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पुराने और नए लखनऊ का मिजाज, हिमांशु बाजपेयी ने शायराना अंदाज में किया बयां

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00:00हिवानशु जी बहुत स्वागत है आपका आपका अपना लखनौ और लखनौ में शायरी के बात नो ऐसे कैसे हो सकता
00:06है जी बिलकुल बहुत शुक्रिया आपका मैं बुलाने के लिए इस सेशन का नाम ही है शायराना लखनौ जी शुरुआत
00:13आपके अपनी किसी फेवरेट ची
00:18देखे क्या है कि शायरान लखनौ शेशन का नाम है और लखनौ की तो फिजा ऐसी है कि यहां कोई
00:26भी आए तो शायरी उसके अंदर आही जाती है और आए नाए मेरे जैसे लोगों को समझ भी आने लगती
00:34है यहां आने के बार नहीं बिलकुल बिलकुल यह लखनौ की फिजा
00:59तो यहां हम बैठे हैं यह शाम हो रही है और लखनौ की शाम बहुत मशूर है
01:10लखनौ और शायरी की जब बात होती है तो सबसे पहले तो हमें अपने गुरू योगेश परवीन का कता याद
01:15आता है बहुत मशूरे जो लखनौ वाले हैं वो उन्होंने सुना भी है उसको तो शुरुआत तो हमेशा मुशी से
01:21करते हैं कि लखनौ है तो महस गुंबदो मीनार
01:25नहीं सिर्फ एक शहर महीं कूचाओ बाजार नहीं इसके दामन में मुहबत के फूल खिलते हैं
01:32इसके गलियों में फरिश्टों के पते मिलते हैं Wow टालियां हो जाये जोरडार टालियां हो जाये
01:39तो सबसे पहली बात तो यहीं से हमें आद आती है जी आप सुनाते जाएए जो आपको अपना फेवरिट है
01:46जो आपको सुनाने का बन है अच्छा अच्छा क्योंकि कई बार कितनी सारी चीजें ऐसी होती है जो बहुत डिमांड
01:52में रहती है लेकिन शायर की लेकर की कुछ अप
02:09काम वो सारी कोशिश लखनू से जो मेरा इस्ख है जो लखनू से मेरी महबबत है सिर्फ उसका इजहार है
02:17हम कुम्तिन अगर में वैठे यहां यह सहित याज तक हो रहा है है तो जब यह कहते हैं कि
02:27लखनू सिर्फ एक शहर नहीं बलके एक तहजीब का भी नाम है तो बस इस �
02:32को ध्यान में रखिये और फिर हमने एक खता कहा था तो वह यहां पर सुनाना जरूरी है कि लखनौ
02:41जो समझना है जरा पास आई ए इस काम के लिए बतौर खास आई ए गोंती नगर में लखनौ मिलता
02:50नहीं हुजूर अमीनाबाद चौक या नखास आई ए वाह वाह वाह तो दे
03:01बैठे हैं वह यह बात समझते हैं कि शहर सिर्फ शहर नहीं होता शहर अपने आप में एक तहजीब भी
03:09होता है बिल्कुल इसलिए अमने वह बात जो कही थी कि लखनवी वह नहीं होता जो लखनौ में रहता है
03:18लखनवी वह नहीं होता जो लखनौ में रहता है लखनवी वह �
03:30निस ने बहुत इंसपार किया ने मेरे सबसे फेरिट तो योगेश प्रवीन जी थे जिनके खते से हमने शुरुआत की
03:37तो क्या है कि उनका यह जो खता है जो हमने शुरुआत में सुनाया इसके बारे में ऐसा है कि
03:43यहां लखनौ में बिल्कुल आम से आम इंसान भी इस खते को
03:47अपने दिल में रखता है और बहुत बड़ा आदमी जिसे हम दुनियावी पैमाने बहुत बड़ा समझते हैं वो भी इस
03:53खते को अपने सीने से लगाए रखता है तो जब हम लिखने पढ़ने लगे थोड़ा तो बस एक ही अर्मान
04:01रहा दिल में और जो आज तक है कि कुछ ऐस
04:03लिख जाएं कि उस लिखे हुए को ऐसी मुहबत मिल जाए कि जैसे योगेश जी की इन लाइंस को मिली
04:10थी क्योंकि मुटा रहा हूं एक बार हम योगेश जी के पास गए तो वो थोड़ा सा अफसुर्दा थे बैठे
04:18हुए थे तो हमने उसे पूछा कि क्या हुआ तो उन्हो
04:33ना हम गए हैं वहां कोई ना कोई ऐसे मिल गया है कि उसने अपनों शहर का नाम जोड़ दिया
04:37है लखनों का नाम अटा के और फिर ये खता वैसे का वैसा चल रहा है तो ये बदायू में
04:41बदायू है तो महस्तों मिनार नहीं और सीतापूर में सीतापूर है तो महस्तों मिना
05:00तो यहाने वो रचना कितनी बड़ी है तो एक कोशिश ये रही एक अर्मान ये रहा एक हस्रत ये रही
05:06एक आर्जु ये रही कुछ ऐसा लिख जाएं कि इस तरहें का प्यार मिले तो कोशिश अब तक जारी है
05:12और उस कोशिश में बहुत सारी चीजें लिख दी जाती हैं तो क�
05:29मैं देखती हूं कि बहुत सारे चाहने वाले बहुत सारे लोग जो बहुत तारीफ में करते हैं शुरुआत में क्योंकि
05:36यह होसला आफजाई के लिए इतने बड़ी संख्या में लोग नहीं होते हैं तब भी मोहबत उतनी बनी रहती है
05:42कंसिस्टेंसी इज़की बिल्कुल मतल�
05:46कि दोनिया में बहुत सारे लोग हैं तो उसमें हर तरह के लोग हैं आपको कोशिष करकर उन लोगों के
05:52आसपास रहना चाहिए जो आपको तोड़ा सा कदर करते हैं आपको अद्माइर करें अप्रिशें तो मेरे साथ भी ऐह बहुत
06:02सारे ऐसे लोग मिले जीवन में कि जिनों
06:05कि शुपोर्ट बहुत प्यार किया तो यह हम है ना वेसा जो एक और उड़ार घ्टे हम तो सिर्फ वो
06:10शोरूम है जो आपको तेख रहा उसमें अख्माल लगा हुआ है लेकिन हमारा गो डाउन क्या है तो हमारा गोड़ा
06:17हम जो है वो योगेश प्रवीन है वो रोशन तखी है
06:20वो अम्रतलाल लागर हैं और इन सारे लोगों से कुछ चीजें हम में आई हैं और हम कोशिश करते हैं
06:28कि वो चीजें हम शेयर कर सके अब इसको हम शायरी में कहते हैं तो क्या है कि लखनौ बहुत
06:36हम जब बड़े हो रहे थे हम राजा बजार के रहने वाले पुराने शहर में त
06:45था हम लोग समझते ते गोंती नगर एक जगह है बहुत दूर पता नहीं कहां अब एक लखनौ है जो
06:52बहुत आगे निकल रहा है बहुत बढ़ गया तो क्या है कि जाने आलम की कोई निशानी नहीं जाने आलम
07:03वाजी दली शाह जाने आलम की कोई निशानी नहीं हजरते मीर क
07:09खुश्बयानी नहीं
07:11लखनओ अब वहां तक है
07:13फैला जहां
07:15लखनओ की कोई भी निशानी नहीं
07:18वाह वाह
07:19तो ये जाने आलम की कोई
07:21कहानी नहीं क्योंकि हम जिस महौल
07:23में बढ़े हुए उसमें बहुत किस्से थे
07:25वाजद अली शाह के पुराने लखनओ के
07:28तो जाने आलम की कोई
07:30कहानी नहीं हज़रते मीर की
07:32खुशबयानी नहीं लखनओ अब वहां तक है
07:34पहला जहां लखनओ की कोई भी निशानी
07:37नहीं
07:37तो ये शायरी में
07:40हमने कहीं लिखा कि
07:41जो वाजद अली शाह पे हमारी दास्तान है
07:43उसकी शुरुआत हम यू करते हैं कि
07:46लखनओ कौन है
07:48तो इस सवाल के बहुत जवाब हो सकते है
07:50लेकिन एक जवाब यू दिया जाता है
07:52कि लखनओ कौन है
07:54लखनओ वो है
07:55जिसके सीने में
07:57वाजद अली शाह का गम है
08:01क्यों है
08:02क्योंकि ये शहर कहा गया
08:03नजाकत का शहर है
08:06नजाकत नफासत का शहर है
08:08तहजीब का शहर है
08:09अदब का शहर है
08:10तो वो जो लखनओ था
08:12उसी बाश्चा का ये खौल था
08:15कि इनसान को बात
08:18इतनी नर्मी से करनी चाहिए
08:20जैसे सुबह दम
08:22फूलों पर
08:23शबनम गिरती है
08:26वाव
08:26तो इसलिए हम कहते हैं कि
08:29लखनों को समझने के लिए
08:31आपको
08:32थोड़ा सा उस पुराने लखनों को
08:34समझना पड़ेगा
08:35यह से एक और आपको एक नजम सुनाते हैं
08:38उसमें भी एक बात है
08:38यह बहुत सही जगा है और बहुत सही लोग सुन रहे हैं
08:41तो अगर इस नजम में जो बात है वो पहुँच जाए तो बताईएगा
08:47वो हमसे बहुत लोग कहते हैं ना मैं यार ये तुम लखनओ लखनओ करते हो इससे क्या हासिल होता है
08:51क्यों करते हो वो लखनओ तो कहीं है नहीं जिसके तुम किस्से सुनाते हो
08:55तो फिर ये नजम आई
08:58कि पूछा किसी ने आज फिर
09:00ये जो करते हो लखनौ का जाब
09:03हर वक्त पहले आप पहले आप
09:06ये तुम जैसों का फकत शोशा है
09:09अदब कुछ नहीं है धोका है
09:12हमने कहा लखनौ को बरबात करने में
09:15इस पे जुल्म बेदात करने में
09:17जो बड़ी भूमिका निवाते हैं
09:19वही कहते हैं लखनौ में कुछ भी नहीं
09:21सिर्फ बाते हैं
09:23असलों में ये जो बेखबर रेला
09:26रोज लखनौ पे चड़ता आता है
09:28असलों में ये जो बेखबर रेला
09:31रोज लखनौ पे चड़ता आता है
09:33जाने किस किस जगा से लुट पिट कर
09:36इसकी जानी भी बढ़ता आता है
09:38लखनओ जो हसी खयाल सा था
09:41इसी रेले में खोकर रह गया है
09:44सच तो ये है कि अब यही रेला शहर लखनओ होकर रह गया है
09:55ये जो सब लखनओ में रहते हैं
09:58और जो रोज रहने आते हैं
10:01थोड़ा लखनौ भी इन में रह जाए इसलिए हम कहानिया सुनाते हैं
10:06वाँ नाइस और अपने इशारा भी करी दिया है
10:10एमाशी जी आप शायरी की बात करें तो मौबबत की बात नहों प्रेम की बात नहों
10:17और फिर दिल तूटने की बातना एसा हो नहीं सकता है जीनिक से कर लेते हैं थिल तूटने की बात
10:23करेंगे
10:23क्था घ्रिचन प्रेम तो मजास का शहर है हाला कि मजास का शहर लगशार अजए तो यए होंगे और और
10:31वहां आट
10:32जाएंगे अगर हम यह कहेंगे कि मजाज लखनवी हैं तो हम यह कह रहे हैं कि मजाज रुदॉल्वी
10:36हैं लेकिन मजाज लखनव को बहुत प्यार करते थे तो चुकि यह मजाज का शहर है और आपने प्रेम की
10:42बात कही तो मजाज की
10:45नजर दिल उसके कुछ शेर हम सुना देते हैं कि अपने दिल को दोनों आलम से उठा सकता हूँ मैं
10:53क्या समझती हो कि तुम को भी बुला सकता हूँ मैं दिल में तुम पैदा करो पहले मेरी सी जुरते
11:01और फिर देखो कि तुम को क्या बना सकता हूँ मैं दफन कर सकता हूँ सीन
11:15उदंड मैं बहुत सरकश हूं लेकिन एक तुम्हारे वास्ते दिल बिछा सकता हूं मैं पलकें बिछा सकता हूं मैं तुम
11:23अगर रूठो तो एक तुमको मनाने के लिए गीत गा सकता हूं मैं आसू बहा सकता हूं मैं तुम के
11:30बन सकती हो हर महफिल में फिर दौसे नजर तुम क
11:44तो ये लखनों का जो एक महौल है उसमें बहुत सारी शायरी होती है बहुत सारी चीजें होती है लेकिन
11:51लखनों पर जो शायरी हुई है वो खास तोर पर हम उसको बार बार याद करते रहते हैं उसको दोराद
11:59जैसे योगेश जी जिन से हमने बात की शुरुआत की उनका एक ख
12:13किताब है तू यह सच है कि जिन्दा दिली की कोई किताब है तू अदब का इल्म होनर का हंसी
12:22शबाब है तू सरे चमन जिसका जलवा है वो गुलाब है तू लखनव आज भी दुनिया में लाजवाब है तू
12:31लाजवाब
12:33तो ये लखनों के बारे में है और क्या है तो पिछले दिनों क्या हुआ कि एक बहुत सारे लोग
12:43जो लखनों आते हैं खासतोर पर जो ऐसे लिटफेस्ट और ऐसे साहित ते महुत सो लखनों में होते हैं तो
12:48बहुत सारे हमारे दोस्त बाहर से आते हैं और फिर बहुत सारे लो�
12:55पर्फामी दोस्त नहीं है यानिर tertent को लखनौ की सेर पर जाना होता है तो लगनौस की कि दराश करते
13:02हैं यह
13:03तो एक नजम ऐसई कहिए कि जिसमें नजम किया हो एक पूरा एक रूट हो ज जिस नजम की रहनौस
13:11पराला को है अगर इस
13:25नजम कही वो मैं आपको सुना देता हूँ देखे भाई जो लखनौ वाले हैं और जो पहुंच जाएं वो बताते
13:34रहें कि वो पहुंच रहे हैं
13:38कि लखनौ के जायकों की अगर बात आएगी एक कहकशा है नामों की जो साथ आएगी
13:45शोहरत है आस्मान पे टुंडे कबाब की मम्दू की शिकंजी में मस्ती शराब की हैं सब के मन पसंद पसंदे
13:54मुबीन के
13:55बर्मा वो बेकरी है के खाजाओ छीन के बिर्यानी में इद्रीस ने जोहर है दिखाया मुन्ना के समोसों में बड़ा
14:04लुथ है आया
14:05घुटबा के साथ किस्से भी है नौशी जान में पाए रहीम के हैं यहां सब के ध्यान में पूरी हो
14:13नेतरामी बताशे रवी के हो क्या खुब यार फिर तो मजे जिन्दगी के हो लड़ू हो रिट्स का या हो
14:21थापा का चाइनीज ऐसा है कौन शहर में जिसको नहीं अजीज
14:25गर्मी में हमने जब कभी राहत तलाश की कश्मीर ले गई हमें कुलफी प्रकाश की माशू के लबों के ही
14:34जैसी कहें जिसे बर्फी तो है त्रिवेदी की बर्फी कहें जिसे किस-किस का नाम लूम है हजारों का नाम
14:47है किस-किस का नाम लूम है हजारों का नाम है लखनों के
14:52जायकों का सफर ना तमाम हैं निलोटपल और दिवप्रकाश दूबेद दिवप्रकाश तो खैर यहीं के हैं और निलोटपल भाई से
15:02इतनी मुलाखात हमारी रहती अलग अलग सेस्ट में कि वो एक ऐसा रिष्टा बन गया है कि वो बिलकुल एक
15:09ही महफिल के सारे लोग है तो �
15:13यहीं क्या किया है चुकि यह लखनवी तो नहीं है लेकिन इतना लिहाज इनमें के चुकि वहीं पर हम बैठे
15:19हुए थे जब इनका सशन चल रहा था तो उन्हों नहीं कि जहां निलोटपल हो तो निलोटपल के बाद जो
15:29है किसी महफिल में आना तो बड़ा चुनोटी अगा
15:43गई इन साथी सथ मुझे कभी ऐसाप के साथ होता है कि आफ भूत खराब मूड में हूट और लोग
15:48आज कह़ा है कि कुई ची सी मोपबत की अजय कसू जय को अगए जैर सुना इचे और
16:13हम सब प्रोफेशनल लोग जितने हैं दिव हैं हम हम है तो यह फुल टाइमर्स है यानि जिन जिनका जरियाए
16:20माश्य वो लिट्रेचर है या परफॉरमेंस है वो सब इस बात की गहराई को समझते हैं लेकिन फिर लगता है
16:26कि लिखने वाले को
16:32ओडियंस जिसको कहते ना खदरदान खदरशनास वो तो चाहिए देखिए तो हमें लगता है कि यार कोई अगर खुलूस से
16:41कुछ कह रहा है तो फिर उसके बात मालने भी चाहिए बिल्कुल बिल्कुल सुनाइए फिर दिल तूटने पकर सुनाइए अब
16:51इस हाथ से को बहुत �
16:58दूटने से थोड़ी सी तकलीफ तो हुई तो तो तोड़ी ही हुई यह लखनू का हास अंदाज है कि यहां
17:09बहुत बड़ी भी कोई चीज होती है तो उसे लखनवी अंदाज में गहते हैं एक जरह वो किसी का बहुत
17:15मशूर शायर यहीं कि उनका एक शेर है देखिए लखन�
17:31आपके पता चल गया कि गुम्ते नगर में बैठे हैं लखनू में किसी शायर ने शेर कहा कि आपके पाउं
17:40के नीचे दिल है आपके पाउं के नीचे दिल है एक जरह आपको
17:48जहमत होगी तो यह है लखनू इसलिए हमने का कि एक होता है दुकान का इत्र जो सारे जहान में
17:57मिलता है और एक होता है जुबान का इत्र जो सिर्फ लखनू में मिलता है तो दिल तूटने पड़ थे
18:04आप देखिए मैं जिस हाथसे से दामन बचाना चाहता हूं घेर घेर के
18:11वहीं लाया जा रहा हूं लेकिन मैं भी चक्मा देना जानता हूं तो क्या है कि यहां लखनौ में देगी
18:20यह भी लखनौ क्या है यह हम शायरी में क्यों लखनौ लखनौ था यहां शेर कहा गया कि ने आपने
18:26वो शेर अधूरा चोड़ दिया शुरुआत तो की थी आपने दिल
18:33तूटने से थोड़ी सी तकलीफ तो हुई लेकिन तमाम उम्र को आराम हो गया
18:46तो वो क्या है शायर जो शेर हम सुनाना चाह रहे थे लगनों की बात की यहां किसी शायर में
18:51शेर कहा कि
18:57क्या है वो दोश कहते है कंदे को और बार बार एक बार होता है वो जो इस समय इस्तमाल
19:06में लाया जाता है शाम को
19:08उस बार की बात नहीं हो रही है बार यानि भार तो दोशे नाजुक पर दुपटा फिर न ठहरा बार
19:20से
19:23शायर लगनों की नजाकत का बयान करते हुए फर्मा रहा है कि उसका जो महभूब है को किस ख़दर नाजुक
19:32है
19:32कि दोशे नाजुक पर दुपटा फिर न ठहरा बार से कल जो रंगने में जरा गहरा गुलाबी हो गया
19:43तो ये रंग का वजन सिर्फ लखनों में है तो देखिए नाजुकी तो ये इस तरहां की गुफटगू का शहर
19:51है
19:52कि जस पर हम लोग निसार रहते हैं और जिसके हम किस से सुनाते हैं तो ये है इस शहर
19:59का अंदाजू इसलिए हम कहते हैं
20:01कि इस शहर में एक ऐसी फिज़ा है कि कोई भी यहां आई तो थोड़ा शायराना को हो जाता है
20:09आफिजा वाके में बहुत खुबसूरत है, बहुती थंडी हवा, दिन भर बहुत धूप रही है, शाम उचुकी है, तो समापन
20:16की तरफ हम अगे बढ़ रहे हैं, आप अमारे दर्श्रकों को, और आप अपनी चाहने वालों को,
20:21क्या सुना दिया जाएं, जिस्ते आप बचने की कोशिश कर रहे थे लगाता है, अब तो मने शुना दिया, उस
20:28पर कुछ और, वावा, नहीं लगता है कि, शायर लोग एक चीज जानते हम तो खर शायर नहीं हैं, हम
20:35तो लखनु के आशिक हैं, और उस आशिकी में बहुत सारी �
20:41अच्छा बनाएं, या खराब बनाएं, लेकिन शायर तो बहरहाल इनसान को बना देती है, तो हम उस आशिकी में कुछ
20:47कह दें तो अलग बात है, आपने आज की मोहबत पे कुछ लिखा है, मोहबत तो आज की ही होती
20:55है, जब भी है, मोहबत अगर गुजर भी गई, तब भी �
20:58गुजरती है, वो ऐसे ही थोड़ी मिसरा का गया, कि जो बीद गया है, वो गुजर क्यों नहीं जाता, बिलकुल
21:08सही बात है, नहीं हम यह करते हैं, शायर लोग एक चीज़ अच्छी से जानते हैं, कि कोई भी हाथसा
21:12उन पर गुजरे, तो वो कुछ ना कर पाएं, तो उस प
21:28आपन के लिए क्या सुनाया चाहें, कौन से शायर की कोई चीज सुना दी जाएं, कुछ डिमांड है आप लोगों
21:34की कुछ चाहते हैं आपका कोई फेवरेट जो आप सुनना चाहेंगे इमानशु जी से, हाँ, देखें फैस को तो नहीं
21:45सुनाएंगे अब लखनों की बात है
21:47तो लखनों के शायर को सुनाएंगे, मजाज सुना चुके हैं, तो, जी, मजाज सुना चुके हैं, चलिए हम कुछ, वो
21:57क्या है कि, क्योंकि इश्मिश्क की बात चल लही थी, तो ये वन लाइनर्स बहुत चल जाते हैं, तो हमने
22:02कहा, लखनों का मिजाज बताने के लिए कि,
22:05ये लखनौ है
22:07या आशिक
22:09अपनी महभूबा से मिलने
22:11चॉकलेट नहीं
22:12मीठा पान लेकर जाते हैं
22:17तो ये लखनौ जो है
22:18ये एक कैफियत का नाम है
22:21एक अवस्था का नाम है
22:23एक मोहौल का नाम है
22:25एक मिजाज का नाम है
22:27शहर का नाम भी है
22:29लेकिन शहर का नाम
22:31बहुत बाद में है
22:33है ना
22:34तो हम जो कोशिश करते हैं
22:36अपने तमाम काम के जरिये
22:38वो ये कोशिश करते हैं
22:40कि शहर से
22:41शहर में रहने वाले और न रहने वाले
22:45हर शक्स का
22:46एक बराहे रास्त
22:48एक डिरिक्ट रिश्टा बन जाए
22:50बिल्कुल, सोड़दार तालिया प्लीज बजा दीजे, हमानशु जी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया है, हमानशु जी बहुत शुक्रिया आपका, लखनों
22:58के बारे में इतनी प्यारी-प्यारी बाते करने के लिए, और इतनी सुन्दा खुबसूरत शैरी सुनाने के लिए
23:03बहुत शुक्रिया आपका बहुत अच्छे बहुत मुक्तसर और बहुत ऐसे सवाल पूचे गए जिनसे बहुत कुछ कहने की बात निकल
23:10आई
23:10बहुत शुक्रिया
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