00:00जब नेक बंदे की मौत आती है, फरिष्टे आस्मान से उतरते हैं, चेहरे चमकते हुए, हातों में जन्नत का कफन और लबो पर रहमत के कलमात।
00:10वो कहते है ऐ पाक रूँ, निकल आ अपने रब की जन्नत की तरफ, और रूँ आसानी से निकलती है, जैसे पानी मशक से बहे जाए, आस्मान के दर्वाजे खुल जाते हैं, फरिष्टे कहते हैं, ये फलान एक बंदे की रूँ है।
Comments