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  • 8 months ago
स्त्री : माया का मातृत्व भाव

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00:00नमस्कार आईए आज आपको सुनाते हैं रादिस्तान पत्रिका के प्रथान संपादर डॉक्टर गुलाब कोठारी का शरीर ही ब्रह्मांड श्रिंखिला में पत्रिकायन में प्रकाशत आले जिसका शीर्शक है इस्त्री माया का मात्रित्व भाव प्रक्रति में अव्यपुर
00:30माया का वैसे भी ब्रह्म के अतिरिक्त किसी से सरोकार नहीं है माया के कार्य भी यहीं है उसका विवर्थ बनाना जिसके लिए ब्रह्म ने उसको पैदा किया इस विवर्थ को बनाए रखना इसके लिए जीवात्मा को अविद्या के पाश में बान्ध कर रखना ताकि वह मो
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01:23ुणों के अनुरूप प्रक्रति और आक्रति का निर्मान होता है।
01:30वैसा ही जीवात्मा अनग्रहन करता है, वैसी ही कामना मन में उठती है।
01:36परा और अपरा प्रक्रति के माध्यम से पुनरजन्म और कर्मफल का चप्र बना ही रहता है।
01:42सारा प्रपंच अविद्या का रहता है।
01:45श्रिष्टि साक्षी मन का अविद्या ही आगे मन को चंचल बनाये रखती है।
01:50विशेश कर उन लोगों का जिनका मन कमजोर एं सोम का भाग गौण है।
01:55इस्त्रियों में पुर्शागनी की प्रबलता से अविद्या भाग प्रधान होता जाता है।
02:01अर्जनारिश्वर का संतुलन ही इसका समाधान है।
02:05विद्यों से अमृत लोग की और जीवन के प्रभाग को मोड़ने के लिए विद्या भाग का सहाला चाहिए।
02:11इसके लिए मन्ठी कामिना का स्वरूपदलना आवश्यक है।
02:17इसके लिए मन्ठ को द्रसंकल्पवान बनाना अनिबाज्य है।
02:21पुनह नित्य भाव भावित करना की मुझे पित्या मालत का पथिक बनना है।
02:26अन्न से राजसी तामसी अंश को अल्कदम करके सात्विक अन्न ग्रहन करने का अभ्यास भी जरूरी है।
02:33साथ ही किसी सात्विक पुरुष की संगत रहनी चाहिए।
02:37जहां विचारों में सकारात्मक्ता बढ़े।
02:40पूर्जा बढ़े और नेरं पर आगे बढ़ते रहने की चर्चा बनी रहे है।
02:45अभ्या पुरुष की दो प्रकार की प्रक्रतियां हैं परा अपरा।
02:50इनको ही अक्षर और क्षर पुरुष कहते हैं।
02:53अभ्या कारण शरीर में व्यक्ति का मूल मन रहता है।
03:20संचित और प्रारब्ध कर्म रहते हैं।
03:23रस बल रूप में ब्रह्म और माया विष्टा रूप रहते हैं।
03:27इसी माया के कामना रूप से प्रारब्ध कार्य करता है।
03:30यही महा माया रूप में अक्षर शरीर के वाराक्षर का संचानन करती है।
03:36Shara prakriti ka ka rekt shitr hai sharii r hai is shool sharii mai hai maa ki dhehe se hi
03:42is Kari nirmahan hoota hai joh anna man guhen karthi hai vehi anna garbh me shantanke sharii
03:48ka nirmahan karthaa hai man ka nirmahan karthasya jiho rakta aur us ke saath athri pranandritu
03:56ka ata hume is tari sharii sharii se nikalthate hai wahi garbh me sharii nirmahan Kendha
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04:30Yes, she is poor body.
04:34That means she remains at the main,
04:37Shri also remains at the main.
04:40She remains the main body.
04:43She remains an action of the main body.
04:47She doesn't work this way to herself not to be taken as an action.
04:52The main body, is a action of this inner body is one of the main body.
04:57She live in the mind of her life.
05:00She's the dream of Kannily Pujan.
05:03She is proud to have a good house.
05:06She is proud to have a good house.
05:09She is proud to have a good place.
05:11She is proud to stay abandoned.
05:14She is proud of her life.
05:17She's so proud to be here.
05:20She goes towards the Guru's position.
05:24कि जिवात्मा का आंश सब्रुष में एकद्र करके ले जाती होर्व इस थूर में पर書ें रहता है
05:43बित्वर इश्वर से जुड़कर कर्म में युकत्त रहता है तभी पर書ें हो जाएगा
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07:23Satrashwati shiti nidhiya repte usday appe,
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