00:00मैं अभी नोइडा से आ रहा हूँ
00:02और जितनी बार नोइडा जाता हूँ उतनी बार
00:05पहली बात तो अनुगरह उठता है कि मैं वहां नहीं हूँ
00:09और दूसरी बात रोश उठता है कि दस साल वहां क्यों था
00:14खंदे पानी के नाले, पॉलिथीन ही पॉलिथीन, भीड, भीड, भीड, भीड, शोर, शोर, शोर
00:20शान के समय आटो में ठुसे हुए लोग
00:23तुम शान्त भी रहना चाते हो तो कोई तुम्हें कंधा मारने के लिए सैयार बैठा है
00:30इलक्टरिक आटो उनमें उपतली पतली उनकी पट्टी जैसी सीट
00:34एक ऐसे एक ऐसे आमने सामने चार इधर चार इधर बैठे हुए है
00:39और मैं उनको देख रहा हूँ जो बिलकुल खड़की पर ही दो लोग बैठे हैं
00:44मैं शर्त लागर कह सकता हूँ कि दोनों बीमार हैं
00:49अगर वो अभी डॉक्टर के पास से ले जाएं तो दोनों में बीमारिया निकलेंगी
00:52एक का चहरा और आखें बता रही है कि वो बीमार है
00:57और दूसरे का पेट इतना धसा हुआ है कि जैसे जैसे पेट होई ना जैसे पेट पीट में खुस गया
01:05हो
01:05वो बीमार हैं पर किसी विशय की आस है किसी उमीद का सहारा है यह यहां पड़े हुए है
01:13और वो जो आस है वो जूटी है अतारकिक है क्योंकि उनको जो भी कुछ मिल रहा है
01:19वो इससे बहतर जीवन बिता सकते हैं कहीं और
01:23भूद बार आपसे कहता हूँ
01:25जीवन के संघर्षों से भागो नहीं
01:27लेकिन इसका मतलब यह नहीं है
01:29कि संयोग ने अगर गटर में पैदा किया है तो गटर में ही पड़े रहो
01:33इचिडिया कैद थी पिंजरे में और वहीं पे
01:36उसने बच्चे दे दिये तो बच्चे कहीं यही तो हमारा घर है
01:39पुष्टैनी हम पिंजरे से बाहर थोड़ी कभी आएंगे
01:43जीवन से नहीं भागना है
01:44तो जीवन क्या बस कचड़े के धेर में ही होता है
01:47कचड़े में हो अगर और वहां से हट करके किसी साफ जगह जा रहे हो
01:53तो यह पलायन नहीं हुआ
01:55यह आपकी विम्मेदारी है अपने प्रति
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