00:00नन्ही सलमा एक बहुत प्यारी बच्ची थी, जो मदीना में अपने घर और मस्जिद के करीब रहती थी.
00:08वो हर रोज नमाज पढ़ती, कुरान सुनती और अल्ला से दुआ करती.
00:14सलमा के दिल में हमेशा एक बात रहती थी, अल्ला हमेशा मेरी मदद करेगा.
00:20एक दिन सलमा खेल रही थी, उसके पास रंगीन, गेंदे और खिलोने थे और वो बहुत खुश थी, लेकिन अचानक उसे महसूस हुआ कि किसी ने उसके दिल में सरगोशी की.
00:35अरे सलमा, आज नमाज क्यूं पढ़ो, खेलना ज्यादा मज़ा है.
00:41ये आवाज थी शैतान की, वो हमेशा बच्चों और बड़ों के दिल में वस्वसे डाल कर उन्हें अल्ला से दूर करना चाहता है.
00:50सलमा थोड़ी घबरा गई, वो सोचने लगी, क्या मैं वागी नमाज ना पढ़ों, शायद खेलना ज्यादा मज़ा है.
00:56लेकिन फिर उसे याद आया कि अल्ला ने कुरान में फरमाया है, शैतान तुम्हारी राह में रुकावट डालता है, उसे कभी पीछे ना आने दो.
01:06सलमा ने दिल में कहा, या अल्ला मुझे शैतान के वस्वसों से बचा, मेरी मदद फरमा.
01:13ये कहने के बाद सलमा ने फौरन वुजू किया और नमाज के लिए बैठी.
01:17जब उन्होंने नमाज शुरू की, तो दिल में एक अजीब सुकून और रोशनी महसूस हुई.
01:23वो सोचने लगी, वा, मुझे ऐसा लग रहा है, जैसे सब वस्वसे धीरे धीरे खत्म हो गए हों.
01:31शैतान ने देखा कि सलमा के दिल में एमान और दौा की ताकत है, और वो हारा हुआ महसूस करने लगा.
01:40अब वो सलमा के करीब भी नहीं आ रहा था.
01:43नमास खत्म होने के बाद सलमा ने मुस्कुरा कर कहा,
01:46देखा, अल्ला ने मेरी दूआ सुनी और शैतान को शिकस्त दी.
01:51लेकिन जैसे ही सलमा ने खिलोने लेने के लिए हाथ बढ़ाया, उसे अचानक दिल में फिर से एक सरगोशी महसूस हुई.
01:58अरे सलमा, तुमने तो नमास पढ़ ली, लेकिन अभी खेलना छोड़ा नहीं, थोड़ी देर का आराम क्यों नहीं?
02:04ये दुबारा शैतान के वस्वसे थे, लेकिन अब सलमा ने होसला किया और दिल में कहा,
02:10शैतान, तुमारे वस्वसे मेरे दिल को कभी नहीं डरा सकते, मैं अल्लाह के साथ हूँ.
02:17सलमा ने जल्दी से अपनी छोटी किताब कुरान मजीद खोली और एक आयत पढ़ी,
02:23यानी, सब अल्लाह के रसी के साथ मजबूती से जकड़ो और बिखर करना रहो.
02:34जैसे ही सलमा ने आयत पढ़ी, शैतान ने पीछे हटते हुए कहा,
02:39उफ, ये बच्ची वाकई मजबूत है, मैं इसे कभी भी गुमरा नहीं कर सकता.
02:45सलमा को अपने दिल की ताकत पर बहुत फखर हुआ, वो खुशी से बोली,
02:50अल्ला की ताकत सबसे बड़ी है, शैतान की कोई ताकत नहीं.
02:54उसके बाद सलमा ने छोटे छोटे इकड़ामाद शुरू किये,
02:59खेलते वक्त भी दिल में अल्ला की याद रखना,
03:02खाने से पहले और बाद में दुआ करना,
03:06हर रोज थोड़ी देर परान पढ़ना,
03:19लेकिन सलमा ने बस मुस्कुरा कर कहा,
03:22शैतान, तुम जितने भी वस्वसे डालो,
03:24मैं अल्ला के साथ हूँ और हर बार अल्ला मेरी मदद करेगा।
03:29फिर सलमा ने अपनी मा के पास जाकर कहा,
03:32मा, आज मुझे समझ हाया कि शैतान के वस्वसे वाकी खतरनाक हैं,
03:37लेकिन अगर हम दुआ करें और अल्ला के साथ मजबूत रहें,
03:42तो हम कभी खौफजदा नहीं होंगे।
03:45उस दिन सलमा ने सीखा कि शैतान सिर्फ वस्वसे डाल सकता है,
03:50लेकिन असल ताकत अल्ला की याद और इमान में है।
03:54और उसके बाद सलमा रोजाना खेलते हुए भी अल्ला की याद रखती,
03:59नमाज कभी नहीं छोड़ती और हर वस्वसे के मुकाबले में होसले और दुआ से जीतती रही।
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