00:00दिपाविली के दूसरे दिन उत्तरप्रदिश के राजधानी लखनों का आस्मान रंग विरंगी पतंगों से पढ़ जाता है।
00:11बच्चों से लेकर बोड़े तर सब पतंग के रंगों में खो जाते हैं।
00:14नबाबो के इस शहर में पतंग को लेकर गजब का क्रेज आज के दिन देखने को मिलता है।
00:33जमगट के दिन लखनाओं की हर चत पर पतंग उड़ती है। इस वार योगी मूदी की पतंग की गजब की डिमांड थी।
00:40दिये वाली पतंग भी मार्केट में खूब भिक रही थी। एक दुकानदार ने बताया कि इस पार पांच हजार पतंग बनाई थी। एक भी नहीं बची।
00:48पतंग उराने में राजनीता भी पीशे नहीं रहे। लोगिया पार्क पहुँचे उपमुक मंत्री ब्रिजिश पाठक ने जम कर पेच लड़ाया।
01:05राजसवासांस दिनेश शर्मा ने जमघट को गंगा जमनी त्योहार बताते हुए पतंग बाजी को विहार चुनाव से जोड़ दिया।
01:35बताते हैं कि 1928 में साइमन कमिशन की विरोध में पतंगों पर साइमन गो बैक लिखकर उड़ाई गई। ये बताते हैं कि नवाबों के टाइम में जब गोंपती के तड़ पर पतंग उड़ाई जाती थी तो चांदी के एक तोले की पूछ लड़की रहती थी।
01:50कटने के बाद जिस गरीब को पतंग मिलती थी से उसका भला होता था।
01:55जो पतंग उस टाइम पर लड़ाई जाती थी उनमें चांदी के एक तोले का पूछ टाइब की लटकी होती थी। दुम जिसे कहते हैं तो
02:05तो नवावों के दौर के पतंग वाजी का शौक इस तहजीब के शहर में आज भी जिन्दा है और यहां के लोग भी पतंगों की तरह गंगा जमनी तहजीब के कई रंग समेटे हुए हैं।
02:17ETV भारत के लिए लखनव से खुशीद एहमत की रिपोर्ट
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