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मिडिल ईस्ट में एक बार फिर युद्ध के हालात बनते नज़र आ रहे हैं।पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले से जुड़े बयान के बाद खाड़ी देशों में सैन्य तैयारी तेज़ हो गई है।अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है, जबकि ईरान ने किसी भी हमले का कड़ा जवाब देने की बात कही है।इस तनाव के बीच सवाल उठ रहा है कि अगर युद्ध होता है तो कौन सा देश किसके साथ खड़ा होगा।इजरायल खुलकर अमेरिका के समर्थन में दिखाई दे रहा है।वहीं ईरान अपने सीमित सहयोगियों और प्रॉक्सी नेटवर्क पर निर्भर नज़र आ रहा है।ग़ल्फ देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी संभावित निशाने पर बताए जा रहे हैं।स्थिति को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।मिडिल ईस्ट की यह तनातनी वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है।

Tensions are once again escalating in the Middle East amid fresh warnings of a possible war.Statements linked to former US President Donald Trump on a potential strike against Iran have intensified military preparations in the Gulf region.The United States has warned Iran of possible action, while Tehran has vowed strong retaliation.The developments have raised questions over which countries would align with whom if war breaks out.Israel is expected to firmly back the US in any confrontation.Iran, on the other hand, appears to be relying on a limited set of allies and proxy forces.American military bases in Gulf nations are also seen as potential targets.Regional security alerts have been heightened amid rising uncertainty.The standoff could have serious consequences for global geopolitics and energy markets.

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~HT.410~ED.276~

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00:00अगर अमेरिका ने इरान पर एक भी मिलिटरी स्ट्राइक की तो ये सिर्फ इरान पर हमला नहीं होगा ये पूरे मिडल इस्ट का पावर बैलन्स हिला देगा और कौन खड़ा होगा किसके साथ ये आपको इस वीडियो के अदर मिडल इस्ट एक बार फिर ब्रिंक पर खड़ा
00:30इस टेंशन का पूरा बैग्राउंड समझना जुरूरी है आईए आपको पहले फोग बताओं जोन दो हजार पच्चिस में इरान और इस्रेल के बीच बारा दिन की डारेक्ट वार गूर जिसमें पहली बार इस्रेल के अंदर मिसाइल्स किरी थी वार के बाद इरान ने रि
01:00है सबसे पहले तो समझते हैं कि अमेरिका के साथ कौन खड़ा होगा और अगर जंग होती है तो अमेरिका की मदद कौन करेगा
01:07सबसे पहलो और obvious answer है इस्राइल
01:10इस्राइल के रहे इरान एक existential threat है
01:13nuclear program के साथ, हिजबुल्ला के support के साथ
01:16और अपनी missile की capability की वज़े से
01:19इस्राइल किसी भी US action का full support करेगा
01:23वो तो इरान से वैसे ही लड़ने को तयार मेटा
01:25भही operational support भी वो USA को दे सकता है
01:29कि भही आप इस्राइल से बैट के लड़ो और इरान को खतम करें
01:34लेकिन वहीं जो दूसरा group है
01:36Gulf Arab States का जैसे South Arabia, United Arab Emirates, Bahrain
01:41ये officially तो भही या neutral ही बोलेंगे
01:44लेकिन ground reality ये है कि इन countries के अंदर
01:48US military bases मौजूद है
01:50और इरान पहले ही कह चुका है कि अगर हमला हुआ
01:54तो Arab countries में मौजूद US bases को वो target बनाएगा
01:59UAE में, Saudi में जो US base है वहाँ पे हमला होगा
02:03और इसके अलावा जो Europe है उनका भी रोल बहुत ज़्यादा symbolic होने वाला है
02:07UK और France अमेशा diplomatic बात करते हैं
02:11और वो diplomatic समोड देंगे
02:12लेकिन direct war में इन में से कोई भी नहीं होते वाला है
02:17अब बड़ा सवाल ली है कि इरान के साथ आखिर कौन ख़ड़ा है
02:21देखो दर्शकों यहीं picture थोड़ी week हो जाती है
02:25इरान का सबसे बड़ा strength था उसका proxy network
02:29proxy network में कौन आता था?
02:31Lebanon से Hezbollah, फिर Yemen के Houthis
02:34और इराक और सीरिया से जो support मिलता वो तो था ही
02:37लेकिन अब ground reality बदल चुकी है
02:40इरान के पास उस तरीके का support है नहीं जैसा होना चाहिए था
02:44सीरिया में असाद regime collapse कर चुका है
02:47और Hezbollah economical और military pressure में already है
02:51इसके इलावा Houthis Yemen में survive कर तो रहे है
02:54लेकिन full scale regional war के लिए एक देश का आपके साथ होना काफी नहीं है
03:00अब बात करते हैं Russia की
03:02लेकिन Russia तो खुद Ukraine war में फसा हुआ है
03:06military help देना उनके लिए तो almost impossible है
03:10फिर क्या China से support मांगे भाई, US के खिलाफ लड़ रहे है
03:14तो China की तरफ से मदद आ जाए
03:16अब देखो चाइना इरान का economic partner तो है
03:19लेकिन चाइना बहुत तेज़ अब या वो wars नहीं लड़ता
03:23वो सिरफ stability और trade चाहता है अपना मुनाफाचा
03:27अब इसके अलावा Venezuela जैसे allies तो सिरफ political statements देंगे
03:32और वो कुछ कर भी नहीं सकते
03:33simple शब्दों में इस बार
03:35इरान strategically isolated खड़ा है
03:38इरान के अंदर से कितनी मजबूटी है
03:41अब आपको ये बताता हूँ
03:42तोकि इरान का साथ देने वाला तो उस बार कोई होगा नहीं
03:46अब सबसे बड़ा twist आता है
03:47कि इरान अंदर से कितना मजबूट है
03:49इरान इस वक्त अपनी सबसे कमजोर internal position में है
03:53प्रोटेस्ट सिरफ यूवा या लिबरल्स नहीं कर रहे है
03:57इस बार तो भाई ट्रेडर कम्यूनिटी है
03:59जो रिजीम के काफी करीब है
04:01वो भी प्रोटेस्ट कर रहे है
04:02वो भी सड़को पर है
04:04कोई भी इरान के अंदर खुश नहीं है
04:06एक नारा जो सब कुछ डिफाइन करता है
04:08वो है कि नाइदर गाजा नौर लेबनिन
04:11माई लाइफ फॉर इरान
04:13मतलब लोग कह रहे हैं कि भाई बाहर के वार्ज बंद करो
04:16पहले अपना देश तो संभाल लो
04:18इसके साथ ही अंसर्टिनिटी भी है
04:21कि आयोतल्ला खमीनी के सक्सेसर को लेके
04:24भाईया पावर ट्रांजिशन का डर भी
04:27रेजीम को और वल्नरेबल बनाता है
04:29कि अब खमीनी के बाद कौन
04:32और खमीनी के बाद अगर कोई उतर अधिकारी नहीं है
04:34तो इरान कैसे चलेगा
04:36अब अगर अमेरिका हमला करता है
04:38तो क्या होगा आईए इसके बारे में भी थोड़ा बनाता है
04:41देखो दर्शको शॉर्ट टर्म में
04:42तो मिसाइल स्ट्राइक्स हो सकती है
04:43साइवर अटैक्स हो सकती है
04:45और सबसे बड़ी बात
04:58लॉंग टर्म में अगर देखोगे
04:59तो इरान के अंदर रिजीम की
05:01डीस्टेबिलाइजेशन का एक रिस्क है
05:03अमेरिका का गोल सिरफ इरान को परिश करना नहीं हो सकता
05:07बलकि सिस्टम को प्रेशर में लाना भी हो सकता है
05:11इसलिए अगर अमेरिका एरान पर हमला करता है
05:15तो ये सिरफ एक मिलिट्वी अक्षन नहीं होगा
05:18ये एक कैलकुलेटेड पावर गेम होगी
05:21जिसमें मिडल इस्ट के नए अलाइंसेज लिखे जाएंगे
05:25ये समझाएगा कि मिडल इस्ट में गल्फ नेशन्स में
05:28कौन अमेरिका का सगा दोस्त है
05:30कौन रश्य और चाइना की तरफ है
05:32और कौन सिरफ ट्रेट करना चाहता है
05:35ये सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे
05:37लेकिन इस वाक्ट रान किसी भी तरह से उतके लिए तयार तो नहीं है
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