00:04धन्यवाद, कलकाली मंदिर के पास ब्रगुकुटी में आजा ना, तुम्हारा सारा हिसाब चुकता कर दूगा
00:30जा ना, येल, ना, ये लो
00:50रभू, थिर तुम तो मर चुकला है ? तुम सब ही हाँड़ कैसे ?
00:57तो मुर्दों से ब्लवर करना हैं?
01:05जब जिन्दा लोग धोका करें, तब इनसान मुर्दों से ब्योपार ना करें, तो किस से करें?
01:13तुमने मेरे भूले भाले बेटे को लूट लिया, मैंने बदला लिया, तुम्हें तुम्हारी लाख मौने वापस नहीं मिल सकती
01:24क्यों, क्यों, क्यों, क्यों, क्यों, क्यों, कभी मुर्दों विमान वापस करते हैं?
01:39भूत ने मुझे बूट लिया, तुम अपना काला मुझ करके यहां से चल जाओ
01:47कुछ तो दयागरू भी अपूर्वने जिनकी मदद की थी, उनहीं मित्रों ने उसे ठोकरे मारी, दुनिया वालों ने उसे धग्के दिये, और जब कई दिन के भूके को एक रूखी सूखी रोटी मिली, तो वो भी उसके भागे में नहीं थी.
02:08जड़े भाइरो!
02:38जड़े।
02:40वू से जड़ए।
02:44वू में जड़े।
02:49विराजी जड़े।
02:51वू प्री प्या कम सब्रूठ हो गया है? पन्या दान को मुझा करेगा?
03:04बपू, बबाबा बबू।
03:07अहाप तो ये कौन है
03:29आज कुमार मैंने तुम्हें चेताब नहीं दी थी
03:33कि मैं जादू से तुम्हें सत्यकाम बना दूंगा
03:37लेकिन अगर असली सत्यकाम आ गया तो तुम फिर से अपने असली रूप में आ जाओगे
03:44तुम कैसे बच गए
03:52तो वो खुनी आपने भेजाता
03:56वो समझा कि उसने मुझे मार डाला है
03:59लेकिन योग क्रिया से मैंने अपने प्राण उपर चड़ा लिये थे
04:03कोई बात नहीं हम तुम्हें अभी उपर भेज देंगे
04:07शमशेर माराज ले चलो अंजली को जबर दस्की अपने साथ
04:10इसके लिए तुम्हे बेरी लाज से घुजब नहोंगा
04:13रुप जाओ राजगुमार अम्रीश तुम प्रजा पर जुम करके देश की मर्यादा को तोड रहे हूं लेचलो इसे
04:24लेकिन महानाच महानाच
04:27बेटे
04:39मैं यह संकल्प करके आयुत्या गया था
04:43कि भगवान राम के चरणों में प्राण त्याग तूं
04:47किन्तु सर्यो नदी में मेरा पेर फिसल गया
04:50और मेरे जीवन की लिला वही समापत हो गया
04:54आपूर तुम्हें धन्ट की जरूरत थी
05:05तुम मुझ से कहते
05:08मैं तुम्हें अवश्य देता
05:12भटके हुए दोस्त को सबक सिखाने के लिए ही
05:16मैंने यह लाक महरे तुम से ली थी
05:20लो
05:22जी तुम रखो
05:26मुझ से ज्यादा इसकी जरूरत तुम्हें है
05:30लो
05:32च क्या प्तुम्हें
05:34वह जो क्या इसकी質 जद ल traffic
05:36और आपट लिए
05:38क्या और आम ut
05:40इसे क्यादची
05:42झाम क्या
05:44क्यार खिसना इसकी है
05:46खीकष तूम्हें मुझогब
05:47क्यारत लुम्हें
05:48क्यारत लुम्हें
05:58क्यारत लीक
06:00कि पेटे मेरा इन पर कोई अधिकार नहीं है कि अधिकर नहीं कि वैटाल रुक गया और किया उसने विक्रम से सवाल
06:26बता विक्रम जिस धन के लिए अपूर्व उमर भर तरस रहा था उस धन को उसने लौटा क्यों दिया
06:37जिन्दिकी की ठोकरों ने अपूर्व की आँखें खोलती हैं वो समझ गया कि धन के तीनों रूप दुखदाई हैं
06:47जब धन नहीं होता तो उसे कमाने का जंजट जब आ जाता है तो उसे संभालने का जंजट और जब आकर चला जाता है तो इंसान को जीतेची मार जाता है
07:00धन का लोब कभी भी इंसान को चैन से नहीं रहने देता वक्त ने उसे सिखा दिया कि इंसान गलत राष्टे पर चल कर कभी भी अपनी किस्मत नहीं बना सकता
07:14वाव विक्रम ठीक न्याय किया तुम मैं जा रहा हूँ
07:19मैं तुझे नहीं जोड़ूँगा
07:30हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ ह
Be the first to comment