00:00कनहया की बाल लीलाए भक्ती का सबसे सुन्दर रूप है
00:03बच्पन में कृष्ण को मखन बहुत प्रिय था
00:06गोपिया अक्सर शिकायत लेकर मा यशोदा के पास आती
00:10कि कनहया ने उनके घर से मखन चुरा लिया
00:14लेकिन वही कनहया जब मुस्कुराते हुए पकड़े जाते
00:17तो हर कोई उनकी ममता में खो जाता
00:20कृष्ण की ये लीला केवल मनोरंजन नहीं थी
00:23बल्कि ये दर्शाती है कि भगवान भक्तों के घरघर जाकर
00:27प्रेम रूपी मखन चुराते हैं
00:29आज भी जब हम माखन चुर कहते हैं
00:32तो हमारे मन में उस नटखट बाल कृष्ण की छवी आती है
00:35ये हमें सिखाता है कि इश्वर को केवल भव्य पूजा से नहीं
00:39बल्कि सच्चे प्रेम और सरलता से भी पाया जा सकता है
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