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Ganesh Jayanti Puja Vidhi 2026: हर महीने में दो चतुर्थी आती हैं, लेकिन माघ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व है। इसे गणेश जयंती, माघी गणेश चतुर्थी, तिलकुंद चतुर्थी और वरद चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ गणपति जी की पूजा होती है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर चंद्रमा का दर्शन नहीं करते हैं, इसलिए ये पूजा चंद्रोदय से पहले शुभ मुहूर्त में हो जाती है। जनवरी में गणेश जयंती कब है, इसकी डेट को लेकर काफी कंफ्यूजन है। यहां से आप गणेश जयंती की सही तारीख नोट कर सकते हैं, वो भी पूजा मुहूर्त, पूजा सामग्री लिस्ट और पूजा विधि के साथ।Ganesh Jayanti Puja Vidhi 2026: Ganesh Jayanti Ki Puja Kaise Kare,Pujan Samagri List,Shubh Muhurat..


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00:00हर महीने में दो चतुर्थी आती है, लेकिन माग महीने के शुकलपक्ष की चतुर्थी का खास महत्व है
00:07इसे गणेश जैनती, मागी गणेश चतुर्थी, तिलकुंड चतुर्थी और वरद चतुर्थी के नाम से जानते हैं
00:13इस पूरे दिन विधिविधान के साथ गणेश चतुर्थी की पूजा की जाती है, शुकलपक्ष की चतुर्थी पर चंद्रमा का दर्शन नहीं करते हैं
00:22इसलिए ये पूजा चंद्रोदय से पहले शुब महुरत में ही की जाती है
00:25जन्वरी में गणेश जैनती कब है, इसकी लेट को लेकर काफी कन्फ्यूजन है
00:30आईए से विडियो में जानते हैं गणेश जैनती की सही तारीक कब है
00:34पूजा मुहुरत, पूजा सामगरी और पूजा विधि क्या रहेगी
00:38चतुरती तिति की शुरुवात 21 जन्वरी की मध्यरात्री 2 बचकर 47 मिनट से शुरू हो रही है
00:45और इसकी समापती 22 जन्वरी 2026 को मध्यरात्री 2 बचकर 28 मिनट पर होगी
00:51वो दियतिति के अधार पर 22 जन्वरी को गणेश जैनती मनाई जाएगी
00:56इस दन पूजा का शुब मुहरत सुबह 11 बचकर 28 मिनट से दो पहर 1 बचकर 42 मिनट तक है
01:02पूजा करने के लिए 2 घंटे 12 मिनट का समय मिल रहा है
01:06इस दन भद्रा का साया भी रहेगा पूजा में लेकिन कोई बाधा नहीं आगी
01:10क्योंकि पूजा मुहरत के बाद से ही भद्रा लगेगी
01:13भद्रा दो पहर 2 बचकर 40 मिनट से मधिरात दो बचकर 28 मिनट तक रहेगी
01:19पूजा सामगरी की बात करें तो उसमें पूजा की चौकी गणेश जी की प्रतिमाया
01:24चत्र, रोली, अक्षत, दूर्वा, दीपक, तेल, माचस, फूल, संदूर, चंदन, लड्डू, तिल, यतल सी बने सामगरी, कथा की पुस्तक, करपूर
01:34गणेश जीनती पर पूजा मंत्र होगा ओम गन गनपताय नमा
01:38माग मास के शुकल चतुर्थी को गणेश जीनती के दिन प्राता असनान कर, स्वच्छवस्तर पहन कर, पूजा स्थान को शुद्ध कर ले, चौकी पर लाल वस्तर बिचा कर, भगवान गनेश की मुर्थिया चत्र की स्थापना करे
01:50फिर गणपती का ध्यान करते हुए विरत का संकल पले दीप्रज्वलित कर गंगाजल से उनका विशेट करें
01:55प्रोली अक्षर दूर्वाब, पुष्प, सिंदूर और चंदन अर्पित करें
01:59मोदक या लड़ू का भोग लगाएं
02:01तिल या तिल से बनी सामगरी जरूर चड़ाएं
02:04इसके साथ ही ओम गण, गणपते नमम मंत्र का 108 बार जाप करें
02:09गणे शार्तिकर, शमा प्रार्तना करें और प्रसाद बाटें
02:13दिन भर वरतरक कर पूजा के समय कथा सुनना विशेश फलदाई है
02:17इस दिन चंदरदर्शन वर्जित है
02:19इसलिए चंदरमा को भूल कर भी ना देखे
02:22फिल हाल इस वीडियो में इतना ही
02:24वीडियो को लाइक और शेयर करें
02:26साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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