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  • 3 months ago
हरियाणा के छोटे से गांव में शुरू मछली पालन का काम, आज बन चुका है करनाल जिले की पहचान, सुशील कुमार वो किसान, जिसने मिट्टी नहीं, पानी में भी फसल बो दी, 15 एकड़ में मछली पालन और सालाना कमाई 60 लाख रुपयेसुनील ने साल 2000 में पंचायती तालाब पर ठेके से काम शुरू किया. पहले ही साल मुनाफा हुआ तो इसे जीवन का पेशा बना लिया. अब 7 एकड़ में बीज की हेचरी और बाकी 8 एकड़ में मछली पालन से डबल मुनाफा कमा रहे हैं.सुशील के फार्म पर करीब आठ तरह की मछलियों के बीज तैयार होते हैं. जिनमें हैं, राहु, कतला, ग्रास कार्प, पंगास, झींगा और इनके बीज की देश भर के राज्यों में भारी डिमांड है.आज सुशील सिर्फ एक किसान नहीं, बल्कि ट्रेनर भी हैं. देशभर के करीब 300 किसान उनके फार्म पर ट्रेनिंग लेकर मछली पालन शुरू कर चुके हैं. उनके मॉडल को देखने के लिए विदेशों  जापान, ऑस्ट्रेलिया, चीन तक से डेलिगेशन आ चुके हैं.

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00:00अब साथ एकड में बीज़े की पहचान
00:30की हेचरी और आठ एकड में मचली पालन से डबल मुनाफा कमा रहें
00:34सुशील के फार्म पर करीब आठ तरह की मचली की बीज तयार होते हैं
00:57जिनमें हैं रहू, कतला, ग्रासकार, पंगास, जिंगा और इनके बीज की देश भर के राजियों में भारी डिमांड है
01:03आठ सुशील सिर्फ एक किसान नहीं बलकि ट्रेनर भी है
01:09देश भर के करीब 300 किसान उनके फार्म पर ट्रेनिंग लेकर मचली पालन शुरू कर चुके हैं
01:14इनके मॉडल को देखने के लिए जापान, उस्ट्रिलिया, चीन तक से डेलिगेशन आ चुका है
01:19एक साल में वहाय करीब 60 लाग उर्पे का टर नवर 15 एकड़ खेट से ले रहे हैं
01:27इटीवी बार्त के लिए करनाल से मुनिश टूरन
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