00:00इंदुधर्म की मानिताओं के नुसार भगवान गनेश को किसी भी शुबकारे की शुरुवात से पहले विशेस रूप से याद किया जाता है विसलिए वो प्रतम पूज्य देव भी कहलाते हैं
00:14अब गनेश व जयनती को मागी गनेश जयनती के नाम से भी जारा जाता है साथ ही इस सो तिती पर विनायक चतुर्थी का भी वरत किया जाता है अब ऐसे माईया आपको आज किस वीडियो में बताते हैं कि आखिर गनेश जयनती क्यों मनाई जाती है और इसका पौराने को कथा क
00:44पंचान के अनुसार या पर्व हर साल माग मा के शुक्ल पक्ष की चतुरती तिथी पर मनाय जाता है।
00:50माना जाता है कि इस दिन विद्य विदान से गणेश जी की पूजार चुना करने से सादक को बुद्धी बल और सुख सम्रद्धी की प्राप्ती होती है।
00:58वहीं आपको बता रहे हैं भगवान गणेश जी को माता पारवती ने विनायक नाम दिया था। अब इसलिए इस दिन को अन्य नामों से भी जाना जाता है।
01:05वहीं भक्तों का मानना है कि भगवान गणेश जी की बाधाओं को दूर करने वाले और आरंब के देवता हैं। अब इसलिए वे जुने आशिरवात देंगे और उसके लिए सम्रिद्ध और सफलता का मार्ग प्रशस्त होगा।
01:18वहीं भगवान श्री गणेश के जन्म पर उनकी स्तुती से ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलती हैं। मागी गणेश ज्वेंती के दौरान भग तो पुवास रखते हैं, पूजा करते हैं और आत्मा की शद्धी के लिए विमन धार्मिक गते वीधियों में भाग लेते
01:48शड़ी पर लगी हल्दी को साफ करने के लिए उपटन लगाया। जब उन्होंने उपटन को अपने शरीर से हटाया तो उससे एक सुदर और दिव्य पुतला बन गया।
01:57माता पारवती उस सब पुतले को देख कर बहुत प्रसन्न हुई और उन्होंने उसमें अपनी दिव्य शक्ती से प्रान डाल दिये।
02:05अब इस प्रकार भगवान गनेश का जन्म हुआ था।
02:08माता पारवती ने भगवान गनेश को अपने शरीर के मैल से बनाया था और उन्हें द्वारपाल के रूप में नियुक्त किया था।
02:15जब भगवान शिव वापस आये तो गनेश जी उन्हें अंदर जाने से रोका, अब क्रोधित को कर शिव ने उनका सर काट दिया।
02:22माता पारवती के विलाप्त करने परशिव ने गनेश जी के सर्व को हाथी के सर्व से बदल दिया और उन्हें अपना पुत्र सुईकार किया।
02:30मुई गनेश जी को देवताव ने आश्रवात दिया और विप्रथम पुज्य बन गये।
02:34तो दोस्तो फिराल इस वीडियो में इतना ही आपको जनकारी कैसे लगी हमें कमें लिपकर जरूर बताएगा और बोल्स कई के तरफ से आप सभी को गनेश ज्वेंती के धेड़ो शुब कामना है।
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