00:00संभल की एक अदालत से निकला एक आदेश और उसके बाद शिरू हो गई हल चल। कुछी दिनों में एक जज चर्चा के केंद्र में आ गए नाम है विभानशू सुधीर, पद, मुख्यनाईक मजिस्ट्रेट, कहानी ऐसी के अदालत की दिवारों से निकल कर सियासत, पुलिस �
00:30के कुछी दिन बाद उन्हें संभल से हटा कर सुल्तानपूर में सिविल जज सीनियर डिवीजन बना दिया गया, यही वो मोर था जहां से बहस तेज हो गई, विपक्ष ने सवाल उठाए, वकील सडक पर उतराए और सोशल मीडिया पर तंज कसे जाने लगे, विभानसू स�
01:00के बढ़ने वाला करियर शुरू हो गया, अगले 12 सालों में उन्होंने कई जिले देखे, कई कुर्सियां बदली और कई जिम्मेदारियां भी निभाई, उनकी पोस्टिंग की सूची काफी लंबी है, सुल्तानपूर से मुसाफिर खाना, फिर एटा, कभी जुडिशनल मज
01:30काग्जों में ये सामान प्रशासनिक प्रकरिया लग सकती है, लेकिन संख्या पर नजड डालें तो तस्वीर बिलकुल ही अलग दिखती है, 12 साल के करियर में 8 बड़े ट्रांसपर, अगर प्रमोशन के साथ भी तनायतियों को जोड़ दें, तो यहां कड़ा और बढ़ जा
02:00दर्श करने का आदेश दिया था, आदेश कानून के दाएरे में था, लेकिन पुलिस को असहच करने वाला था, इसके बाद माहोर गर्मा गया, विपक्ष ने इसे सरकार बनाम न्याय पालिका की लड़ाई की तरह पेश किया, समाजवधी पार्टी के प्रमुक अखलेश य
02:30दवाव में विट्रांसफर किया गया है, वकीलों का कहना था कि विवांशु शुधीर इमानदारी से काम कर रहे थे और जिले के लोग उनके फैसलों से संतुष्ट थे, इस बीच संबल को नया सीजियम मिला, नाम है आदित सिंग, अब जरा समझते हैं कि सीजियम होता कौन
03:00फैसलों में सीजियम की भूम का बहुत जादा महत्पूर होती है, सीजियम बनना आसान नहीं होता है, इसके लिए राज की न्याइक सेवा परिक्षा यानि PCSJ पास करनी होती है, ललवी की डिगरी, उम्र की तैसीमा और कड़ी लिखित परिक्षा, फिर इंटर्वियू, च
03:30बलकि किसी और के पास पहुत चुकी है, लेकिन सवाल अब भी वही खड़ा है, क्या ये सिर्फ एक ट्रांसपर था, या सिस्टम के भी तर चल रही खिस्तान की एक और कहानी, जवाब शायद वक्त देगा, लेकिन इतना तो तै है, ये कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, इस
04:00प्रांसपर चल रहीं हुई हुई हुई हुई हुई हुई
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