00:00उमीद का चराग एक फैमली कहानी
00:02शाम का वक्त था
00:04सूरज अपनी अखरी करने बखेर रहा था
00:07और आस्मान पर हल्की सी नारंजी रोशनी फैल रही थी
00:10एक छोटे से घर में एहमद अपने चार साला बेटे हसन के साथ
00:15बैठा हूम वर्क करवा रहा था
00:16हसन की छूटी सी उंगलियां पिंसल पकड़ने में मसरूफ थी
00:20मगर उसकी तवज्जो
00:21बार-बार खेलोने की तरफ जा रही थी
00:25बाबा
00:26बस थोड़ा सा बाकी है न
00:28फिर खेलेंगे हसन ने मसूमियत से पूछा
00:32एहमद ने प्यार से इसके सर पर हाथ फेरा
00:35हा बेटा सिर्फ दो लफस और लिख लो
00:38फिर हम बाहर जाकर साइकल चलाएंगे
00:42दूसरी तरफ किचन में एहमद की बीवी फात्मा चूलहे के पास
00:46खड़ी खाना पका रही थी
00:47आज वो जरा खामोश थी क्यूंकि
00:50इसकी उम्मी की तबियत फिर खराब थी
00:52बिल्ट प्रेशर बढ़ गया था
00:54वो बार बार मोबाइल देखती के
00:56शायद भाई कोई मैसिज करे
00:58एहमद ने ये महसूस किया
01:00फात्मा परेशान क्यों हो
01:03उम्मी की तबियत
01:05बस दूआ करें बहतर हो जाएं
01:07वो धिमी आवाज में बोली
01:09एहमद जल्दी से उठा
01:11और उसके पास आया
01:12हम आज रात खाने के बाद
01:15उनके पास चलेंगे
01:16फैमली का साथ ही असल ताकत है
01:19फात्मा की आँखों में नमी आ गई
01:22मगर इसने मुस्करा कर सरहिलाया
01:24खाना खाने के बाद
01:26तीनों नाना के घर पहुँचे
01:27हसन ने अंदर दाखिल होते ही
01:30नानी के साथ लिपट कर कहा
01:31नानी
01:33मैं अब के लिए दूआ करता हूँ
01:35अब ठीक हो जाएं
01:36इस मासूम जुमले पर
01:38फात्मा की उमी के चहरे पर
01:40एक हकीकी मुस्कराहट आ गई
01:42एहमद ने डॉक्टर की हिदाया
01:44चेक की दवाओं के टाइम लिखे
01:46और थोड़ी देर बैठ कर घर का काम भी करवा दिया
01:49रात गए जब वो वापस जा रहे थे
01:52तो फात्मा ने आहिस्ता से कहा
01:53एहमद
01:55जब अब साथ होते हैं
01:57तो सब आसान लगता है
01:58एहमद ने जवाब दिया
02:01फैमली इसी का नाम है
02:03एक दूसरे का सहार अलिफ
02:06गारी की खिर्की से बाहर चांद रोशन था
02:09जैसे ये बता रहा हो के
02:11जिन्दगी में अंधेरे कितने ही हो
02:12मगर प्यार भरी फैमली हमेशा
02:14उमीद का चराख जला देती है
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