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  • 1 hour ago
फिक्शन लेखन यूथ को कितना पसंद-नापसंद? आजतक के मंच पर युवा लेखकों के साथ विमर्श

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00:00तो आप दोनों ही महमानों का बहुत स्वागत हैं, I'm sure कि बहुत सारे बार आपसे इस सवाल पूछे जाते रहे होंगे कि जो यंग्स्टर्स हैं, किस तरीके से लेखन को देखते हैं और क्या आप भी ही मानते हैं कि रुची बहुत कम हो गई है, क्योंकि कही पर ऐसा कहा जाता
00:30एक टेक लेना चाहूंगे, आप लोग क्या सोचते हैं, क्योंकि मुझे कही बार ऐसा लगता है, मैं कही सर ऐसे लोगों से मिलती हूं, जो बहुत खुशी-खुशी पढ़ते हैं, बहुत बहुत बहतरीन पढ़ते हैं, और यंग हैं, मेडिटिशन की बात करते हैं, कुछ अ
01:00नहीं है, खासकर कि युवा, अभी बगल में स्टेज नमर वन पर भोचपूरी के स्टार गायक परफॉर्म करने वाले हैं, उसके बावजूद यह यहां पर बैठके हिंदी की किताबों पर सुनने के लिए बैठे हैं, यह बताता है कि युवा अपने समय के साहित को लेके क
01:30हैं, जो लिखने के अलावा और कुछ नहीं करते हैं, मतलब हम लोग ऐसा नहीं है कि दिन अबर खटनी मरनी करने के बाद समय निकाल के एक दिन लखनों आए, कि आज हम लोग किताब पर बात करेंगे, हम लोग फूल टाइम राइटर हैं, और हम यह जानते हैं कि हिंदी में
02:00अजिए मेरी हालत जब मैं इलोटपल परडोस में होते हैं तो वैसे एक्जाम जब वायवा होता था, तो जसे मेरा नमबर था रोल नमबर 35, तो पांच-पांच के बश्में लोग जाते थे, क्लास में, मेरे बश्मेट भी यहा बैठे हैं, तो क्या होदा था जैसे वो आए
02:30इक्जाटि आज से, एक महीना पहले दिलीबुख फेर में हम दो लोग करीब करीब चार दिन ये रहे होंगे, और धाई दिन में वहा था, धाई पोने तीन दिन दिली पुस तक मिले में, और हम लोग उस धाई दिन में खाने के लिए भी नहीं जा पाए, इन फैक्ट हम लो
03:00कि एक किस्सा ऐसा कि बताता हूँ कि क्या हो रहा है किma अगि कुछ विक…स बताता हूँ कि एक वेकति हाया है कि वी जने वेट कर रहा हु हो लाएंके मने लाएं लगा
03:04आपने इगो को थोड़ा करना भी है ना क्योंकि आप किसी के लिए लाइन लगा है आप हम लोग उस दौर में हैं जहां से रीट्वीट भी जबरदस्ति नहीं करा सकते हैं आप किसी से तो मैं उनको यही बोल रहा था मैंने का आप 20 मिनिट से लगे हुआ हम लोग 13-14 साल से व
03:34कि जो लगता नहीं कि अग्या राइटर हो सकते हैं आप अवारे बीच का कोई वेक्ति हो गया हम लोग ऐसा नहीं कि बड़ा इंटलेक्शलों क ऐसे बात करें और बड़ा वो बड़ा था तो वो एक्ति आया उन्हें बोला कि अरे सर्ब मैंने का कैसे पदा शला हुआ है तो
04:04यह पदा चला कि एक सरजरी में कोई आदमी जा रहा है और हिंदी किताब कोई पढ़ने की बात कर रहा है तो उस दिन मैंने और की और वो मेरेट सेक्योल इसलिए मिलने रहे तो वो जो चीज है यह पंदरा साल पहले शाय सच नहीं था कुछ पल वाकी में बहुत दिल को च�
04:34जादा थे लेकिन अब अगर आज की डेट में उसको डेटा कोई ले तो वो रिवर्स है आप अगर देखिए अंग्रेजी में जो लेखक हम पैदा हो रहे थे जब वो आज की डेट में का है वो लोग के लिए और मैं पूरे विश्वास और यहां पे जो हम लोगे पार्ठक
05:04परीगे से कनेक्क कर पाते हैं तब चय望 वो सोशल मीडिया का दौर किताबों का दौर ओर या फिर उस से भी पुराने दौर की हम बात कर लिए जब आप किसी और की बात कह रहे होते हैं और जब डूसरे की बात कहते तो आप बहुत अच्छे से क intim कर पाते हैं आप ही तक की �
05:34समाज में प्रभाव डालने के लिहाज से नहीं साहित का प्रभाव तो समाज में हमेशा से बहुत ही महत्पुन रहा है
05:42सवाल यह है कि हमारे समय का युवा अपनी कहानियों के विसय कहां से निकालना है
05:48यह बड़ा महत्पुन है तो हम जब भी युवाव की बात करते हैं तो हमें लगता है कि युवा केवल दिल के टूटने पर ही व्यथित होता होगा
05:57लेकिन यही युवा है जो गलेशियर के टूटने पर भी सोच रहा है यही हुआ है जो समाज के टूटने पर भी सोच रहा है यही हुआ है जो परिवार के टूटने पर भी सोच रहा है यही हुआ है जो रिस्तों के टूटने पर भी सोच रहा है यही हुआ है जब देश में ल
06:27जिसके लेकर आएंगे जहां रिष्टे टूटने की बात पर महलम लगाई जाए पट्टी बांदी जाए मैं ओहर जिसकी किताब लेकर आउँगा जहां पर एक बीहड़ गाउ है उसकी राजनीती है वहां की एक दुनिया है मैं बिश्गुरू जैसी किताब लेकर आऊँगा �
06:57कि जो कवायद है हम लोग उस समय में लिख रहे हैं और हम लोग बहुत आस्तानवीत हैं अपने समय के पाठकिय परिधी को देख कर कि इसका वितान कितना विस्तृत हुआ है और आज इंटरनेट की पहुँच के कारण किताबों की रिच बढ़ी है किताबों की पहुच गा�
07:27आज अब जितना गोदान आज पढ़ा जा रहा है दिवार में खिड़की जितनी आज पढ़ी जा रही है गुनाहों की देवतार किसी समय में नहीं पढ़ी जा रही है यह है यह यह पढ़ रहा है अपने समय को और जो सजेशन्स हम देखते हैं सोशल मीडिया के बारे में क्
07:57जिसके बाद लोग किताब खरीदते हैं और पड़ते हैं, मतलब अगेन वही है कि आप चूस करिए कि आपको चाहिए क्या जीवन में, कितना जहर चाहिए, दवाई के लिए उमरने के लिए, तो कि आप, अगर मैं मजाक में निलोतपल को और अपने दोस्तों को बोलता हूँ,
08:27और दिन भर में, अगर 10-12 गंटे केवल वह रील देख ले, तो इसको इतना ग्यान प्राप्त हो जाएगा, फिनेंशल वर्ड के बारे में, लाइफ के बारे में, अमीर लोग की पांच आदतों के बारे में, और एक्सरसाइस के बारे में, और क्या खाय कि आयरुवेद से सह
08:57कि यह जो रील स्क्रॉल कर रहे हो, कि इसको आपर रोको, और जाके यह किताब है, यह पढ़ो, ताकि तुम, असल में आप देखे, पूरी जितने भी मीडियम इस दुनिया में, चाहे वो रील हो, चाहे वो ओटीटी हो, चाहे वो फिल्म हो, कोई भी चीज, जो भी स्क्रीन
09:27तो आप उस किताब में एक लाइन आपको मिलती है, जो लगता है कि किसी ने आपके लिए आज से सौ साल पहले लिखी थी, और आप वहाँ पे किताब पलटते हैं, एक पॉज लेते हैं, और जो आप जिस खिड़की के पडोस में होते हैं, उस खिड़की में बाहर ज्हांकत
09:57तब ही वो रोना पहुंचता है, तो ये बड़ा बड़ा मज़दार है ये देखना, कि जब हमें लग रहा था कि सोचल मीडिया किल कर देगा किताबों को, सबसे दादा हम लोगों को रिल पे लोगों ने डिसकवर किया है, बहुत जादा, अभी आप देगे ने यहां पे व
10:27तो मैं कुछ और बड़ा था, लेगिन चुकि आपन्दर फरवरी को उच्छा है, तो मैं बताऊंगा विश्यु गुरू, और टेंशन मतले आर, नहीं किताबे आएंगे ये तो ये तो बड़े हैं, अगर किसी भी उसमें, जैसे मुझे लगता है कि अगर हिंदी अगर यहा
10:57इसलिए नहीं, मालू मैं क्योंकि मज़ेदारियों निरोत पलने तो जिस भी वज़े से लिखी होगी, वो किताब ना, असल में, जैसे जाधा तो लोग हम लोग लाइव में फेल होते हैं, है ना, हमारा जब मैं यहीं पर IIT की ट्रिवैक में कोचिंग कर रहा था, और हमारा
11:27हमें इधर जाना है, उल्टी तरह, तो उन लोग की कहानी कोई नी का, हम लोग देखे ना, सारी कहानिया क्या है, कि कैसे एक अंडर डॉग ने क्या कर दिया, यह कर दिया, बट उन फेलियर की कहानी कौन का हैगा, वो जो राय साभ वहा गया और जिनका कभी सेलेक्शन नहीं
11:57राही मासूम रजा, उनके किताब है सीन पचत्तर, पर एक घोस्ट राइटर की गानियों आपको पढ़नी चाहिए, अगर आपको छोटी किताब से पढ़ना या शुरू करना चाहते है, और एक और चोटी किताब है, मनोर शाम जोशी की, तटा प्रोफेसर, तो वो भी बह�
12:27कई बार किसी की लाइफ को देखे, कई बार रील्स के थू भी, कि नहीं लाइफ अभी खतम नहीं हुई है, कहीं से शुरूआत हो सकती है, तो आपके पास कुछ लोग ऐसे आते हैं, जो अपनी जीवन की दुश्वारियों को बताते हैं, कि आपकी इस लाइन ने, आपकी इ
12:57हम लोग लेखन को थोड़ा बहुत वह बहुत हलके में लेने वाली बात नहीं है, भई लेखन जो है, साहित वो नियती को बदलने का मंत्र है, सिद्धी है, अवन कुंड में डाले और देवता प्रकट हुआ, तो हम लेखन को जिस तौर पे ले रहे हैं, हमारे समय के लोग �
13:27हैं, वो अपने समय का लेखन कर दे रहा है, क्योंकि उनको लगता है को मेरी कहानी है, मेरी दुनिया निकाल के लाकर रख दी है, मैं एक कोट हमेशा कहता हूँ, हम लोग जब उपषिक त्यारी करते थे, तो हमरे कमरे में बीवेका नन टंगे हुए थे, उनका कामी था कि कि
13:57तो होता क्या था, हम लोगों सोया थे कि बीवेका नन टी उठके चलने लगते थे, इस दिवाल से चले इस दिवाल तक आ गये, एक साल के पाद देखे कि बीवेका नन टी का जूता जो था चामड़ावाला उनके हाथ में था, और कोटेशन बदल गया था, अरे कब जागे �
14:27किस समय की बात है? यह बात है 2013-14 की जब UPSC के टीचर रिल्ली बनाते था, तो 2013-14 की बात है, तो उस बात जब हम गये मोटिवेशन के लिए हम पने पिता जी बोले हमको मोटिवेशन चाहिए, वो काई बेटा मोटा बेशन लेलो अब बनिया उसमें आलू काटो प्याज का�
14:57अज़ा नद मोटिवेट नहीं कर पारा, तो बिबेग बिंदरा कर देगा रहे तब हम कहे रहे यार यह हमरे बाप यह हुआ हुआ हुआ है जूता लेकर आए तब हम समझ गए तो इसब इप्रेशन डिप्रेशन सेप्रेशन इसब जो नया फैसन आया है मैं यही कह रहा हू
15:27उसको बटोर के और फिर से एक नई मूरत बनाने का माध्या भी इन्ही युआ है जिनके भीतर कुछ तूट रहा है और हम उसी तूटन के रेसे से किताब बुनते हैं और फिस उसी किताब के रेसे से एक नया आदमी बुनने की कवायद में लगे हैं तो हमारे समय का लेखन �
15:57थेला पर उसा नहीं करना है जिसा नहीं करना है ऐसा नहीं करना है और कोडे पती बना रॉमेट और चाहिए और हम्हौर या ओपर की जाने वाला कोई से जख्त हो गया तो यह लोग सलेक्शन के बाद छ्चा महिना के बाद मुखर runs कर आज़ जेक्क इह हैं कि लगेां
16:27तोच दोच्छा है कि अडरी दिन के बाद दूस्ता आप ऑ संगी को locks दोस्त बोड़ाया जाया है कि एतना दिन के सब्सक्राइब आपको लगता है कि इसके जीवन में तुरनिय में थयाए किस द्दून धर सुझ मेरा
16:52मारा सोच हो मेरा तो दाल में हल्दी ढालते है तो उजला हो जाता है इतना सफ़ेदी है उसके बाद उसके बाद इसका बॉम्चुमपन रहेगा जो तंगा हुआ है छे दबाला हिऊने लिखेगा कि शंजे भई
17:15तो यह भी दुनिया है लेकिन वही दोस्त है उन्हीं दोस्तों की कहानी है कि कैसे वह बचाते हैं टूटते वे लोगों को कि अगर सलेक्शन हो गया तो मेरा दोस्त हमसे कहता था है निलोत्पल टॉप फ्लोर पे कमरा है नीचे मत उतरना यह पॉकेट से निकाला 5000 रखो इधर
17:45क्योंकि सुरू सुरू में अपना पैसा ही देना पड़ता है नौकरी में समझ रही है आप तो पत्रकार है शुरुवात में अपना पैसा ही देना पड़ता है तो कलेजा पर चोड़ तो लगता है लेकिन दोस्त है जो बोलता है कि टीके राना टॉप फ्लोर पे नीचे हम प
18:15कर रहे हैं उनके बीच के समाज को तो लाना होगा ना यही तो मुखःदारा है इनका समाज अगर नहीं लाएंगे किताब आपर तो हम किस मुखःदारा की बाद कर रहें
18:25निलोत्पल, मेरे सवाल गदबनी होंगे, फिर मुझे बताईए कि कुछ महीने के बाद वो पैसे बढ़ते हैं, यह पूछिए जिन लोगोंने, फिर कोई व्यक्ति दे जादा ना, फिर पैसा नहीं लेदे ना, वो वहीं से अरिदर से रूट हो जाते हैं, बढ़ते हैं, नही
18:55वो कितना भी कुछ हो जाए, लेकिन जो लोग सेवा का जो मूल चेतना है, वो जितना भी थोड़ा बहुत बचा हुआ है, इन ही गाउदेहाद के ललकों में बचा हुआ है, क्योंकि वो अपने पिता को कभी किरास्तन ते लेते जरकिन लेके खाडा लाइन में देखे हैं, �
19:25जाओं को और चोटे कस्वों के बच्चों को इसलिए मैं कहता हूं कि जाओ सरकारी नोकरी की तरफ क्योंकि जो प्रसासन है उसका चेहरा मानिभी करने के लिए, उसको लोकोनमखी बनाने के लिए, लोक से लोक से बग को लाना होगा, बहुत बड़ी बात है, लोक के बीस से
19:55निर्देशन किया, दर्शकों के बीच में वो उतना फेमस नहीं हो लेकिन आपके दिल के बहुत करीबर वाकी में वो बहुत खुबसूरत है, ऐसी कुछ आपकी कोई चीज जो आपको लगता हो, कोई कविता, कोई कोई कोई बी ऐसी रचना, जो दर्शकों तक उस अंदाज
20:25तो आप चटी किताब भी आप ऐसी लिखेंगे, क्योंकि देखे क्या है, कि जो पाथक है ना, उसके हाथ में एक तलवार भी है, वो ये तलवार लेके खड़ा है कि ये पहले से अच्छा है कि पहले से खराब है, तो ये डर आपको हमेशा होता है, तो उसी सिलसिले में मैं �
20:55होता है, कि ये लगता है आप जे एक है ज़ा भी होता है, तो उसको कैसे ख्लोजर देए, तो जब इबने वतूति जब ख Sulky में अब ये प्रेशर रटाओं तो कि मैं अब ये प्रेशर हुआँ अपने दिमाग से लिख रहा है, झार किताब मेरी पहली नया वे पहली किताव
21:25किताब आई थी आको बाको नाम की, आको बाको जो यहाँ पर Eastern UP के होंगे लोग, तो वहाँ पर जब नजर उतारी जाती है, तो एक तर्म मुझे को साउंड बड़ा सही लगता था, तो मैं हमेशा है मान लेता हूं कि किसी का साउंड अगर अच्छा है, तो वो वर्ल्ड और व
21:55तो उस आको बाको में एक कहानी है, पहला पन्ना, तो मैं नॉर्मली जब कहानी लिखता हूं तो मैं बहुत एक्स्ट्रीम पे नहीं ले जाता हूं, उसमें उस कहानी की जो पहली लाइन है, वो यह है कि उन कवी और शायरों के नाम, जो कुते की मौत मरे और मरते रहेंगे,
22:25किताब बच्चा इगा पादे हैं, बच्चा में ऑच्चा आप जानते हैं, यहाँ एक नहीं स्पुल्स इंप प्राइन के लिखा है, यहindi की सिटने नहीं आपध्णिदा में जो कहानी की लिखने के लिखें लीजिए जयसे मिरसे हूं पूँचा मैं बच्चा इस शे में ब
22:55जिसको कम लोगों ने पड़ा, बहुत का लोगों.
22:57अगर आप उसकी जिस्ठ हमें हमारे दर्शों को,
22:59अगर सुना पाने में सक्षन हैं?
23:00उसमें रहा एक ऐसे वेक्ति थी,
23:02जैसे एक एक ऐसा लेखक की कहानी थी उसमें,
23:05कि जब वो कमरे में बैठके जब लिखने बैठता है तो बहुत रोता है
23:09और जब उसकी किताबे बच्चे बढ़ने तो बहुत हसते है
23:11तो वो जब रोता नहीं है तो बच्चे भी हसते नहीं है
23:14तो वो ऐसा अब ऐसा कोई करेक्टर हो सकता है नहीं हो सकता है
23:17मुझे भी नहीं था है, वहां पे बाद अलग थी, वहां पे जमीन गंदगी भी नहीं है, लेकिन उनने क्यों चपल उतारी थी, क्योंकि जब मुक्ति बोद नहीं रहे, तो उनकी लास्ट राइट में जब वह शामिल हुए, तो देखा कि बहुत कम लोग हैं, शायद, तो वह
23:47इतना बड़ा कभी चला गया, उसको रिस्पेक्ट देते हुए कि हमारे समय में आज भी ऐसे इतने बड़े लोग होंगे, हर फील्ड में, कला से लेके,
23:54कि जुनको कोई नहीं जाने का उनके लाइफटाइमे, तो ऐसे हर अन्नोन आर्टिस को ट्रिब्यूट देने के लिए, उन्होंने अपनी चपल छोड़ दी उसका लाइफलाग का भी चपल नहीं पहनी, तो यह वैसे ही है कि आप कुछ चीजें करते हैं, कुछ चीजें नहीं �
24:24कि अलगनों में, कंपनी का नाम नहीं लूँगा क्योंकि वो शादे स्पांसर भी हो यहां पर, तो फिर पता चला कि अगली वार फ्लाइट के टिकेट ही नहीं आया, तो उसमें बहुत फसा हुआ था एक समय जीवन में, और सारे लोग अगर आप ध्यान से देखिया अपने
24:54लाइफ नहीं बदल पा रहो हूँ, इतना मैंने MBA भी कर लिया, नौकरी भी लग गई, सैलरी भी सही है, लेकिन कुछ मजा नहीं आ रहा है, रात में सोनेस बहले ने नीदीन आया, क्या इसलिए इतना हमने किया था क्या, तो उस दौरान मैंने अपनी बिचाह नहीं से, मैंन
25:24बदल रहा हूँ, जसकी ठूजा कि रहा है तो मैं सुर्रा हूँ, मैं तो नौकरी कर रहा हूँ, इन लोग चोड़खका अपना काम कर ले, मुझे ना है, मुझे नौकरी कर रहा हूँ, लेकिन मुझे बाद में राइस होई है चीज की शायद वो जरूरी था उस किताब के ल
25:54कि लिखने की शुरुआत करने में बहुत हिचकिचाहट रह दिया है
26:00मैं मात्र बारा साल से लिख रहा हूं और इतने कम अब्धी में अगर मैं ज्ञान देने लगूं कि मैं तुमको शीख देने वाला हूं बालुकों
26:09तो मेरा केरियर यहीं खतम हो जाएगा है मैं यहीं बताओंगा अपने समय के लिखने वालों से सीखने सीखते रहे हैं सिखाने वाले ट्रैप में मत्हसिए ऑग्रेट अचा मैं इतनी देर से बैठा यह भी सोच रहा था मैं पहली बार इस पार्क में आया हूं इतने हाथी है �
26:39जीतने के पश्चाताप में निलोत्पार मुरनाल और दिप्रखास दूबे का पाठ करवाया है यहां कि गरूर पुरान हो नहीं सकता है तो इन्हीं दोनों को बुलाया जाए तो संजीब सार अरे यहीं बाला कट गया क्या है यहीं जाता है यहीं कट गया तो वहीं यतलग �
27:09एक बात वही है कि सिखाने के मोह से निकलना है और शीखते राना है लिखने का एक ही फर्मूला है कि लिखना होता है आप इससे नहीं बश सकते आपको कोई ये physics chemistry है नहीं कि मैं फर्मूले में बता दूं इतनी बात जरूर बताना चाहूँगा कि उपन्यास पढ़के उपन्य
27:39लें प्याज चॉपिंग काटें टेल डालें और हां हां चुला जला लें फिर गोल्डन प्राण होने तक प्याज भूने पनीर डालें मसाला त्यार करें मेलें यानि कि रेसिपी पढ़ना होगा तो जिनको भी लिखना है अगर वो यह सोच रहे हैं कि इस वार वो पुस्तक मे
28:09पॉलिटी पढ़ो आप कल्चर पढ़ो फिलोस्पी पढ़ो फॉरन पॉलिसी पढ़ो एकोनोमिक्स पढ़ो करेंट अप्यर्स पढ़ो अगर आप पढ़ोगे नहीं है सारी चीजे नॉन फिक्सन वाली तो आपको सोचने के लिए इंधन नहीं मिलेगा तो आप द्रिस दे�
28:39और बहुत ज्यादा इंफोर्मेशन का नसा चड़ जाए तो आप संस्कृति के चार अध्या एक किताब है रामधारी सिंह दिनकर जी की मैं चाहूंगा मेरी एक कामना है कि हिंदुस्तान का हर यवा उस किताब को पढ़े वह इसलिए पढ़े कि उसको पढ़ने के बाद वह
29:09कि गुरू है प्रेमचंद उनको पढ़िये और सीखिये कि क्राफ्ट क्या होता है राइटिंग का और जो कुछ बच जाएगा अगर आपका मन है कि तावीज फिर भी खरिजना है तो हमारे और दिल प्रकाश जी के वॉक्स अप में आईए फिर वहां बेचे बहुत बहुत �
29:39कि अधर आवाज में कैसे कविता सुना है हलाकि हम तो यह तो बहुत सराफत बहुत सरीफ लोगों का यह प्रोग्राम है भले लोग का भले लोग नहा के बैठे हैं सब हम लोग पसु मेला में भी जाते हैं कायरकरम करने वहां सामने मौत को कुवा चलना होता है आपको हर 10 मि
30:09यह उस बीच में हम लोग को आर्केस्टरा वाला से ज्यादर आवाज में कविता सुनाना पढ़ता है आज वही हालत है तो कि हम सोचाना कि कविता क्या सुना है सिवरात्री है और हम पुरवांचल के है हम वह सूच रहेंगी एक
30:26एक भज़ा मैं ऐसे घीत एक गाली जो है आज महादेव का साधी रात को है तो हम लोग एक गारी आपको हम सुनाते हैं जो पुरवांचल में सिव जी का साधी है अज प्रकास भईया जो है संधी मिलन के लिए ख़ड़ा है माली जी माला लेके और संजीव सर अब दोनों दु�
30:56हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम हुम ह
31:26सखी कही ऐसन यजबे बरतिया बाप रे बाप कैसन दुलहा के सुरतिया बाप रे बाप सपवे के मौरवा सपवे के माला
31:46असपवे कमर में दुलहा ने डाला अरे कैसन सखी रे तोरी किसमतिया बाप रे बाप कैसन दुलहा के सुरतिया बाप रे बाप
32:04अरार महादेव जय हो बापार्वती देह महिया जय हो
32:08बहुत शुक्रिया दोनों ही महमानों का, thank you so much, बहुत शुक्रिया, and धेर सारी शुक्रामने, हमने seriously बहुत enjoy किया, बहुत बहुत आवार आपके, बहुत वीटी अंदाज में आपने सब को entertain किया, thank you so much.
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