00:00विवादों के बीच उनका ये बयान केशव प्रसाद मौर्रा पर क्यों आया लेकिन अब आप ये बता दीजिए जनता को हमारे दर्शकों को कि जो ये मामला है 18 जनवरी को जो ने रोका गया और जो शिश्यों के बीच और फुलिस कर्मियों के बीच जड़प हुई आखिर क्
00:30अब इसनान में उसमें पालकी ले जाने कोई परबबरा ही नहीं वर्षों से दशकों से लोग पैदल यात्रा करते हुए जाते हैं और इसनान करके वापस आती है जो बागी के और शंकराचार हैं वो सब पैदल गई
00:45असनान करके लोट आए, लेकिन अज मुक्तिश्वा नंद को ही क्यों पालकी पर बैट कर जाना है, वो पालकी पर बैट कर जाना चाहते थे, अपने समर्थकों के साथ हुर्दंग करना चाहते थे, इससे मेला की कानून व्योस्ता खराब होती, और वहाँ पे अफरातुफरी क
01:15सब कुछ शांती पूर्बग चल रहा होता, लेकिन उनका कहना है कि योगी आधितनात सरकार और उनकी अधिकारी जान बूच कर ये मन बना कर ही बैठे थे, कि जैसे ही अव मिक्तिश्वा नंद मेले में आएंगे, उन्हें हम अपमानित करेंगे, उन्हें रोकेंगे, उनके
01:45हैं कि जब तक पुलिश प्रशासन मुझसे आकर माफी नहीं मांगेगा, तब तक मैं अपना धर्ना खत्म नहीं करूंगा, और उन्होंने कहा कि देखो मैंने माणी अमास्या का असनान नहीं किया, मैंने वसंत का असनान नहीं किया, और अभी भी मैं यहीं पर रहूंगा, �
02:15उस अपमान के लिए भी इनको माफी मागनी चाहिए तो मोटा माटी बात यही है कि एक और मेला प्रशासन कह रहा है कि ये लोग घुर्दंग मनाना चाहते थे ये लोग कानुन ब्युस्ता खराब करना चाहते थे और इनके पास संक्राचार होने का सबूत भी नहीं है मामला स
02:45गया था और ये लोग चाहते थे कि हमारे साथ मारपीट करें और किसी तरह से हमें ये दिखाएं में नीचा दिखाएं तो अभी जो तस्वीर सामने आ रही है वो तो उसकी कहानी तो सिर्फ यही है तो आपने ये तो जान लिया है कि विवाद क्यों है और आखिर ये 18 जनव
03:15उनकी जान को खत्रा बताया जा रहा है और उनके शिवर के भार 12-15 CCTV कैमरे भी लगा दिये गए हैं कि उनकी निगरानी की जाए और इस खबर में लगातार कुछ ना कुछ अपडेट्स आ रही है और हमारी इस खबर में नजर बनी हुई है अगर इस खबर में कुछ भी अप
03:45झाल
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