00:00दिल्ली के पुराने होटल की चौथी मनजिल पर एक कमरा सालों से बन था। लोग कहते थे कि जो भी उसमें रुका, जिन्दा वापस नहीं आया।
00:10लेकिन एक रात अठाई साल का यात्री मजबूरी में उसी कमरे में ठहर गया। अंदर दाखिल होते ही उसे बदबू और ठंडी हवा का जोंका महसूस हुआ।
00:22दीवारों पर पुराने नाखुनों के निशान थे और खिड़की तूटी हुई थी। रात गहराते ही दर्वाजे पर दस्तक हुई। पहले उसने अंदेखा किया, फिर दुबारा वही दस्तक गुंजी, कापते हाथों से दर्वाजा खोला। पर बाहर कोई नहीं था।
00:39उसने चैन की सांस ली और पलट कर देखा। उसके बेट पर कोई और लेटा था। वही चहरा, वही कपड़े, पर उसकी आखे पूरी तरह काली थी और धीरे धीरे मुस्कुरा रही थी।
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