00:00सर आप कुरान पर कभी क्यों नहीं बोलते
00:02ये मत पुछो कि मैंने कुरान के बारे में बोला क्यों नहीं
00:06ये पुछो कि मुझसे किसी ने कुरान के बारे में पुछा क्यों नहीं
00:10और जब किसी ने पुछा है तो मैंने बोला भी है
00:14ये क्रीने अत्रा मुझे याद है यहां से लखनव तक की थी
00:17तो मेरे साथ थे मुसल्मान था एक वो जिग्यासू
00:22पूरी रात बस इसी बात पर चर्चा हुई और मैं समझा रहा था कि
00:29कुरान के केंद्र में क्या है कवहीद माने क्या होता है
00:34मैं समझाता है क्योंकि वो सुनना चाहता था
00:37वो सुनने वाला इतना अग रही था कि मेरे लिए आनंद की बात हो गई कि मैं उससे बात कर
00:42रहा हूँ
00:43इस बीच बहुत सारी उसकी माननेताएं टूटी उसको अच्छा लग रहा था
00:48अब वो एक बहतर मुसल्मान हो पाएगा बुलने के लिए जरूरी है कि जब समझाने वाला आपकी माननेताओं पर चोट
00:56करे तो आप उग्र न हो जाओ आप प्रतिक्रिया न करने लगो
01:01होने को तो ये भी हो सकता था कि तो ये भी किया सकता था कि आपने भी जो किया
01:05उससे मेरी धार्मिक भावना को बहुत ठेश पहुंची
01:08उसने नहीं किया इसलिए मैंने इस बात को अपना करतबे समझा
01:12और आनंद समझा इस बात में कि मैं रात भर जग कर उससे बात करूँ
01:17वैसा कोई मिलेगा तो बात करूँगा
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