00:00जितनी जिन्दगी जी चुके हैं, ये देखा है कैसे पलक जपकते बीती है
00:05कौर किया? अभी तो जवान थे आप, बस कुछी दिन पहले
00:18अभी स्कूल में थे, कॉलेज में थे
00:21और अभी बच्चे थे आप, यूँँ दोड़ भाग रहे थे, मैदान पर, गलियों में
00:28अभी अभी, है न? और अचानक आप पाते हैं कि आप 30 के हैं, 40 के हैं, 50 के हैं, 60 के हैं
00:38ये जो समय बीता है, ये कैसे बीता है? ये ऐसे बीता है, चुटकी बजाते हैं
00:48ऐसे ही बीता है न? तो जो शेश है समय, वो भी कैसे बीतेगा? कैसे बीतेगा?
00:54देखिए अभी पैदा हुए थे आप, बहुत पीछे की बात नहीं है और अगर पैदा होने का क्षण बहुत पीछे की बात नहीं है
01:02तो चिता पर लेटने का क्षण भी बहुत आगे की बात नहीं है
01:06यह है, सीमित है न समय
01:10एकदम सीमित है, तो क्या करना है
01:15मजबूरी में गुजार देना है, शिकायतों में गुजार देना है, मू लटकाई-लटकाई गुजार देना है
01:20उलज-उलज के, चिड़-चिड़ के, चोट, खरोचे और घाव खाखा के गुजार देना है
01:28या कुछ और उदेश हो सकता है समय का, जीवन का
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