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शंकराचार्य पद को लेकर PM Modi और CM Yogi को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दी सीधी चुनौती! जानिए प्रयागराज के माघ मेले में अचानक ऐसा क्या हुआ कि संत और प्रशासन के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई? कौन होते हैं शंकराचार्य वीडियो में जानें विस्तार से.

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00:00प्रियाग राज की रीती पर बूंजे ये शब्द केवल एक संत का गुस्सा नहीं है बलकि उसे एक हजार साल पुरानी सुंस्था का मूकार है जिसे सनातन धर्म का सरवोच चुन्याय पीछ माना जाता है
00:30कल्पना कीजे एक लोगतांतरिक देश में जहां सत्ता के शिकर पर प्रधानमंत्री और राश्वती बैठते हैं वहां एक सन्यासी ये दावा करे कि उसका पदिन सब से उपर है किसी के भी कान इस बात को सुनकर खड़े हो सकते हैं
00:43जियोद्रमट के स्वामी अविमुक्तिश्वारानन सरस्वती का ये बयान इन दिनों पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना है
00:49बाग मेली की उस दोपहर जब पोलिस ने उनके रत को रोका और प्रशाशन ने शाही स्नान से मना किया
00:55तो जो द्रिश्य सामने आया उसमें आधुनिक राजनीती और प्राचीन आध्यात्मित्ता परंपरा के बीच की एक गहरी खाई को उजागर किया जन्म दिया
01:05ये महज एक मेले का विवाद नहीं था बलकि उस पद की गरिमा और अधिकार की लड़ाई है जिसे आधी शंकराचार्य ने आटवी शताब्दी में स्थापित किया
01:13एक संत आखिर्ख्यों लोगतांत्रिक विवस्था के सबसे बड़े प्रतीकों को चुनौती दे रहा है
01:19इसके पीछे है वो विचारधारा जिसे शंकराचार्य कहा जाता है
01:23शंकराचार्य ये कोई नाम नहीं बलकि एक पद्वी है जोकी अध्वेत वेदांत की उसा टूट परंपरा को दर्शाती है
01:31जिसका नित्त्व साक्षात शिव के अवतार माने जाने वाले आधी शंकराचार्य ने किया
01:37जब भारत धार्मिक रूप से विखराव के स्थिती में था और वैदिक दर्शन कमजोर पड़ रहा था
01:42तब केरल के कालरी में जनवे पालक ने मात्र 32 साल के उम्र में पूरे भारत का भुगोल और दर्शन बदल दिया
01:50उन्होंने देश की चार उदिशाओं में चार मठूं की स्थापना की उतर प्रदीश में जियोतिरमत दक्षण में श्रिंगेरी शारदा पीट पूर में गोवरधन पीट और पश्चिम में द्वारका शारदा पीट इन पीठों का उदिश्व सिर्फ पूजा पाठ नहीं �
02:20और इशारा कर रही हैं जसमें किसी राशनेतिक मुहर की जरूरत नहीं है शंकर आचारे का चैन ना तो चुनाफ से होता है और ना ही ये वन्शा नुगत है इसके लिए शास्त्रार्थ वैराग्या विदो का प्रकांड पांडित्या और दशनामी सन्यास परंपरा की कठूर
02:50जब दीश के चार उकूनों से चार शंकराचार्या अपनी बात रखती हैं तो उसे सनातन समाच के लिए अंतिम नर्णय माना जाता है आज की राशनीती भले ही मतों और बहुमतों पर टिकी हो लेकन शंकराचारे की परंपरा विवेक और शासर के प्रमाण पराधारित है य
03:20इस समझना भी ज़रूरी है कि शंकराचारे का पद केवल किसी व्यक्ति के धार्मिक भहचान पर नहीं बलकि भारत के उससांस्तिक अखंडता का प्रतीक है जिसे आदी शंकराचारे ने हजारों साल पहले उत्तर से दक्षण और पूर्व से पश्यम को एक सूत्र में पिरो
03:50इस संस्था की एहमियत को नगारा नहीं जा सकता क्योंकि ये सनातन धर्म की वो बहुत धिक रीड है जिसने समय की हर आंधी को छेला और आज भी अडिक खड़ा है बहराल शंकराचारे के बारे में आप क्या कुछ जानते हैं कोई ने जानकारी अगर आप समझना चाते हैं �
04:20अब्सक्राइब अब्सक्राइब चाह्ट के लिए समय का लिए लुट आंगर आप उयोंकि वारी आपי नग्सक्राइब धर
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