Skip to playerSkip to main content
The Haunting of Bhawanipur House – A Terrifying True Story | भवानीपुर हवेली का शापित रहस्य – एक सच्ची डरावनी कहानी

In the heart of Kolkata lies the cursed Bhawanipur Haveli — a place where time stopped in 1947. Every new moon night, the walls bleed, doors open on their own, and a girl in a white saree is seen waiting for her next victim. This is not just a story — it’s a terrifying true event recorded by three friends who entered the haunted mansion and never came out the same again. Watch till the end… if you dare.

कोलकाता के बीचोंबीच स्थित है भवानीपुर हवेली — एक ऐसी शापित जगह जहाँ समय 1947 में रुक गया था। हर अमावस्या की रात दीवारों से खून टपकता है, दरवाज़े अपने आप खुलते हैं, और सफेद साड़ी पहनी एक लड़की नए शिकार का इंतज़ार करती है। ये सिर्फ़ कहानी नहीं... एक सच्ची घटना है, जिसे तीन दोस्तों ने कैमरे में कैद किया — पर वे फिर कभी पहले जैसे नहीं रहे। हिम्मत है तो आखिर तक देखो…

#RaatKiKhamoshi #HauntedHouse #BhawanipurHaveli #HorrorStory #TrueHaunting #IndianGhostStory #RealHorror #KolkataMystery #SupernaturalIndia #ScaryStory #Paranormal #HauntedPlaces #GhostEncounter #HindiHorror #MysteryNight #HauntedTales #FearFiles #DarkSecrets #IndianUrbanLegend #HorrorShorts

Bhawanipur Haveli haunted story
true Indian horror story
Kolkata haunted mansion
ghost story in Hindi
Raat Ki Khamoshi horror video
real paranormal footage
haunted places in India
Bengal supernatural tales
Indian horror narration
white saree ghost legend
scariest haunted house India
true ghost story 2025
Indian myth and mystery
horror storytelling Hindi

Category

😹
Fun
Transcript
00:00कल्पना कीजिए, एक ऐसी रात जब चांद भी अपनी रोशनी छिपा ले, जब हवा में सन्नाटा नहीं, बलकि किसी के धीमे सिस्कने की आवास तैर रही हो, ऐसी ही एक रात कोलकाता के भवानीपूर इलाके में एक पुरानी हवेली अपनी खामोशी तोड़ती है, दीवारो
00:30हवेली की कहानी, एक ऐसी जगे जहां 1947 से हर अमावस्या की रात, दर्वाजे अपने आप खुलते बंध होते हैं, जहां पुलिस भी जाने से कतराती है, जहां की दीवारों में चिपके हैं, वो लोग जिन्हें कभी कोई ढून नहीं पाया, आज मैं आपको बताऊंगा उन �
01:00दीवारों से फुस-फुसाती सुनाई देती है, धीमी सिस्की की आवाज, मत जाओ अंदर, वो तुम्हें भी अपना बना लेगी, 1927 का वो शापित साल, जब राजा विश्वनात चौधरी ने इस हवेली की नीव रखी, कहते हैं नीव के हर पत्थर के नीचे, उसने एक ज
01:30एक गुप्त मंदिर, जहां राजा हर अमावस्या को काली मा को खास बली चढ़ाता था, 1927 की 15 अगस्त की रात, जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, यहां कुछ ऐसा हुआ, जिसने इतिहास को हिला दिया, राजा का पूरा परिवार, पत्नी, तीन बेटे, प
02:00बस सभी की आखे फटी हुई, जैसे उन्होंने कुछ ऐसा देख लिया हो, जो दिमाग को पचा न सके, पर सबसे रहस्य में थी राजा की 14 साल की बेटी मीरा, उसका शव कभी नहीं मिला, बस उसका डायरी पाया गया, जिसके आखरी पन्ने पर लिखा था, डरावनी फुस �
02:30हवेली बंद कर दी गई, पर लोगों ने देखा हर अमावस्या को खिड किया अपने आप खुलती, दीवारों से ताजा खुन रिस्ता, और कोई सफेद साडी पहनी लड़की उपरी मंजल से नीचे जाकती दिखाई देती, अचानक तेज हवा की आवाज, वो आज भी वही
03:00आरियन मलोतरा, एक 24 साल का नास्तिक यूट्यूबर जिसे भूत प्रेत की कहानियों पर हसी आती थी, अपने दो दोस्तों रोहन और प्रिया के साथ इस हवेली में घुसने की तैयारी कर रहा था, रात के 11 बचकर 33 मिनिट में जब उन्होंने हवेली का जंग लगा ताला तो
03:30वही समय जब 1947 में राजा के परिवार की मौत हुई थी, प्रिया जिसने अपनी दादी से इस हवेली की कहानिया सुनी थी, ने तुरंत अपने हाथ में लाल कलावा बांध लिया, रोहन हसते हुए बोला, अरे यार, ये सब अंध विश्वास है, अगर भूत होते तो साइन्
04:00गरी गिर गया, उनकी सांसें सफेद भाब बनने लगी, गर्मी के महीने में, रोहन का फोन अचानक 1947 का कैलेंडर दिखाने लगा, प्रिया ने उपर की मंजल से रसी की सीडियों की आवास सुनी, जबकि वहां कोई रसी नहीं थी, धीमी घुंगरूं की आवास, आरियन के कै
04:30जो उल्टा चल रही थी, जिसके बाल फर्ष पर घिसट रहे थे, जिसकी आखे नहीं, बस दो काले शुन्य थे, तेज चीक की आवाज, प्रिया चिल्लाई, हमें यहां से निकलना चाहिए, पर जब वे भागे, मुख्य दर्वाजा गायब हो चुका था, दीवारों से गा�
05:00तभी तीनों के फोन पर एक साथ मैसेज आया, तुमने मेरा नाम ले लिया, अब मैं आ रही हूँ, जैसे जैसे वे हवेली के अंदर आगे बढ़े, उन्होंने महसूस किया, कि ये कोई साधारन भूतिया जगे नहीं थी, बेस्मेंट की और जाती सीडियों पर उनके कदमों
05:30वो गुप्त मंदिर जहां राजा काली की पूजा करता था, दीवारों पर अजी प्रतीक बने थे, नर कनकालों से बनी स्वस्तेक, उल्टे लटके हुए शिवलिंग, और खून से लिखे संस्कृत मंत्र, यत्र नार्यस्तु पुज्यनते, तत्र रमंते चत देवता, जहां
06:00पर साफ दिख रहा था, कि वो आज ही धोया गया है, उसके उपर रखी थी एक डायरी, जिसके आखरी पन्ने पर लिखा था, आज पापा ने मुझे मंदिर में बंद कर दिया, वे कह रहे थे मुझे देवी बनाना है, पर जब उन्होंने मेरे गले में चाको रखा, देवी �
06:30तभी आर्यन के कैमरे ने इंफ्रारेड मोड में कैच किया, हर दिवार के पीछे मानवाकार छायाए, जो उन्हें देख रही थी, वे छायाए धीरे धीरे दिवारों से बाहर आ रही थी, जैसे पानी में घुला हुआ, कोई पदार्थ अचानक ठोस हो रहा हो, प्रिया ने �
07:00अब धीरे धीरे खुल रहा था, और उसमें से निकल रही थी, वही सफेद साडी पहनी बा, जिसने दर्वाजा बंद किया था, रोहन ने पीछे मुड कर देखा तो समझ गया, ये कोई भूतिया मजाक नहीं था, हवेली खुद एक जीवित प्रानी थी, दीवारे सांस ले �
07:30समझ में आया राजा ने जो हवेली बनवाई थी, वो दरसल एक विशाल यंत्रक थी, एक ऐसा जाल जो आत्माओं को फसाता था, और मीरा वो इस यंत्र की संचालक बन चुकी थी, वो भूत नहीं, बलकि इस हवेली की पालतु आत्मा थी, जिसे भूख लगती थी, नई आत
08:00क्यों इस हवेली को भूखी हवेली कहते हैं, रात के 3 बच कर 17 मिनट बचे, जब आरियन, रोहन और प्रिया ने महसूस किया कि वे इस हवेली से जिन्दा नहीं निकल पाएंगे, उनके फोन की बैटरिया अचानक 0% हो गई, पर कैमरा अभी भी चल रहा था, जैसे कोई चाह
08:30पीट पर कोई बैठा है, वो पागलों की तरह दीवार की ओर भागा, और फिर वो असंभव हुआ, दीवार ने उसे निकल लिया, जैसे पानी में हाथ डालो तो जो छवी बनती है, वैसे ही वो धीरे-धीरे दीवार में समा गया, सिर्फ उसके हाथ के निशान रह गये, जो
09:00पीछे कोई नहीं था, वो जोर-जोर से रोने लगी, मुझे माफ कर दो मीरा, मैं तुम्हारी बहन बन जाऊंगी, तभी उसका फोन अपने आप ओन हो गया, सेल्फी मोड में, और उसने देखा उसकी पीट पर मीरा सवार थी, उसकी काली आखें, उसका मूँ जो अब तक सि
09:30के बीच स्विच हो रहा था, इन फ्रारेड में वो देख सका पूरी हवेली जीवित थी, दीवारों में नसे दौर रही थी, छट से काले तरल पदार्त की बूदे टपक रही थी, और सबसे भयानक हर कोने में खड़े थे, वे लोग जो पहले इस हवेली में गायब हुए थ
10:00आरियन ने वो देखा, जिसने उसका दिमाग हिला दिया, मीरा अब बच्ची नहीं रही थी, वो एक लंबी टेडी मेडी आकरती में बदल चुकी थी, उसके हाथ इतने लंबे थे, कि वे फर्ष से छट तक पहुँच रहे थे, और उसके मूँ से निकल रहा था वही वाक्य
10:30अंत में वो थककर गिर पड़ा, और तभी उसने महसूस किया, फर्ष अब ठोस नहीं रहा, वो धीरे धीरे उसमें धंस रहा था, जैसे बालू में फसा कोई जीव, अंतिम फ्रेम में कैमरे ने कैच किया, आरियन का चहरा, जो अब मीरा की तरह मुस्कुरा रहा था, उसकी �
11:00प्रिया का फोन हवेली के बगीचे में मिला, जिसमें 1947 की तस्वीरे सेव थी, प्रिया को हावडा ब्रिज के पास पागलों की तरह हसते हुए पाया गया, उसके सारे बाल सफेध हो चुके थे, आरियन का कैमरा हवेली के मुख्य द्वार पर मिला, उस पर ताजा खून के न
11:30कि भूत नहीं होते, आज भवानिपूर हवेली अभी भी वैसे ही खड़ी है, कोलकाता की उन गलियों में जहां सूरज की रोशनी भी डर कर जाती है, पुलिस ने उसके गेट पर प्रवेश वर्जित का बोड लगा दिया है, पर स्थानिय लोग जानते हैं, ये बोड उन ल
12:00हवेली की सारी खिडकिया अपने आप खुल जाती है, और अंदर से लाल रोशनी निकलती दिखाई देती है, कुछ लोग कसम खाते हैं, कि उन्होंने देखा है, खिडकियों पर एक लंबी टेड़ी सी जाया, जो बाहर जहांक रही होती है, मानो कोई नए महमानों का इंतज
12:30आवस्या को खून बहाने लगते हैं, रोहन का फोन आज भी कभी कभी ओन हो जाता है, और उसमें 1947 की तस्वीरे दिखाई देती है, और आरियन, वो तो शायद अब भी उस हवेली में है, कभी कभी रात के 3 बचकर 17 मिनिट पर, जब आपका फोन अचानक ओन हो जाए, और गै
13:00को सुनाने के बाद से, मैंने भी कुछ अजीब चीजें नोटिस की है, मेरी डाइरी के पन्ने अपने आप पलट जाते हैं, मेरे कम्प्यूटर पर अजीब सी फाइले सेव हो जाती है, और कल रात, मुझे साफ सुनाई दिया, मेरे बेडरूम की दीवार से कोई धीरे से खर
13:30भी नहीं भौंकते, बस एक पुरानी हवेली खड़ी है, तो याद रखना, उसके गेट पर लगे बिकाव के बोड को मत पढ़ना, क्योंकि जिसने भी वो बोड पढ़ लिया, वो अगली रात वहाँ जरूर पहुंच जाता है, सुना, तुम्हारे पीछे वाली कुरसी अभ
Comments

Recommended