00:00भारत की अदालतों में क्रिमिनल मामलों को छोड़ दें तो बाकी ज्यादा तर मुकदमे रिष्टिदारों के ही तो बीच में
00:08है और बहुत ज्यादा पती-पत्नी, बच्चों की परवरेश, कई बार तो कुत्ता, मिया भी भी अब साथ नहीं है
00:16कुत्ता किसके पास रहेगा
00:17रिष्टा बना भी कैसे था, दहेज से, तो रिष्टा जब बना था तब भी एक कैश फ्लो हुआ था, और
00:24रिष्टा जब टूटा तब भी एक कैश फ्लो होना है, उसको ऐलिमनी बोलते हैं
00:28आप कभी किसी टेलर की दुकान पे जाईए, तो वहाँ बहुत सारे कपड़े लटके होते हैं, बहुत माल है, माल
00:36कुछ नहीं हो, सा बिका हुआ माल है, अब डिलिवरी नहीं हुई है, बस कोई आ जाएगा, कोई कल आएगा,
00:42लेके चला जाएगा, लेकिन जो लेके चला जा
00:58खोब चलता है, प्यार नहीं मिलता है, जिन्दगी में किसको ला रहे हो, कभी परखा, वहाँ तो क्या देते हो,
01:04पसंद आ गया है, और फिर जब धोखा खाते हो, बेचे जाते हो, तो फिर हाय है करते हो, छाती
01:10पीटते हो, कि मेरे साथ अन्याय हो गया, अन्याय नहीं हुआ
01:12आपके अंधेपन का नतीजा मिला है
01:15रिष्टा अगर खुद बनाने जा रहे हो भाई
01:17तो इतना देख लेना कि जिससे बना रहे हो
01:20वो व्यापारी किस्म का तो नहीं है
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