00:00।
00:30।
00:31।
00:32।
00:41।
00:55।
00:57।
00:59शरीर के इस्थूल इस्तर पर अश्टिधा प्रक्रति, शरीर, मन, बुद्धी, एहंकार ही इस्थूल कर्मों के उपकरण बनते हैं।
01:07उपकरण निर्जीव अथ्वा सुप्त चेतना वाले होते हैं।
01:11जैसे प्रिट्वी लक्षमी तो है, किन्तु जो कुछ इसमें पैदा होता है, सभी तो सुप्त चैतन्य पदार्थ हैं, चाहे अन हो, संपदा हो।
01:20अन से शरीर बनता है, माता के शरीर से संतान का शरीर बनता है।
01:25शरीर स्वतह कार्य नहीं कर सकता, यह मन की इच्छा और प्राणों की गती से चलाय मान नजर आता है, जैसे कार को ड्राइवर चलाता है, शरीर आकरती का नाम है, इसको एहंकृती और प्रकरती चलाते हैं, एहंकृती सूर्य से तथा प्रकरती चंद्रमा से निश्पन्न हो
01:55foreign
02:02foreign
02:07foreign
02:12foreign
02:17foreign
02:221.2.22
02:502.2.3
03:203.3
03:504.3
04:205.3
04:505.3
05:205.3
05:225.3
05:245.3
05:265.3
05:285.3
05:305.3
05:325.3
05:345.3
05:365.3
05:385.3
05:405.3
05:425.3
05:445.3
05:465.3
05:486.3
05:505.3
05:526.3
05:546.3
05:566.3
05:586.3
06:006.3
06:026.3
06:046.3
06:066.3
06:086.3
06:106.3
06:127.3
06:147.3
06:167.3
06:187.3
06:207.3
06:227.3
06:247.3
06:267.3
06:287.3
06:307.3
06:327.3
06:347.3
06:367.3
06:387.3
06:407.3
06:428.3
06:448.3
06:467.3
06:487.3
06:507.3
06:528.3
06:548.3
06:568.3
06:589.3
07:009.3
07:029.4
07:049.3
07:0610.5
07:089.4
07:109.4
07:12so you therefore do not Contest yourself Martini
07:27空 18
07:37When both are different, then they are both friendly.
07:40The
07:57the
08:04the
08:11the
08:18the
08:21the
Comments