस्त जवानी कहते हैं,
00:25:29समझे न जिसे तुम आखों से वो बत जबानी कह देंगे,
00:25:41समझे न जिसे तुम आखों से वो बत जबानी कह देंगे,
00:25:54कुछ लोग कुछ दूर हमारे साथ चलो
00:26:01श्वेता जी जो ये परपस हल करेगी ये किताब,
00:26:08ये आपने तो गजल गाई, और गजल हमने सुन भी ली,
00:26:11इस गजल के पीछे की जो कहानी है,
00:26:13थोड़ी सी हरिहरन साब ने भी आपको बताई,
00:26:15कि ऐसे इस को पेश किया,
00:26:17कितना बड़ा तथ है, जो पहली बार दर्शक जानेंगे,
00:26:21कि हरिहरन साब की कंपोज की हुई अल्बम,
00:26:25जो किसी दूसरे गायक ने गाई,
00:26:27वो इनकी जिन्दगी की दूसरी ही अल्बम थी,
00:26:30सुकून के तुरंत बाद,
00:26:32आप शाड़े गजल आई,
00:26:33जिसके म्यूजिक डारेक्टर हरिहरन थे,
00:26:36जड़ा इस बात को सोची जड़ा साब,
00:26:37क्या कह रहा हूँ मैं,
00:26:38और आशा ताई ने बोला कि मेरी गजलें कंपोज कर दो,
00:26:41और उसमें दो गजलें, डुएट दी,
00:26:43जिसको कभी यह बता है,
00:26:44आशा ताई से मेरी बात हुई,
00:26:46उनका आप इंकर्व्यू,
00:26:48आशा ताई जी ने बोला,
00:26:50कि जब मेरे को हरी ने दुन दिया,
00:26:53उनका जो बोलने के स्टाईट,
00:26:54वो में गबढ़ा की,
00:26:55कि यह क्या है,
00:26:56यह क्या है, हरी यह तुमने क्या दिया है,
00:26:58तो हरी जी ने बुलना बदा हरेरन साब ने कहा
00:27:01कि नई दीदी कवड़ाने का नहीं मैं आपको रियास कराओंगा
00:27:04तो इनका एक पुराना बंगला है जो घर
00:27:06उसमें एक दुछत्ती कमरा है
00:27:08जिसमें आप बैठेंगे तो सर सिफ छे इंच है बस
00:27:11यानि उसमें एंट्री करने के लिए रियास करती थी
00:27:17और बोली कि भई ये बहुत कटेन है तो हरेरन साब ने कहा
00:27:20मैं इसको थोड़ा सॉफ्ट कर देता हूँ
00:27:22आशा था है आपको दिक्कत नहीं होगी
00:27:23वो सॉफ्ट वर्जन पर रियास करती रही
00:27:25और जब डिकॉर्डिंग पर गई तो वो पहला वर्जन गाया
00:27:28ये खुमसूरती है उस कलाकार की
00:27:30दीदी मैंने एक गाना है बहुत मुश्किल गाना है
00:27:36यूनती मुझे से बेरुखी पहले
00:27:45यूनती मुझे से बेरुखी पहले
00:27:54तुम तो ऐसे न थे कभी पहले
00:28:04तुम तो ऐसे न थे कभी पहले
00:28:13यूनती मुझे से तुम तो इसमें एक शेर है की
00:28:20कितनी आसां थी जिन्दगी पहले
00:28:30तो गाते काते बोले हां बिल्कुल आसान थे उनकी जिन्दगी एक आने से पहले
00:28:36तो बड़ा बहुत मज़ा आया और उनसे
00:28:40करते करते मुझे बहुत सीखने को मिला उनसे भी वो कहने लगी किस तरीके से कॉमपोसिशन की करो
00:28:46क्या-क्या बाते रखो
00:28:48कितनी मतला बड़ा सब परसंटेज
00:28:50कितना आप मुजिकालिटी दे सकते हो उसमें
00:28:52बहुत मुश्किलात मत करो क्योंकि वो
00:28:56मुक्तलिफ बातें कहों
00:28:58अगर बुक्तकी से
00:28:59that's what she meant, you know
00:29:01बड़ी अच्छी बातें रखो आप सामने
00:29:04तो ये मुझे लर्निंग
00:29:06एक learning experience
00:29:08भी था उनके साथ
00:29:09मतलब आपकी गाईकी में
00:29:12एक
00:29:14modern touch भी एक अधोनिक्ता भी है
00:29:15और एक पारंपरिक
00:29:17मतलब आप एक संतुलन
00:29:19जो उसका लाते हैं
00:29:20और मुझे लगता है कि इसमें बहुत सुंदर्ता के साथ
00:29:22आनिंजी आपने उसे highlight भी किया है
00:29:25देखे क्या है
00:29:26किसी भी art form में
00:29:28चाहे वो culture हो, चाहे art हो, चाहे music हो
00:29:30वो वक्त के साथ बात करता है
00:29:32उससे अलग नहीं हो सकता
00:29:33आज आपकी फिल्म में वो ही दिखा रही है
00:29:35जो आपका समाज कर रहा है
00:29:36Am I right?
00:29:38तो इसी तरह एक artist अगर evolve नहीं करेगा
00:29:41किसी art form पे
00:29:42तो art form निकल जाएगी, पुरानी हो जाएगी
00:29:44हम कब तक copy करके गाएंगे
00:29:46तो हरी हरन साब शुरू से ही इस बात को जानते थे
00:29:49और क्यों मैं इनका fan था
00:29:51जब मैं एक छोटा सा
00:29:5281 में 12 प्लस
00:29:54क्लास में था
00:29:56कि जो हमें मौझूद था उस वक्त काम
00:29:58वो वेगा मक्तर साहिबा मेंदी हैसन साब का
00:30:00उच्च कोटी का काम था
00:30:02जिनसे को रिलेट करना एक बच्चे के लिए
00:30:04टफ काम था
00:30:05वहाँ पर ये फिलर लेके आए
00:30:07और ऐसे ही देखे आप एक्टिंग में होता है
00:30:09ऐसे ही साहित्य में होता है हर चीज होती है
00:30:11तो उस समय जा अरियरन साहब की
00:30:13ब्रैंड बन रही थी तो उस समय एक
00:30:15हरीहरन करके गजल्स करके एक अलबम आया
00:30:18और मुझे ध्यान है कि
00:30:20वहाँ से हम लोग बिलकुल साफ पहचाणने लगे
00:30:23कि अब हरीहरन साहब का एक गजल सिंगर हिंदुस्तान में
00:30:25द्याद रखिए वो दौर धूम के तु का दौर था
00:30:28एटीज गजल के लिए जाना जाता है स्टौनिम काल
00:30:32और उस वक्त एक कलाकार एंट्री ले रहा है
00:30:35और इनका एक अलबम था जो मैं बुला भी आपसे की
00:30:38हरीहरन गजल्स तो उसमें एक गजल थी जो हम बच्चों को बड़ी पसंती
00:30:42हुस्न वालों का खुदा लगता है
00:30:44यार तू सबसे जुदा लगता है
00:30:46तो ये एक जुदा यार है हमारे
00:30:48मैं गुदारिश करता हूँ जरा हुस्न वालों का खुदा लगता है
00:30:51हुस्न वालों का खुदा लगता है
00:30:56हुस्न वालों का खुदा लगता है
00:31:04हुसन वालों का खुदा लगता है
00:31:13यार तू सबसे जुदा लगता है
00:31:17हुसन वालों का खुदा लगता है
00:31:21यार तू सबसे जुदा लगता है
00:31:26हुसन वालों का खुदा लगता है
00:31:34ऐसा क्या है तेरी अंगडाई में
00:31:39तु मुझे रोज नया लगता है
00:31:52तु मुझे रोज नया लगता है
00:31:57यार तु सब से जुदा लगता है
00:32:01उस वालों का खुदा लगता है
00:32:31अब आप सोचें कि गजल की जरुवत पहले जब उतनी थी
00:32:40तो अब कितनी होगी
00:32:41तो एक्चुली यही हो रहा है
00:32:46और गजल इसलिए कभी पुरानी नहीं होती
00:32:48उसको बीती बातें दोहराने की जो आदत है ना
00:32:51प्यार की, खुस्न की, घजल की वो उसकी जीनत है
00:32:55सर बीती बातें कुछ दोहरा दे
00:32:58बीती बातें दोहराने की आदत सी हो गई है
00:33:22चलते चलते, चलते चलते, चलते चलते
00:33:30रुक जाने की आदत सी हो गई है
00:33:39बीती बातें दोहराने की आदत सी हो गई है
00:33:50हमको ये भी याद नहीं
00:33:55क्या खोया है, क्या पाया है
00:34:01हमको ये भी याद नहीं
00:34:20हमको ये भी याद नहीं
00:34:30क्या खोया है, क्या पाया है
00:34:35लोगों से धोका खाने की आदत सी हो गई है
00:34:47लोगों से धोका खाने की आदत सी हो गई है
00:34:56बीती बातें
00:35:03बहुत इमोशनल कर दिया सहब आपने
00:35:07और बीती बातें दोराने की आदत हो गई है
00:35:10और धोका देने की बात हुई इस शेर में
00:35:13शोयता जी आंक नम हो रही है
00:35:16दो दोस्त धोका दे गए इस किताब लिखने के सफर में
00:35:20और वो दोस्त हरियरन साहब के लखते जिगर थे
00:35:23हम सफर थे और जिंदगी का हिस्सा है
00:35:26एक थे ताहिर फराज साहब
00:35:28जो अभी चले गए
00:35:29मतलब क्या समय जाना हुआ उनका
00:35:31जाना हुआ उनका किताब को कॉंटिब्यूशन देखे गए
00:35:34और दूसरा नाम लूँगा तो दूर तक ताली सुनाई देनी चाहिए
00:35:37उनकी याद में उनकी शद्धांजली में
00:35:39जाकिर हुसेन साहब
00:35:41और
00:35:45हरियरन साहब के जीवन में
00:35:48एक चैप्टर जुड़ा
00:35:49जिसके अलबम का नाम था
00:35:51हाजर
00:35:51जिसमें हाजर ये कैसे नाम देखे बनाया
00:35:55इस अलबम का
00:35:56तो उसकी कुछ याद मैं आप से सुनना चाहूंगा
00:36:00हाजर अलबम की
00:36:01जाकिर भाई वो
00:36:03मतलब
00:36:05अब तक महसूस ने हो रहा है कि वो नहीं है
00:36:06हमारे साथ क्योंकि इतना
00:36:08इतने एक
00:36:10पाउरफल आर्टिस्ट पाउरफल शक्सियत जो है
00:36:13तो
00:36:15नाइन्टी नाइन्टी टू में मैंने
00:36:17उनके साथ
00:36:18हाजर किया मैंने
00:36:21और तब से
00:36:23बहुत सारे
00:36:25नैशनली इंटरनाशनली शोज किया हमने
00:36:30इस साथ में किया है
00:36:31और पांग साल पहले हाजर टू भी किया था हमने
00:36:36बड़े यादें हैं उनके साथ
00:36:39म्यूजिकल यादें हैं
00:36:41उनकी फिलोसिफी जो है
00:36:43वो भी याद याद बहुत आती है
00:36:47एक घसल में पेश कर रहा हूँ उनके याद में
00:36:51मरीज इश्क का क्या है
00:36:59जिया जिया न जिया
00:37:04मरीज इश्क का क्या है
00:37:10जिया जिया न जिया
00:37:15है एक सांस का जगड़ा लिया लिया न लिया मरीज इश्ग का क्या है जिया जिया न जिया
00:37:37मेरे ही नाम पे आया है जाम महेफिल मेरे ही नाम पे
00:37:53मेरे ही नाम मेरे ही नाम पे आया है जाम में फिल में
00:38:10ये और बात के मैंने पिया पिया ना पिया
00:38:21ये और बात के मैंने पिया पिया ना पिया ये और बात के मैंने पिया पिया ना पिया मरीज इश्क का
00:38:46इसी लिए सबसे खास हमेशा सोचते हैं न तीस से अधिक हैं उनके साथ गजल लेकिन ये सबसे खास ये एक सिर्फ एक कलाकार के लिए एक सिंगर के लिए ये चुनौती नहीं होती है बर उस आर्ट फॉर्म के लिए भी चुनौती होती है कई बार आज जब यूग भी बदल �
00:39:16जब तक लोग है और जब तक दिल है और दिल में प्यार है तो गसल तो जिंड़ा है ये गुफ्तगू है
00:39:39और अगर आप देखें तो maximum sms शायरी का ही है उसका level कुछ भी हो सकता है
00:39:45अब इस इस वक्त में बताता हूँ कि
00:39:47बहुत अच्छे-अच्छे नए कलाकार हैं गजल के शेत्र में
00:39:56और इसको मद्या नज़र रखते हुए हमने एक
00:39:59पियॉर गजल के उपर एक सिंगिंग कॉंटेस्ट शुरू कर रहे हैं
00:40:07हाँ, All India, हर स्टेट से सिंगर्स रहेंगे
00:40:12उसका नाम है सर्ताजे गजल
00:40:14and it'll be on DD, दूरदर्शन पर होगा
00:40:20तो ये आप आप देखिएगा, प्रीस आप सुनिएगा जब भी आएगा ये प्रोग्राम
00:40:27सर्ताजे गजल
00:40:28ये गजल के विकास के लिए बहुत ही आवश्चेक है
00:40:32ये पहली बार हो रहा है गजल के लिए
00:40:33पहली बार
00:40:35तो गजल कंटेस्ट में जब आप नए कलाकारों को सुनेंगे
00:40:38तो नया जीवन मिलेगा, गजल को भी नया जीवन मिलेगा
00:40:40और ऐसे ही बीच में एक वक्त आया
00:40:43हरियरन साहब ने जब आपकी इस बात पे अगर हम गवर करें
00:40:46थोड़ा सा विस्तार दे दे तो अब क्या हो गजल में नया
00:40:50तो इनके अंदर एक छुपा हुआ बच्चा
00:40:53जो हमेशा जिग्यासू, बहुत जिग्यासू है
00:40:55और उस, उसने एक ऐसा अम चायम कर दी, एक अलबम बना कर
00:41:00जिसका नाम लोगा तो दूर तक ताली बजड़ेगी
00:41:03अलबम का नाम था काश
00:41:05काश हैसा कोई मन्जर होता
00:41:07मेरे कांदे पे तेरा सर होता
00:41:10शायद ही कोई महफिल
00:41:11मैं जितने भी colleges में जाता हूँ
00:41:14बात करो तो पहली गजल जो बच्चे बोलते हैं
00:41:17वो काश हैसा
00:41:18तो काश हैसा कोई मनजर होता
00:41:21वो अलबम अपने आप में एतिहासिक हुआ
00:41:23हाजिर के बाद
00:41:24there is a gap
00:41:26बट उसने एक नई विधा, एक नए रूप
00:41:28एक गजल की नई sound को जन दिया
00:41:31ये इसके इतने रील्स बने हैं
00:41:35और यूब जो नए बच्चे जो गा रहे हैं
00:41:39तो वो उसको एक modern way से भी interpret करते हैं
00:41:44गिटार लेके गाते हैं
00:41:45मगर वो संगीत जो है
00:41:49वो जो cutting जो है, जो lyrics है
00:41:51वो सामियन के पास पहुंचता है
00:41:54काश ऐसा कोई मनजर होता
00:42:06मेरे कांधे पे तेरा सर होता
00:42:23मेरे कांधे पे तेरा सर होता
00:42:39जमा करता जो मैं आये हूँ वे संग
00:42:53जमा करता जो मैं आये हुए संग
00:43:12सर छुपाने के लिए घर होता
00:43:19सर छुपाने के लिए घर होता
00:43:26मेरे कांधे पे तेरा सर होता
00:43:33कश
00:43:35कश
00:43:37जब आप से मैंने कहा श्वेता जी कि इस एलबम ने हिस्ट्री क्रिएट करी तो एक नई गजल का नया नाम भी पैदा हुआ
00:43:47जिसको कि हम लोग उर्दू ब्लूज कहते हैं उर्दू ब्लूज और जिसमें जैज और फॉरन मुजिक जो भी है पाशात संगीत उसको कैसे वोवन किया इनोंने तो एक गजल की मैं बहुत ही मतलब दिल से फर्माईश करना चाहता हूँ शायद ही कुछ दिन दूचारी दि
00:44:17एक लाइफ कंसर्ट में आपकी रिकॉर्डिंग है ये आईने से अकेले में गुफ्तगू क्या है जो मैं नहीं हूँ तो फिर तेरे रूबरू क्या है तो इसमें हम रिकॉर्डिंग कर रहे थे उस दौरान कुछ ऐसे नोट्स ध्यान में आएं तो कुछ लोग पूछते हैं
00:44:47है करके पाईघर थे उसे ऑने लाइप देडू फिर ने चे से अगाईगिको कर रहे चे सब्सक्राइए सिसे अगरु थेति सती तर्फकी पकरोरी थे?
00:45:17ब्लू स्केट है
00:45:47ये आहिने से अकेले में गुफ्तगू क्या है
00:45:58ये आहिने से अकेले में गुफ्तगू क्या है
00:46:10जो मैं नहीं हूँ तो फिर तेरे रुबरू क्या है
00:46:22ये आहिने से अकेले में गुफ्तगू क्या है
00:46:33जो मैं नहीं हूँ तो फिर तेरे रुबरू क्या है
00:46:45ये आहिने से
00:46:49इसी उम्मीद पेकाटी है
00:47:05जिन्दगी मैंने
00:47:10इसी उम्मीद पेकाटी है
00:47:17जिन्दगी मैंने
00:47:21वो काश पूछते
00:47:25मुझे से के आरजू क्या है
00:47:36वो काश पूछते
00:47:40मुझे से के आरजू क्या है
00:47:48जो मैं नहीं हूँ तो फिर तेरी रुबरू क्या है
00:48:00एक तरफ फिल्में चल रही है
00:48:13रोजा हो गई ताल बॉम्मे ऐसी फिल्में चल रही है
00:48:17दूसरी तरफ शुद्ध गजल गाई की
00:48:20क्या मतलब जब हम गजल ब्लूस सुन चुके हो
00:48:24उसके बाद मुझे पता नहीं है पूछना में नहीं चाहिए
00:48:27इसके बाद
00:48:29देखिए ऐसा है कि
00:48:31जब इनके काम को शोद कर रहे थे
00:48:34और हम तो पूरी लाइफ साथी साथ चल रहे थे
00:48:37ठकते नहीं है
00:48:39और रोज इनको नया कुछ करना है
00:48:42ये बहुत बड़ी इनकी खासियत है
00:48:44परिशानी भी है
00:48:46और घर के लोग परिशान है
00:48:50अच्छा तो उसमें क्या है कि
00:48:53मतलब ऐसा क्यों घर के लोग क्यों परिशान है
00:48:56ने ने मतलब एक
00:48:59जो बड़ा सा बच्चा है ना गर में
00:49:01उसको लेके परिशान
00:49:03पताने कब क्या करेगा
00:49:06और ये और भी बात है कि
00:49:09मेरे अपने अपने स्टूडियो है
00:49:11तो पता चला जाता हूं
00:49:14गंटो बिता देता हूं
00:49:15पुरा दिन बिता देता हूं उससादू
00:49:17और एक घशल आलबम
00:49:20रेकरड करने के लिए
00:49:21मुझे कम से कम
00:49:23तीन साल सो लगते है
00:49:24आठ घशले तीन साल
00:49:26तो करते हैं फिर सोछता हं
00:49:28मतलब
00:49:31cancel कर देता हूं पिर दूसरे एक दून
00:49:34बनाता हूं मैं, तो इस तरीके से
00:49:36तो हर एक
00:49:38घजल आलबम जो है न, it's a big
00:49:40experience for me
00:49:42और उस वक्त में
00:49:44जो मेरा characteristics है
00:49:46या जिसके बारे में मैं
00:49:48उस stage, life का
00:49:52stage जो है
00:49:53वही mood
00:49:56उस घजल आलबम में आपको
00:49:58दिखेगा, मुझे दिखता है
00:50:00obviously, you know
00:50:01you say no, you live
00:50:06your life and then when you sing
00:50:08it comes out, that's very important
00:50:10अच्छा ये सफर
00:50:12ऐसा नहीं है कि वो हिंदुस्तान
00:50:14तंक सी में थे, आप जानती है
00:50:15घजल तो पुरी दुनिया में सुनी जाती है
00:50:17मगर एक ऐसा
00:50:20आपने काम किया, जैसे
00:50:21पहला इल्बम और रिकॉर्ड किया, रिकॉर्ड बना
00:50:23अपने आप में, हाजिर में
00:50:25जाकिर साहब ने साथ दिया
00:50:27बहुत बड़े बड़े मुजिशन के साथ आपने
00:50:29अपने अपने गजल इल्बम्स को दिया
00:50:31उसमें रईस खान साथ है पाकिस्तान से
00:50:33सितार वादक, मदमरून साहब के लिए
00:50:35सारे गाने किये, तो ये एक
00:50:53वहां के संगीत को समझ कर
00:50:55उनकी रिक्वार्मेंट को समझ कर
00:50:57वहां रहे कर उस एल्बम को
00:50:59रिकार्ड किया, उसका नाम था
00:51:01लाहौर के रंग, हरी के संग
00:51:03लाहौर के रंग, हरी के संग
00:51:06और उसमें, सर
00:51:07मैं इससे प� une daresche, माइक रख दूँ
00:51:10वो ये है कि
00:51:11गजल के साथ में जितने भी और
00:51:14फॉर्मैट्स हैं, है ना
00:51:16उप्षास्त्री संगीत के
00:51:17वो भी आपने आजमाने
00:51:20शुरू किये, उनको गजल के साथ
00:51:22भी इंकॉर्परेट करने की कोशिश करी
00:51:24उसमें से एक वो जो आपका
00:51:26बंदिश है वहाँ गाई आपने
00:51:27मुहे अपने ही रंग में, आप तो रंगी लेते हैं
00:51:30हम सब को अपने रंग में, मगर आप
00:51:31मुहे अपने ही रंग पर ज़रा साथ बताईए
00:51:33यह जो
00:51:34आलबम जो बनी
00:51:37लाहोर के रंग हरी के संग
00:51:39तो मेरे बाई, बड़े बाई हैं
00:51:41इजट मजीद, तो उनوںने
00:51:43यह क्यूरेट किया और सारे वहां के लाहुर और कराची के जो मुजिशिशन्स हैं उनके साथ मेंने रिकॉर्ड किया
00:51:52and is an experience उनके जो compositions है नजर साहब उस्ताद नजर साहब उन्होंने किया
00:51:58नजर साहब के एक राग दरबारी में एक composition है
00:52:07राग दरबारी उसका चलन जो है एक हाथी का चलन है
00:52:13पड़ा सा हाथी आपके सामने आ रहा है
00:52:18तो इसमें देखिये आप वही चलन उन्होंने किया है
00:52:22Western Music के साथ integration अभी आपने सुना
00:52:25तो एक बहुत बहुयायामी विक्तितों आप लेके चले
00:52:29शायरों को हमेशा हैतराम किया
00:52:31हम ताहिर फराज साहब को सलाम करते है आज इसमंच से
00:52:33क्योंकि अपने उत्तर पुदेश के और पूरे देश के वह ऐसी शांदार शक्सियत हुए
00:52:38और आप से उनका बहुत नजदीक का नाता था
00:52:41क्योंकि रामपुर सहिस्वान संगीत घराने से आप जुड़े हुए
00:52:44मेरे तीन गुरू है
00:52:46मेरे अमी अलमे लुमनी जो करनाटिक म्यूजिक उनसे सीखा मैंने
00:52:52और उसके बाद उस्ताद गुलमस वकां साब से
00:52:55रामपुर सहिस्वान घराने के उस्ताद है
00:52:57तो उनसे मैंने ख्याल म्यूजिक सीखा
00:53:01ठेट ख्याल
00:53:02और उसके बाद मेधी साब को मैंने 75 में सुना
00:53:07हमारा बस चलिए तो हम एक-एक साल का
00:53:10और एक-एक कृति जो है एक-एक रचना है उसकी बात करें
00:53:13लेकिन समय चुकि तेजी से बढ़ रहा है
00:53:15मुझे लगता है कि अब वो समय आ चुका है
00:53:17जब हम वो पुस्तक सब के सामने रखें
00:53:20बहुत देर से आंधियों से बचा कर इसने भी बच्चे ने भी रखा है
00:53:31तो उसको भी
00:53:32थैंक्यू नहीं इसमें शर्वाने की बात नहीं है
00:53:34इसाहित की सेवा है
00:53:45उस्ताद गजल हरी हरन
00:54:06आनन ककड जी ने इसे लिखा है
00:54:09और ये किताब यहां पर है हमारे साथ
00:54:11हरी हरन जी अगर आखिर में
00:54:14ये बताना चाहें
00:54:15कि इस किताब में
00:54:17क्योंकि पूरे जीवन का एक
00:54:19निचोड होता है
00:54:20वो आपका इसके भीतर है
00:54:23एक तरह से आत्मा के छोटा सा हिस्सा है
00:54:25मुझे
00:54:29ये किताब देखकर
00:54:31हैरान की मैसुस होतی है
00:54:34क्योंकि
00:54:34मैं एक
00:54:37ये चो ठोटा सा परिवार
00:54:40मुजिक से जुड़ा हुआ परिवार
00:54:43सौथ इंडिया से हूँ
00:54:45और इस पक ये जो किताब है
00:54:49ये मेरे लिए बहुत किमती है
00:54:51it's a big testimony of my life
00:54:54और साहित्याज तक के साथ
00:55:11इतने सारे लोग इतनी संख्या में जुड़ते हैं
00:55:13मतलब साहित्य का भविष्य भी बहुत सुने रहा है
00:55:15ये ये पुस्तक है अब बाजार में है अब ओर्डर कर सकते हैं सब
00:55:19सभी दोस्तों से गुजारिश है कि अभी इस प्रोग्राम के बाद
00:55:25ये किताब यहां मौझूद है
00:55:27आप उसको ले सकते हैं
00:55:29हरी भाई खासतोर से आपके लिए वहां बैठेंगे
00:55:32और आप उनके हस्ताक्षर और फोटोग्राफ लेके जाएंगे
00:55:35ये एक यूनिक एक्सपिरियंस होगा आपके लिए
00:55:37आपके चाहने वालों के लिए
00:55:39और ध्यान रखिएगा दोस्तों
00:55:40ये किताब एक सेतु का काम करेगी
00:55:43जो आपको गजलों के साथ
00:55:45हरियरन साहब की उस क्राफ्ट वर्ग से जोड़ेगी
00:55:49जिसका एहतराम और जिसका अक्नॉलेजमेंट
00:55:52जिसका नमन बहुत जरूरी है
00:55:55ऐसे कलाकार सदियों में पैदा होते हैं
00:55:58आप हमारे राश्ट की धरोहर हैं
00:56:00और गजल की पदाका को लेकर चलने वाले
00:56:04सांस्कृतिक राश्टूत
00:56:05थैंक यू
00:56:06अब आपके सामने इस पचास हरे राश्ट साहब जिंदाबाद
00:56:21तो आज आपके लिए एक और तोफा हरे राश्ट साहब लेकर यहां हाजिर हुए हैं
00:56:28अपने पचास वर्श की गजलगाईकी को एक नया गिफ्ट देने के लिए
00:56:33उपहार देने के लिए अपने श्रोताओं को
00:56:35एक गजल एल्बम आपके सामने
00:56:37रिवील हो रहा है जो चंद मिनट में
00:56:39अभी प्ले भी होगा इस स्क्रीन पर
00:56:41पहले आप से गुदारिश है कि आप इसको
00:56:43अन्वील करें आप आईए आप
00:56:45एल्बम का नाम है
00:56:49जान मेरी
00:56:51सुफी स्कोर से यह आपको देखने को
00:56:53मिलेगा अरी भाई
00:56:55और यह वर्चौल
00:56:59अवेलिबल होगा आप इसको डाउनलोड करके
00:57:01सुन भी सकते हैं इस
00:57:03एल्बम में पांच गजलों का
00:57:05संकलन है जिसको बहुत
00:57:07दिनों बाद यह संकलन आ रहा है
00:57:08फरत शहजाज साहब की इसमें गजले है
00:57:11सारे फरत भाई के गजले है
00:57:16इसे पहले हमने बहुत साथ में काम किया है
00:57:19मगर यह पहली बार हम एक आल्बम में
00:57:22दोनों शामिल है
00:57:23लहू तुम सोच से
00:57:27बहता तो होगा
00:57:31तुम्हे भी मेरा दुख
00:57:35रहता तो होगा
00:57:39लहू तुम सोच से
00:57:43बहता तो होगा
00:57:46तो यह पकड में आने के लिए बहुत दिन हुआ
00:57:50तुम्हारा हूँ
00:57:54पा तुम्हारा नहीं हूँ
00:57:58तुम्हारा हूँ
00:58:00पा तुम्हारा नहीं हूँ
00:58:04तुम्हारा दिल ये दुख सहता तो होगा
00:58:11तुम्हारा दिल ये दुख सहता तो होगा
00:58:19तुम्हें भी मेरा दुख रहता तो होगा
00:58:27लहू तुम सूच से बेहता तो होगा
00:58:35ये च्छन आज एतिहासिक हैं
00:58:43और हरियरन साहब के इस स्वर्णिम सफर की
00:58:45जब एंट्री साहित्य में हो रही है
00:58:48तो आप किताब के रूप में अब हरियरन साहब को सुनेंगे
00:58:51ना सिर्फ पढ़ेंगे बलकि सुनेंगे
00:58:52आप सबसे एक गुदारिश है कि लखनों की शान को बरकरार रखते हुए
00:58:57हम इस कलाकार को एक स्टेंडिंग ओविशन दें
00:59:00और आपको रिटर्न गिफ्ट मिलने वाला है
00:59:02तु ही रहे तु ही रहे
00:59:19तेरे बिनाम कैसे जियूं
00:59:24आजा रे आजा रे यूही तड़ पाना तु मुझे को
00:59:33जान रे जान रे आजा दिल की जमीन पे तु
00:59:44चाहत है अगर आके मुझे से मिल जातो
00:59:53या फिर ऐसा कर दरती से मिला दे मुझे को
01:00:04जोर से
01:00:12आजा रे यूही तड़ पाना तु मुझे को
01:00:23शुक्रिया अब आप सब आ जाईए बुक स्टॉल पर अपनी प्रती अपने हाथ में लीजे और
01:00:32हरियरन साब से अस्ताक्षा लीजे थैंक यू बरे माच थैंक यू सो मच बहुत धनिवाद
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