00:00रात के दो बजे, मैं पुरानी हवेली के अंदर अकेला खड़ा था, अंधेरे कमरे में एक कोने से कदमों की आवाज आई, ठक, ठक, ठक, दिल जोर से धड़कने लगा, तौर जलाई तो दीवार पर लिखा मिला, वापस मताना, अचानक, पीछे से किसी ने मेरा कंधा छुलि
00:30सासे रुख सी गई, तभी कमरे का दर्वाजा अपने आप जोर से बन होगा, क्या मैं आज रात जिन्दा लोट पाऊंगा, या मेरा साया इस हवेली का हिस्सा बन जाएगा?
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