00:00विदाई की तैयारी कर रही ठंड ने अचानक ऐसा यूटर्न लिया है कि दिल्ली समेत पूरा उत्तर भारत कुदरत के इस बदले मजाज से सन रह गया है।
00:08किसी ने सोचा भी नहीं था कि जनवरी के आखरी हफ़ते में आसमान से आग उगलने वाली गर्मी के बजाए बादलों की ऐसी गड़गड़ाहट सुनाई देगी जो दो साल पुराने बारिश के रिकॉर्ड को तहस नहस कर देगी।
00:19हिमाला एक शेतर में उठा पश्चिमी विक्षोप का वो बबंडर जिसने पहाडों को बर्फ की मूटी चादर में दफन कर दिया अब मैदानी इलाखों में जल प्रले जैसी स्थिती पैदा कर रहा है।
00:49जो धूप खिलने का इंतिजार कर रहे थे।
01:19कमपा देने वाली शीत लहर का सपश्च संकेथ है।
01:21मौसम विज्यानिकों की माने तो 25 जनवरी को भले ही आसमान थोड़ा साफ नज़र आए और दोपहर में सूरज की हलकी किरने दिखाई दें लेकिन ये केवल एक खामोशी है जो आने वाले बड़े तूफान से पहले महसूस होती है।
01:33उत्तर पश्चिम भारत में अगले 24 घंटे में नियूंतम तापमान में 3-5 डिगरी की भारी गिरावट दर्ज की जाएगी जिससे ठिठुरा ऐसी बढ़ेगी कि लोगों का घरों से निकलना मुहाल हो जाएगा।
01:45सबसे बड़ा खत्रा 26 जनवरी यानि गणतंतर दिवस से मनरा रहा है।
02:15बांदी दर्शकों का मज़ा किरकिरा कर सकती है।
02:18इस नए सिस्टम की वजह से जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल और उत्राखंड में भारी हिमपात की चेताबनी जारी की गई है।
02:25जिसकी ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों में शीत लहर के रूत में कहर बर पाएंगी।
02:29पंजाब, हर्याना और राजस्थान के लिए भी आने वाले 48 घंटे बेहत चुनोती पूर्ण रहने वाले हैं।
02:3425 और 26 जनवरी के बीच इन राज्यों में घना कोहरा चाय रहने का अनुमान है, जिससे विजिबिलिटी शूनने तक जा सकती है।
02:4140 से 50 किलोमेटर प्रती घंटे की रफ्तार से चलने वाली बरफीली हवाएं शरीर को सुन कर देने वाली ठंड लेकर आएंगी।
02:48हालाकि इस बारिश ने दिल्ली के दम घोटू प्रदूशन से मामूली रहत जरूर दी है और एक यूवाई जो 400 के पार था वो अब 282 की श्रीणी में आया है।
02:57लेकिन कोहरा बढ़ने के साथ ही हवा की गुणवत्ता फिर से खराब होने की आशंका है।
03:02कुल मिलाकर 26 जनवरी से 28 जनवरी के बीच दिल्ली फिर से बारिश और ठंड के डबल अटैक को जहलेगी।
03:0927 जनवरी के बाद ही तापमान में धीरे धीरे बढ़ोत्री की उम्मीद की जा सकती है।
03:13लेकिन तब तक कुदरत का ये सर्प्राइज दिल्ली वालों की हड्डियों में कमपन पैदा करता रहेगा।
03:19परेटकों के लिए पहाड भले ही स्वर्ग बने हों लेकिन मैदानी इलाकों के लिए जनवरी का ये आखरी हफता किसी अगनी परीक्षा से कम नहीं होने वाला है।
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